लखनऊ, 30 जून। उपभोक्ता परिषद ने कहा कि पावर कार्पोरेशन आये दिन जितनी बैठकें करता है उसमें 90 प्रतिशत बैठकें इस बात के लिये होती हैं कि कैसे राजस्व बढ़े, कैसे उपभोक्ताओं से ज्यादा वसूली हो लेकिन क्या पावर कार्पोरेशन ने कभी सोचा कि उपभोक्ता सेवा में सुधार और उनके लाभों को उन तक पहुंचाने के लिये कितनी बैठकें की गयीं? चाहे वह किसानों से अधिक वसूली का मामला हो, नारमेटिव बिलिंग का मामला हो या ज्यादा आपूर्ति के नाम पर शहरी दर पर वसूली का मामला हो या फिर इलेक्ट्रिसिटी ड्यूटी या सिक्योरिटी पर ब्याज व मुआवजा दिये जाने का मामला हो। इस पर क्या किया गया?
इस मामले में उपभोक्ता परिषद ने यूपी सरकार से व ऊर्जा मंत्री से यह मांग की है कि प्रदेश की जनता को मिलने वाले उसके सभी इन लाभों व अधिकारों के लिये सरकार हर बिजली कम्पनी में एक नोडल अफसर की नियुक्ति करे, जो प्रत्येक माह अपनी रिर्पोट सरकार को सौंपे, जिससे सही मायने में इस बात का खुलासा हो सके कि उपभोक्ताओं को कानूनन मिलने वाला लाभ मिल रहा है अथवा नहीं।
उप्र राज्य विद्युत उपभोक्ता परिषद के अध्यक्ष व विश्व ऊर्जा कौंसिल के स्थायी सदस्य अवधेश कुमार वर्मा ने कहा कि जो पावर कार्पोरेशन अपना राजस्व बढ़़ाने, कुछ उपभोक्ता सेवाओं पर जीएसटी वसूलने, टैरिफ लागू करने में कोई देरी नहीं करता और प्रदेश के उपभोक्ताओं से हर वसूली समय से कर लेता है। लेकिन बड़े दुर्भाग्य की बात है कि 5 अप्रैल, 2018 को प्रदेश के 60 लाख ग्रामीण अनमीटर्ड घरेलू विद्युत उपभोक्ताओं से अधिक वसूल की गयी लगभग रू0 523 करोड़ इलेक्ट्रिसिटी ड्यूटी की वापसी व 10 मई, 2018 को जारी सभी विद्युत उपभोक्ताओं को 6.75 प्रतिशत सिक्योरिटी पर ब्याज दिये जाने का आदेश आज तक लागू नहीं हो पाया। जिसके चलते प्रदेश के विद्युत उपभोक्ताओं को लाभ नहीं मिल पा रहा है।
उन्होंने कहा कि सबसे चौकाने वाला मामला यह है कि जब भी उपभोक्ताओं को राहत देने की बात आती है तो पावर कार्पोरेशन प्रबन्धन के उच्चाधिकारी कछुवे की चाल से चलते हैं जिससे उपभोक्ता अपना लाभ भूल जाये और वह उसको डकार जायें। उन्होंने कहा कि प्रदेश के विद्युत उपभोक्ताओं के बिलों में लगभग 227 करोड़ सिक्योरिटी पर ब्याज समायोजित होना है। प्रदेश में लगभग 15 प्रतिशत विद्युत उपभोक्ताओं की पूर्व में जमा सिक्योरिटी सिस्टम पर फीड ही नहीं है, जिससे वर्षों से वह अपनी सिक्योरिटी पर सही ब्याज नहीं पा रहे हैं और वहीं जहां फिक्स चार्ज वसूली का मामला रहता है वहां प्रत्येक उपभोक्ता का भार फीड रहता है।







