- लेसा की विद्युत व्यवस्था पर नियामक आयोग का बड़ा फैसला मुख्य अभियन्ता लेसा ट्रांस गोमती व मुख्य अभियन्ता सिस गोमती से लेसा में सुधार का विस्तृत प्लान व कृत कार्यवाही की पूरी रिपोर्ट आयोग में तलब
- उपभोक्ता परिषद के प्रत्यावेदन पर आयोग सख्त कहा 2012 में आयोग निर्देश के बाद भी उपभोक्ता सेवा में क्यों नहीं हुआ सुधार और क्यों नहीं सौंपी गयी रिपोर्ट
लखनऊ 31 मई। मध्याॅंचल अन्तर्गत राजधानी लेसा की बदहाल विद्युत व्यवस्था में व्यापक सुधार कराने के लिये उप्र राज्य विद्युत उपभोक्ता परिषद के अध्यक्ष व विश्व ऊर्जा कौंसिल के स्थायी सदस्य अवधेश कुमार वर्मा द्वारा कल 30 मई को उत्तर प्रदेश विद्युत नियामक आयोग में दाखिल जनहित प्रत्यावेदन पर आज विद्युत नियामक आयोग के सदस्य कौशल किशोर शर्मा व सचिव संजय श्रीवास्तव ने सख्त कदम उठाते हुए मुख्य अभियन्ता लेसा ट्रन्स गोमती व मुख्य अभियन्ता लेसा सिस को निर्देश भेजकर विस्तृत प्लान तलब किया गया है। आयोग द्वारा जारी आदेश की प्रतिलिपि प्रबन्ध निदेशक मध्यांचल को भी भेजी गई है।
उपभोक्ता परिषद अध्यक्ष द्वारा दाखिल जनहित प्रत्यावेदन के क्रम में आयोग सचिव संजय श्रीवस्तव द्वारा आज जारी आयोग आदेश में मुख्य अभियन्ता लेसा को विद्युत वितरण संहिता 2005 की धारा 4.2 (ए) के तहत विस्तृत प्लान आयोग को सौंपने हेतु निर्देशित किया गया है। जिसमें लेसा को यह भी बताना होगा कि लेसा की विद्युत व्यवस्था में सुधार के लिये क्या कदम उठाये जा रहे है, उपभोक्ताओं के संयोजित भार व लेसा की 33/11 केे वी सबस्टेशनों की क्षमता में इतना जादा गैप क्यों है। मुख्य अभियन्ता लेसा से यह भी स्पष्टीकरण मांगा गया है कि वर्ष 2012 में उपभोक्ता परिषद की याचिका पर आयोग द्वारा लेसा को भेजे गये निर्देश के बावजूद भी आयोग को रिपोर्ट लेसा द्वारा आज तक क्यों नहीं सौंपी गयी।
गैारतलब है कि कल उपभोक्ता परिषद अध्यक्ष, अवधेश कुमार वर्मा द्वारा अपने जनहित प्रत्यावेदन में यह मुद्दा उठाया गया था जिसमे उन्होंने कहा था कि लेसा में लगभग 9 लाख 52 हजार उपभोक्ता हैं। जिनके द्वारा लिया गया कुल संयोजित भार लगभ 26 लाख 70 हजार किलोवाट है। वहीं लेसा अन्तर्गत 33/11 केवी विद्युत उपकेन्द्रों की क्षमता लगभग 2024 एमबीए है। यदि इसे किलोवाट में निकाला जाये तो यह 18 लाख 21 हजार किलोवाट होगा। यानि कि उपभोक्ताओं द्वारा लिये गये संयोजित भार और सिस्टम के बीच लगभग 8 लाख किलोवाट का गैप है।
पीक आवर्स में जब उपभोक्ता अपना पूरे भार का उपभोग करता है उस दौरान सिस्टम काॅंपने लगता है। पीक आवर्स में डायवरसी फैक्टर 1ः1 होता है। ऊपर से सिस्टम पर लगभग 23 प्रतिशत बिजली चोरी का लोड। ऐसे में जब तक लेसा का सिस्टम पूरी तरीके से उच्चीकृत नही किया जाता इसी तरह उपभोक्ताओं को परेशानी झेलनी पडेगी। जबकि विद्युत वितरण संहिता 2005 की धारा 4.2 (ए) में प्राविधानित है कि सिस्टम का भार जैसे ही 80 प्रतिशत पर पहुचेगा तुरन्त उसका सुदृणीकरण करना अनिवार्य है लेकिन उस पर लेसा प्रशासन ध्यान नही दे रहा है। जो चिन्ता का विषय है।







