आयोग के फैसले के बाद ऊर्जा क्षेत्र के निजी घरानों में मचा हड़कम्प

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  • अब प्रदेश में दिसम्बर, 2022 तक बिजली कम्पनियां नया कोल बेस थर्मल पावर हाउस हेतु कोई पीपीए नही कर सकती है। 
  • उपभोक्ता परिषद ने ऊर्जा मंत्री को सौपा ज्ञापन कहा अब सरकार पुराने महंगे पीपीए की कराये समीक्षा जिसकी महंगी बिजली से जनता परेशान 

लखनऊ,10 जुलाई 2019: पावर कार्पोरेशन द्वारा विद्युत नियामक आयोग में दाखिल याचिका लांग टर्म बिजली खरीद 2019-20 से लेकर 2029-30 के मामले में उप्र विद्युत नियामक आयोग के अध्यक्ष श्री आरपी सिंह व सदस्य श्री केके शर्मा द्वारा सुनाए गये ऐतिहासिक फैसले के बाद बिजली क्षेत्र के निजी घरनों में हड़कम्प मच गया है। विद्युत नियामक आयोग द्वारा सुनाए गये फैसले में यह कहा गया है कि चुकि 2027 तक प्रदेश में थर्मल पावर कोल बेस उत्पादन गृहों की प्रस्तावित डिमाण्ड लगभग पूरी बतायी गयी है। इसलिये नियामक आयोग यह एतिहासिक फैसला देता है कि प्रदेश की बिजली कम्पनियां दिसम्बर, 2022 तक कोई नया कोल बेस थर्मल पावर हाउस का कोई भी लांग टर्म पावर पर्चेचेज एग्रीमेंट नहीं कर सकती है।

विद्युत नियामक आयोग जरूरत पड़ने पर पुन:2022 में समीक्षा करेगा बिजली कम्पनियों को यह छुट होगी कि वह अपने बिजली की आवश्यकता पूरी करने के लिये पावर एक्सेचेंज सहित आरपीओ ऑब्लिगेशन व शार्ट टर्म बिजली खरीद पर विचार करेंगे काफी लम्बे समय से उपभोक्ता परिषद इस बात की लड़ाई लड़ता चला आ रहा था कि एमओयू बेस थर्मल पावर हाउस जिसके चलते मंहगी बिजली खरीदना पड़ रहा है उस पर रोक लगे अन्ततः विद्युत नियामक आयोग द्वारा सुनाये गये फैसले के बाद प्रदेश के विद्युत उपभोक्ताओं में खुशी की लहर है। जिस प्रकार से निजी घरानो से साठ-गांठ का मंहगे पावर हाउस लगाये आज उसी का खामियाजा जनता भुगत रही है।

आयोग द्वारा सुनाये गये फैसले के बाद उपभोक्ता परिष्द सक्रिय हो गया उसी क्रम में उप्र राज्य विद्युत उपभोक्ता परिषद के अध्यक्ष व राज्य सलाहकार समिति के सदस्य अवधेश कुमार वर्मा ने प्रदेश के ऊर्जा मंत्री श्री श्रीकान्त शर्मा से मुलाकात कर उन्हें एक ज्ञापन सौंपा और यह मांग उठाई कि प्रदेश में पुरानी सरकारों के कार्यकाल में जो भी मंहगे थर्मल पावर हाउस लगाये गये हैं व पीपीए किये गये हैं उनकी समीक्षा करायी जाय। जिससे महंगी बिजली पैदा करने वाले पावर हाउसों से छुटकारा मिले और प्रदेश की जनता की बिजली दरों में कमी हो। उपभोक्ता परिषद ने आयोग द्वारा जारी किये गये आदेश को माननीय ऊर्जा मंत्री के सज्ञान में लाकर एतिहासिक फैसले पर खुशी जाहिर की। उपभोक्ता परिषद काफी लम्बे समय से निजी घरानों के खिलाफ मोर्चा खोले हुये है।

प्रदेश के ऊर्जा श्रीकान्त शर्मा ने उपभोक्ता परिषद को यह आश्वासन दिया कि पुरानी सरकारों में महंगे पीपीए किये गये उन सब की सरकार समीक्षा पहले से ही करा रही है और जरूरत पड़ी तो और गहन समीक्षा सरकार करायेगी जिससे महंगी बिजली की मार से जनता बचे और प्रदेश में सस्ती बिजली के विकल्प तैयार हों।

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