ऊर्जा मन्त्री को उपभोक्ता परिषद ने दिए उपभोक्ता हित मानक पर 100% मार्क्स

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  • सरकार के एक वर्ष के कार्यकाल पर उपभोक्ता परिषद ने उपभोक्ता हितो पर बनाये मानक पर दिए नियामक आयोग को 40% और यूपीपीसीएल को 30% मार्क्स
  • पावर कारपोरेशन प्रबन्धन सालभर जनता से जहां रहा दूर वहीं कन्सलटेन्टो के मकडजाल में बैठको को बनाया कीर्तिमान
  • नियामक आयोग पर अनेको मुद्दो पर पावर कारपोरेशन व सरकार का दिखा साफ दबाव
लखनऊ, 18 मार्च। उप्र सरकार का जहां एक वर्ष पूरा हो गया उसपर उपभोक्ता परिषद ने अपने उपभोक्ता हितो के मानको पर कुछ बिन्दुओं को शामिल करते हुए स्वयं का मानक निर्धारित किया कि सरकार के एक वर्ष के ऊर्जा सेक्टर के कार्यकाल को 100 में कितने नम्बर दिये जाये उस पर उपभोक्ता परिषद द्वारा जिन मानको पर बिजली विभाग को कसौटी पर कसा गया उसमे प्रमुख रूप से बिजली दरों में बढोत्तरी, विद्युत आपूर्ति, उपभोक्ता सेवा के निर्धारित मानक, बिजली चोरी, अनाप सनाप खर्च नियामक आयोग की उपभोक्ताओं के प्रति भूमिका, पावर कारपोरेशन में कन्सलटेन्टो के मकडजाल, अनाप-सनाप मीटर खरीद, किसानो व ग्रामीणो पर आयोग द्वारा तय टैरिफ से भिन्न नारमेटिब अधिक वसूली, ऊंची दरो पर बिजली खरीद सोलर बिजली खरीद सहित उपभोक्ता सम्बन्धी विभिन्न नीतिगत शिकायतो व आयोग द्वारा निर्मित रेगुलेशन का पालन का मुद्दा शामिल था।
उपभोक्ता परिषद के स्वयं बनाये हुए मानक पर प्रदेश के ऊर्जा मन्त्री जहां 100 प्रतिशत सफल साबित हुए वहीं पावर कारपोरेशन सहित बिजली निगम पूरी तरह उपभोक्ता कसौटी पर पास नही हुई उपभोक्ता परिषद ने ऊर्जा निगमो के प्रबन्ध को 100 मे से केवल 30 नम्बर दिया है वहीं उप्र विद्युत नियामक आयोग को मात्र 40 नम्बर दिया है।
उप्र राज्य विद्युत उपभोक्ता परिषद के अध्यक्ष व विश्व ऊर्जा कौसिल के स्थाई सदस्य अवधेश कुमार वर्मा ने कहा कि प्रदेश के ऊर्जा मन्त्री श्री श्रीकान्त शर्मा के एक वर्ष के कार्यकाल से उपभोक्ता परिषद पूरी तरह से सन्तुष्ट है उनके द्वारा जिस ईमानदारी से उपभोक्ताओं की समस्यो हेतु अनवरत जनता दरबार लगाकर उनकी समस्याओ को हल करने का प्रयास किया जा रहा है वह सराहनीय है उन्होने जिस प्रकार से जनता व आम उपभोक्ता के लिए दरबार खुला रखा गया और मेहनत से उनके द्वारा उपभोक्ता समस्याओ के निदान के लिए कदम उठाये गये उससे प्रदेश के ऊर्जा मन्त्री जी 100 मे 100 नम्बर पाने के लिए उपभोक्ता परिषद के मानक पर पूरी तरह सफल शाबित हुए।
उपभोक्ता परिषद ने एक वर्ष के पावर कारपोरेशन प्रबन्धन के कार्यकाल पर सवाल खड़ा करते हुए कहा कारपोरेशन प्रबन्धन कन्सलटेन्टो के मकडजाल में फसा रहा बैठक करने का कीर्तिमान स्थापित किया लेकिन प्रबन्धन लगातार प्रदेश के उपभोक्ताओं से दूरी बनाये रहा सालभर बैठकर आंकड़े एकठ्ठा किये जाते रहे लेकिन अपेक्षित सुधार नहीं दिखा प्रबन्धन ने मनमाने तरीके से निर्णय लिये जिससे अनेको उपभोक्ता हित के मामलो पर नियमो की अवहेलना हुई इसलिए उपभोक्ता परिषद प्रबन्धन को केवल 100 मे से 30 नम्बर देता है।
उपभोक्ता परिषद ने नियामक आयोग से भी संतुष्ट नहीं दिखा क्योंकि ज्यादातर के मामलो में कारपोरेशन व सरकार का दबाव पूरी तरह आयोग के निर्णयों मेे देखा गया चाहें वह बिजली दर बढोत्तरी का मामला हो, या फिर सोलर, बजाज सहित टोरेन्ट पावर व अन्य निजी घरानो का मामला रहा हो सब पर पारदर्शिता का अभाव रहा इसलिए उपभोक्ता परिषद नियामक आयोग को भी 100 मे से 40 नम्बर देता है।

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