बिजली विभाग की कहीं निजीकरण की साजिश तो नहीं ?

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राज्य विद्युत उपभोक्ता परिषद ने लगाया आरोप:

  • कहा: 100 % बढ़ोतरी के बावजूद बिजली कंपनियों की आर्थिक हालत खराब
    200 करोड़ से ज्यादा के है कुल रखे कंसल्टेंट फिर भी सुधार क्यों नहीं?
  • सरकारी विभागों पर 11 हजार करोड़ से ज्यादा का बकाया प्रभावी वसूली क्यों नहीं?

राज्य विद्युत उपभोक्ता परिषद ने पावर कारपोरेशन की ख़राब आर्थिक हालत पर बड़ा आरोप लगते हुए कहा कि
यदि पिछले वर्षो की बिजली दरों पर नजर डाले तो ज्यादातर कैटेगरी के उपभोक्ताओ की दरों में 7 वर्षो में 100 प्रतिशत से ज्यादा की बढ़ोतरी हो चुकी है। इसके बावजूद भी बिजली कम्पनियां आर्थिक संकट का रोना रो रही है परिषद का कहना है कि कहीं इसके पीछे तथाकतिथ संकट का बवाल खड़ा करके निजीकरण की गहरी साजिश तो नहीं हो रही और यदि ऐसा है तो बहुत ही गलत है ? और यदि ऐसा नहीं है तो पावर कारपोरेशन को अपनी फिजूल खर्ची और अक्षमता की ओर ध्यान देना होगा सुधार और मोनेटरिंग के नाम पर 200 करोड़ से ज्यादा के कुल कंसल्टेंट रखे गए वह क्या राय दे रहे? लगातार घाटा बढ़ता जा रहा है जो संकेत दे रहा की कही कुछ बड़ा गड़बड़ है पिछले वर्षो पर नजर डाले तो पॉवरकॉर्पोरशन ने विडिओ कॉन्फ्रेंसिंग का रिकॉर्ड दर्ज करा दिया फिर भी सुधार कम उधर ज्यादा हो रहा इसका मतलब सीधा है की प्रवंधन फैल साबित हो रहा है जिस पर सरकार को गम्भीरता से सोचना होगा।

पावर कार्पोरेशन में सुधार के जो प्लान बन रहे उन पर बड़े सवाल लगातार उठ रहे रोज नया अविष्कार कभी इलेक्ट्रॉनिक मीटर ,कभी स्मार्ट मीटर, कभी स्मार्ट प्रीपेड मीटर,यह कैसी योजना है की 5 साल गारंटी वाले मीटर करोड़ो रुपए लगा कर खरीदे जाते है फिर कुछ माह और साल में फिर चलते मीटर उतारकर फिर नये मीटर लगाए जाते है करोड़ो रुपए की बर्बादी प्रवंधन और कंसल्टेंटों की भूमिका पर बड़ा सवाल उठा रहे है वर्तमान में पुरानी तकनीकी के 2 जी व 3 जी मीटर का क्या हाल होगा भगवान ही मालिक महगी बिजली खरीद का हाल तो सबसे ज्यादा चर्चा में रहता है जिस पर लगातार कारयोजना बनाकर का काम करने की आवश्यकता है लेकिन सब मिलकर महगी बिजली  खरीद पर अंकुश नहीं लग पा रहा।

राज्य विद्युत उपभोक्ता परिषद के अध्यक्ष व राज्य सलाहकार समिति के  सदस्य अवधेश कुमार वर्मा ने कहा कि वर्तमान में जिस प्रकार से पावर कार्पोरेशन बिजली दरों मंे व्यापक बढ़ोत्तरी कराया वह उचित नहीं है।  वर्तमान में बिजली कम्पनियाँ यदि सरकारी विभागों पर अपना कुल बकाया लगभग रू0 11 हजार करोड़ वसूल लें, और एटीएण्डसी हानियाँ कम कर लें, तो बिजली दरों में बढ़ोत्तरी की कोई आवश्यकता नहीं पडती़ जुलाई 2019 में लोकसभा में रखे गये आकड़े स्वता उदय की पोल खोले रहे।

‘उदय’ अनुबन्ध करने वाले 25 राज्यों का जो औसत एटीएण्डसी हानियाँ लगभग 18.24 प्रतिशत हैं वहीं उत्तर प्रदेश की एटीएण्डसी हानियाँ 24.64 प्रतिशत औसत से कहीं ज्यादा हैं। ऐसे में बिजली कम्पनियाँ अपने में सुधार लायें और अपनी अक्षमता का खामियाजा प्रदेश के उपभोक्ताओं पर न डालें।

जहा तक सवाल है ग्रामीण इलाकों में अधिक बिजली देने का तो पॉवरकॉर्पोरशन को यह भी पता ही होगा की ग्रामीण इलाकों में पहले किसानो के ट्वेबल को 18 घंटे बिजली मिलती थे अब दरों में बढ़ोतरी के बाद भी फीडर सेपरेशन के नाम पर किसानो को सिर्फ अनवरत 10 घंटे बिजली मिल रही तो ग्रामीणों को अधिक बिजली देने से घाटा बढ़ रहा यह सोचना बिलकुल गलत है।

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