- आयोग का प्रबन्ध निदेशक, मध्यांचल को सख्त निर्देश लेसा अन्तर्गत घरेलू विद्युत उपभोक्ताओं के भार बढ़ाने के मामले में विद्युत वितरण संहिता 2005 व टैरिफ आदेश के प्राविधानों का पूर्ण पालन करने के पश्चात ही बढ़ाया जाये भार
- कई वर्ष पूर्व इसी प्रकार की कार्यवाही में प्रबन्ध निदेशक, पावर कार्पोरेशन आयोग में हो चुके हैं तलब गलती सुधारने के बाद ही मिली थी उन्हें राहत
लखनऊ, 19 जून। मध्यांचल विद्युत वितरण निगम अन्तर्गत राजधानी लेसा में हजारों की संख्या में घरेलू विद्युत उपभोक्ताओं जिनके मीटर के एमडीआई में स्वीकृत भार से लगातार 3 माह अधिक भार आया है, उनके भार को बिना नोटिस दिये बढ़ाया जा रहा है। जिसको लेकर उप्र राज्य विद्युत उपभोक्ता परिषद के अध्यक्ष व विद्युत वितरण संहिता रिव्यू पैनल के सदस्य अवधेश कुमार वर्मा ने आज नियामक आयोग अध्यक्ष एसके अग्रवाल व सदस्य कौशल किशोर शर्मा से मुलाकात कर एक जनहित प्रत्यावेदन सौंपा और इस मामले पर गंभीर चर्चा की।
उपभोक्ता परिषद द्वारा सौंपे गये प्रत्यावेदन में यह मुद्दा उठाया गया कि विद्युत वितरण संहिता 2005 व आयोग द्वारा जारी टैरिफ आदेश वर्ष 2017-18 में स्पष्ट रूप से प्राविधानित है कि किसी भी घरेलू विद्युत उपभोक्ता का जब लगातार 3 माह उसके स्वीकृत भार से अधिक भार आयेगा, ऐसे उपभोक्ता को एक माह की नोटिस दी जायेगी और इसके बाद ही नियमानुसार कोई कार्यवाही होगी। चूंकि जिस माह विद्युत उपभोक्ता का जो भी अतिरिक्त भार बढ़ता है उस पर वह टैरिफ के अनुसार अतिरिक्त चार्ज अदा करता है। मध्यांचल विद्युत वितरण निगम के अधिकारी व लेसा के अभियन्ताओं द्वारा यह तर्क दिया जा रहा है कि उपभोक्ता के बिल में ही नोटिस अंकित है। लेकिन उन्हें शायद यह ज्ञान नहीं है कि विद्युत वितरण संहिता की धारा-9.3 के तहत उपभोक्ता को नोटिस तामील की जानी है। अर्थात रजिस्टर्ड/कोरियर/प्राविधानित व्यवस्था के अनुसार ही मान्य होगा।
आयोग द्वारा मामले की गम्भीरता को देखते हुए अविलम्ब प्रबन्ध निदेशक, मध्यांचल विद्युत वितरण निगम को यह निर्देश दिये गये हैं कि लेसा अन्तर्गत घरेलू विद्युत उपभोक्ताओं के भार बढ़ाने के मामले में विद्युत वितरण संहिता 2005 व टैरिफ आदेश 2017-18 के प्राविधानों का पूर्ण पालन करने के पश्चात् ही भार बढ़ाया जाये।
उपभोक्ता परिषद अध्यक्ष ने कहा कि लेसा जल्दबाजी में अपने राजस्व को बढ़ाने के लिये टैरिफ आदेश व विद्युत वितरण संहिता का उल्लंघन कर रहा है, जो आयोग आदेशों की अवमानना है। पूर्व में भी कई वर्ष पहले इस प्रकार की कार्यवाही में प्रबन्ध निदेशक, पावर कार्पोरेशन को आयोग तलब कर चुका है और पावर कार्पोरेशन द्वारा अपनी गलती मानते हुए सुधार किया गया था और भविष्य में इस प्रकार की गलत न करने का आयोग को आश्वासन भी दिया गया था। इसके बावजूद भी उपभोक्ता विरोधी कार्यवाही की जा रही है।
नोटिस देने के बाद उपभोक्ता द्वारा यदि उसका जवाब पावर कार्पोरेशन को इस आशय के साथ सौंपा जाता है कि भविष्य में अधिक भार का प्रयोग नहीं किया जायेगा तो उसके भार को नहीं बढ़ाया जा सकता। उपभोक्ता द्वारा नोटिस का जवाब न देने की दशा में ही बिजली कम्पनियां आगे की कार्यवाही के लिये नियमानुसार स्वतंत्र हैं।







