- पूरे प्रदेश का बिजली सिस्टम उपभोक्ताओं की अपेक्षाओं के मुताबिक नही जिससे चाहकर भी बिजली कम्पनियाॅं सब को नही दे सकती अच्छी बिजली
- पीक आवर्स में डायवर्सी फैक्टर 1 अनुपात 1 पर बिजली कम्पनियों का सिस्टम पूरी तरह मिस मैच
लखनऊ 25 मई। पूरा प्रदेश इस समय भीषण गर्मी की चपेट में है। अनेकों जनपदों में बिजली आपूर्ति सुचारू रूप से उपभोक्ताओं को महज इसलिये अच्छी गुणवत्ता की बिजली नही मिल पा रही है क्योंकि बिजली कम्पनियों का सिस्टम अधिभारित है। उपभोक्ता परिषद ने खुलासा करते हुए कहा कि पूरे प्रदेश में टैरिफ में अनुमोदित आंकडों की बात की जाये तो वर्ष 2017-18 में प्रदेश के बिजली उपभोक्ताओं की जो कुल सॅंख्या दर्शायी गयी है वह लगभग 2 करोड 11 लाख है और उनके द्वारा लिया गया संयोजित भार 5 करोड 18 लाख किलोवाट है।
उपभोक्ता परिषद का कहना है कि वहीं दूसरी ओर आयोग द्वारा अनुमोदित ट्रांसमीशन टैरिफ पर नजर डालें तो उसमें वर्ष 2017-18 में 132 केवी सबस्टेशनों की जो कुल क्षमता दर्शायी गयी है वह लगभग 44051 एमबीए है। यदि इसे किलोवाट में निकाला जाये तो लगभग 3 करेाड 96 लाख किलोवाट होगा। अर्थात प्रदेश के विद्युत उपभोक्ताओं द्वारा लिये गये संयोजित भार व 132 केवी सबस्टेशनों की क्षमता के बीच लगभग 1 करोड किलोवाट का गैप है। इस भीषण गर्मी में पीक आवर्स में जब उपभोक्ता अपने संयोजित भार का फुल लोड चलायेगा और ऊपर से सिस्टम पर लगभग 25 प्रतिशत बिजली चोरी का लोड। ऐसे में सिस्टम पूरी तरह मिस मैच कर रहा है। चाहकर भी बिजली कम्पनियाॅं उपभोक्ताओं को बिजली उपलब्ध होते हुये भी जब तक सिस्टम नही सही होगा बिजली नही दे पायेंगी। यदि डायवर्सी फैक्टर 1 अनुपात 1 पर नजर डालें तो पीक आवर्स में सिस्टम की क्षमता और उपभोक्ताओं द्वारा लिये गये संयोजित भार की क्षमता कम से कम बराबर होनी चाहिये।







