- लेसा व मध्यांचल प्रबन्धन से की मांग युद्ध स्तर पर सिस्टम को करायें सुदृढ़ तभी ओवर लोडिंग होगी समाप्त
- लेसा में अनेकों 10 एमवीए के ट्रांसफार्मर लगभग अपनी पूरी क्षमता 525 एम्पीयर पर कर रहे काम जिससे बड़े पैमाने पर हो रही रोस्टिंग कब होगा सिस्टम में सुधार
लखनऊ, 10 जुलाई 2018: पिछले कुछ दिनों से जिस प्रकार से लेसा में ओवर लोडिंग के चलते बड़े पैमाने पर रोस्टिंग की जा रही है, उससे लेसा के उपभोक्ताओं में भारी रोष है। ब्रेक डाउन व व्यवधान होने की दशा में उपभोक्ताओं को उचित जवाब न दिये जाने से आक्रोश लगातार बढ़ता है। ऐसे में प्रबन्धन को इस पर विशेष ध्यान देना होगा। वर्तमान में लेसा में अनेकों ट्रांसफार्मर जो 10 एमवीए की क्षमता के हैं और वह अधिकतम 525 एम्पीयर का भार वहन कर सकते हैं। वर्तमान में वह लगभग पूरी क्षमता पर काम कर रहे हैं।
ऐसे में विद्युत व्यवस्था कैसे सुचारू चल पायेगी? जबकि प्राविधानों के मुताबिक ट्रांसफार्मर पर 80 प्रतिशत भार पहुंचते ही उसमें अविलम्ब क्षमता वृद्धि आवश्यक होती है। ऐसे में लेसा प्रबन्धन इस पर कब विचार करेगा? उपभोक्ता परिषद द्वारा वर्ष 2012 से लेकर लगातार इस गम्भीर मामले को उठाया जा रहा है। उसी क्रम में मई 2018 में उपभोक्ता परिषद द्वारा नियामक आयोग में लेसा के सिस्टम मिस्मैच पर एक जनहित प्रत्यावेदन नियामक आयोग में दाखिल किया गया था, जिस पर उप्र विद्युत नियामक आयोग द्वारा लेसा से रिर्पोट तलब की गयी थी, लेकिन अभी तक आयोग को रिर्पोट नहीं सौंपी गयी। जो अपने आप में गम्भीर मामला है।
उप्र राज्य विद्युत उपभोक्ता परिषद के अध्यक्ष व विश्व ऊर्जा कौंसिल के स्थायी सदस्य अवधेश कुमार वर्मा ने कहा कि लेसा की खराब विद्युत व्यवस्था पर मध्यांचल व लेसा प्रबन्धन को अवगत करा दिया गया है और अविलम्ब सुधार की मांग की गयी है। एक बार फिर उपभोक्ता परिषद ने लेसा व मध्यांचल से अनुरोध किया है कि वह उपभोक्ताओं द्वारा लिये गये संयोजित भार के मुताबिक अपने सिस्टम को अपग्रेड करें। वर्तमान में लेसा में लगभग 9 लाख 52 हजार उपभोक्ता हैं, जिनके द्वारा लिया गया कुल संयोजित भार लगभग 26 लाख 70 हजार किलोवाट है।
वहीं लेसा अंतर्गत 33/11 के0वी0 उपकेन्द्रों की कुल क्षमता लगभग 2024 एमवीए है। यदि इसे किलोवाट में निकाला जाये तो यह 18 लाख 21 हजार किलोवाट होगा। यानि कि उपभोक्ताओं द्वारा लिये गये संयोजित भार व सिस्टम के बीच लगभग 8 लाख किलोवाट का गैप है। पीक आवर्स में जब उपभोक्ता अपने भार का पूरा उपभोग करता है उस दौरान सिस्टम कांपने लगता है। पीक आवर्स में डायवर्सी फैक्टर 1 अनुपात 1 होता है। ऊपर से सिस्टर पर 23 प्रतिशत बिजली चोरी का लोड है। ऐसे में लेसा का सिस्टम वर्तमान में उच्च गुणवत्ता की बिजली लेसा के विद्युत उपभोक्ताओं को देने में सक्षम नहीं है। इस पर मध्यांचल कम्पनी को विचार कर युद्ध स्तर पर कार्य करना होगा।







