- ऊर्जा निगमों में 23 जून को होगा साक्षात्कार, दलित अभियन्ताओं ने लगायी मुख्यमंत्री से रोक लगाने की मांग
- एसोसिएशन ने लगाया आरोप दलित व पिछड़े वर्ग के अभियन्ताओं के साथ हो रहा अन्याय
लखनऊ, 21 जून। बिजली कम्पनियों में लगभग आधा दर्जन निदेशकों के पदों पर 23 जून को होने वाले साक्षात्कार को लेकर दलित अभियन्ताओं में भारी रोष व्याप्त हो गया है। दलित व पिछड़े वर्ग के अभियन्ताओं के शीर्ष संगठन पावर आफिसर्स एसोसिएशन की आज एक आपात बैठक में इस बात पर घोर चिन्ता व्यक्त की गयी कि एक तरफ केन्द्र की मोदी सरकार पदोन्नति में आरक्षण जारी कर दलितों को न्याय देने की बात करती है। यहां उप्र में बड़े पैमाने पर रिक्त पद भरे जा रहे हैं।
एसोसिएशन के पदाधिकारियों ने प्रदेश के व प्रदेश के ऊर्जा मंत्री से यह मांग की है कि जब तक उप्र में आरक्षण अधिनियम 1994 की धारा 3(7) को बहाल कर दलित कार्मिकों के लिये पदोन्नति की व्यवस्था न शुरू कर दी जाये तब तक ऊर्जा निगमों में निदेशकों के साक्षात्कार सहित सभी पदों पर पदोन्नति की प्रक्रिया पर रोक लगायी जाये। गौर तलब है कि निदेशकों की अर्हता में मुख्य अभियन्ता के पद पर होना जरूरी है। वर्तमान में पदोन्नति में आरक्षण समाप्त होने के बाद उप्र पावर कार्पोरेशन व वितरण निगमों में एक भी पद पर मुख्य अभियन्ता दलित संवर्ग का नहीं है, जो अपने आप में चिन्ता का विषय है।
पावर आफिसर्स एसोसिएशन के अध्यक्ष केबी राम, कार्यवाहक अध्यक्ष अवधेश कुमार वर्मा, अति. महासचिव अनिल कुमार, सचिव आरपी केन, शक्ति सिंह, राकेश पुष्कर, संगठन सचिव, अजय कुमार, आदर्श कौशल, राव साहब गौतम, राजेश, रितेश आनन्द, अनिल कुमार, चन्द्रशेखर ने कहा कि एक साजिश के तहत बिजली कम्पनियों में निदेशकों के पद के सामूहीकरण की व्यवस्था को गुपचुप तरीके से 20 अप्रैल,2018 को सचिव ऊर्जा द्वारा एकल पद की व्यवस्था में परिवर्तन कर सभी निगमों में पिछड़े वर्गोें के अभियन्ताओं के लिये पिछली सरकार में बिजली कम्पनियों में निदेशकों के पद पर लागू आरक्षण व्यवस्था को भी समाप्त कर दिया गया है, जो अपने आप में बहुत बड़ा षडयंत्र है।
एसोसिएशन के नेताओं ने मध्यांचल कम्पनी के निदेशक वाणिज्य श्री शुभचन्द्र झा पर भी लगाया बड़ा आरोप कहा वह हमेशा दलित अभियन्ताओं को लक्ष्य बनाकर बैठकों में करते हैं उनका अपमान, जिससे पूरे दलित अभियन्ताओं में भारी रोष। इसी तरह होता रहा उत्पीड़न तो दलित अभियन्ता उनके खिलाफ आन्दोलन करने के लिये होंगे बाध्य।







