नियामक आयोग का आश्वासन आयोग नियमों की परिधि में उपभोक्ता हित में उठायेगा उचित कदम और करेगा प्रभावी कार्यवाही
लखनऊ, 03 अगस्त 2018: प्रदेश के उत्पादन गृहों से पैदा होने वाली बिजली की लागत में 54 पैसा प्रति यूनिट कमी होने के मामले को लेकर उसका लाभ प्रदेश के विद्युत उपभोक्ताओं को दिलाने के लिये उप्र राज्य विद्युत उपभोक्ता परिषद के अध्यक्ष अवधेश कुमार वर्मा ने आज नियामक आयोग अध्यक्ष श्री आर पी सिंह व आयोग सदस्य श्री एस के अग्रवाल से मिलकर विद्युत अधिनियम 2003 की धारा 62 (4) व मल्टीईयर टैरिफ रेग्यूलेशन 2014 की धारा 20 के तहत एक जनहित प्रत्यावेदन सौंपा।
उपभोक्ता परिषद अध्यक्ष ने विस्तार से आयोग अध्यक्ष को अपने प्रत्यावेदन में उठाये गये बिन्दुओं से अवगत कराते हुये कहा कि प्रदेश के उत्पादन गृहों से पैदा होने वाली बिजली की उत्पादन लागत में लगभग में लगभग 54 पैसे प्रति यूनिट की कमी आयी है, उपभोक्ता परिषद अध्यक्ष ने कहा कि उत्पादन निगम के संलग्नक आंकडों पर यदि ध्यान दें जिसमें वर्ष 2016-17 में प्लाण्ट लोड फैक्टर (पीएलएफ) 68.42 प्रतिशत था, वह अब 2017-18 में 73.32 तथा वर्ष 2018-19 में जून 2018 तक 84.10 प्रतिशत हो गया है।
जहां जनरेशन लागत वर्ष 2016-17 में रू0 3.99 प्रति यूनिट थी वह वर्ष 2017-18 में रू0 3.22 प्रति यूनिट व 2018-19 में रू0 2.72 प्रति यूनिट हो गयी है। इस प्रकार बिल लागत क्रमशः रू0 4.04 प्रति यूनिट, 3.32 प्रति यूनिट और वर्ष 2018-19 में 3.26 प्रति यूनिट हो गयी है। इस प्रकार उत्पादन लागत में लगभग 54 पैसे प्रति यूनिट की कमी आ गयी है। वर्ष 2018-19 के लिये विद्युत नियामक आयोग द्वारा राज्य उत्पादन निगम से जो कुल बिजली खरीदना अनुमानित है, वह लगभग 31 हजार 689 मिलियन यूनिट है। ऐसे में लगभग 1700 करोड़ रू0 बिजली खरीद की लागत में कमी आयेगी। ऐसे में विद्युत अधिनियम 2003 के प्राविधानानुसार इसका लाभ प्रदेश की जनता को बिजली दर में कमी करके दिया जाना चाहिए।
आयोग अध्यक्ष श्री आर पी सिंह व सदस्य श्री एस के अग्रवाल ने उपभोक्ता परिषद अध्यक्ष को आश्वासन दिया कि आयोग इस मामले पर नियमों के तहत प्रभावी कदम उठाते हुये आगे उचित कार्यवाही करेगा।
उपभोक्ता परिषद अध्यक्ष ने आगे कहा कि जहां वर्ष 2016-17 में एक यूनिट बिजली बनाने में लगभग 1.93 एमएल प्रति यूनिट तेल खर्च होता था, अब वहीं वर्ष 2018-19 में जून 2018 तक के आंकड़ों पर ध्यान दें तो मात्र 0.568 एमएल तेल खर्च हो रहा है। इसी प्रकार से एक यूनिट बिजली बनाने में जो पहले 0.73 किग्रा प्रति यूनिट कोयला खर्च होता था, अब वह घटकर वर्ष 2018-19 में जून 2018 तक 0.662 किग्रा प्रति यूनिट हो गया है। इसी प्रकार आक्ज़लरी पावर कन्जम्पशन जो वर्ष 2016-17 में 9.26 प्रतिशत था अब वह वर्ष 2018-19 में जून 2018 तक 8.08 प्रतिशत हो गया है, जो अपनी आप में व्यापक सुधार को परिलक्षित करता है।







