- सिंगल प्वाइन्ट कनेक्शन के तहत मल्टीस्टोरी काम्प्लेक्सों में नियामक आयोग से तय टैरिफ से कई गुना बिल्डरों द्वारा की जा रही अधिक वसूली पर लगेगा पूर्णतया पूर्ण विराम
लखनऊ, 24 जून। बिजली कम्पनियों में सिंगल प्वाइन्ट कनेक्शन लेकर मल्टी स्टोरी काम्प्लेक्सों में बिल्डरों द्वारा वहां के उपभोक्ताओं का बड़े पैमाने पर हो रहे शोषण से मुक्ति के लिए विद्युत वितरण संहिता पुनर्विलोकन सब कमेटी की बैठक नियामक आयोग द्वारा 11 जुलाई को बुलायी गयी है, जिसमें अनेकों विद्युत उपभोक्ताओं सम्बन्धी कानूनों पर चर्चा की जायेगी।
बता दें, लम्बे समय से मल्टीस्टोरी काम्पलेक्सों में बिल्डरों द्वारा बड़े पैमाने पर विद्युत उपभोक्ताओं से नियामक आयोग द्वारा तय टैरिफ से कई गुना अधिक वसूली की जा रही थी, जिसको लेकर अनेकों बार उपभोक्ता परिषद ऊर्जा मंत्री के सामने भी यह मुद्दा उठाया गया।
अन्ततः 11 जुलाई को एक ऐसा नया कानून बनाने का रास्ता साफ होगा, जिसके तहत मल्टीस्टोरी काम्प्लेक्स में रहने वाला कोई भी विद्युत उपभोक्ता बिजली विभाग से अपना अलग से कनेक्शन ले सकेगा। जहां यह व्यवस्था सिंगल प्वाइन्ट कनेक्शनों पर लागू होगी, वहीं उत्पीड़न के मद्देनजर पुराने मल्टीस्टोरी काम्प्लेक्सों में भी इस व्यवस्था को लागू करने के लिये उपभोक्ता परिषद अध्यक्ष द्वारा एक सुलभ प्रस्ताव पेश किया जायेगा। जिससे नया कानून यथाशीध्र प्रभावी हो सके। इस पूरे प्रकरण में ऊर्जा मंत्री श्रीकान्त शर्मा का योगदान काफी सराहनीय रहा, जिनके निर्देशों के बाद पावर कार्पोरेशन ने भी इस गम्भीर मुद्दे पर उपभोक्ताओं को न्याय दिलाने के लिये आयोग द्वारा प्रस्तावित प्रस्ताव पर कुछ शर्तों के साथ अपनी सकारात्मक सहमति दे दी है।
राज्य विद्युत उपभोक्ता परिषद के अध्यक्ष व विद्युत वितरण संहिता पुनर्विलोकन सब कमेटी के सदस्य अवधेश कुमार वर्मा ने कहा कि मल्टी स्टोरी में बिल्डरों द्वारा बड़े पैमाने पर विद्युत उपभोक्ताओं का शोषण किये जाने हेतु 11 जुलाई को बनने वाले नये कानून के मुद्दे पर बिजली कम्पनियां व प्रदेश के विद्युत उपभोक्ताओं की तरफ से शामिल उपभोक्ता परिषद सभी का मत सकारात्मक व एक है। निश्चित ही बैठक में बिना किसी विरोध के नया कानून बनने का रास्ता साफ होगा और बिल्डरों की मनमानी से आम जनता को बड़ी राहत मिलना तय है।
उपभोक्ता परिषद अध्यक्ष ने कहा कि सब कमेटी की बैठक में उपभोक्ता सम्बन्धी अनेकों कानूनी अड़चनों पर भी चर्चा की जायेगी, जिसमें सर्वसम्मति से जो भी संशोधन जरूरी होगा उस पर उपभोक्ता परिषद पूरी मुस्तैदी से उपभोक्ता हित में अपनी बात रखेगा।







