विपक्ष को आईना दिखाने में माहिर है योगी

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डॉ दिलीप अग्निहोत्री
प्रायः देखा जा रहा है कि केंद्र से लेकर प्रदेश की भाजपा सरकारों के प्रति विपक्ष का रवैया असहिष्णुता पूर्ण रहा है। बात विरोध तक सीमित होती तो आपत्ति की आवश्यकता नहीं थी। क्योंकि सरकार का विरोध विपक्ष का संवैधानिक अधिकार है। लेकिन अमर्यादित भाषा में किया गया विरोध उचित नहीं होता। पहली बार ईमानदारी से जीवन, राजनीति और शासन संचालित करने वाले प्रधानमंत्री को नारे लगवा कर चोर, दलाल जैसे शब्दों से संबोधित किया जा रहा है। यह कार्य राष्ट्रीय विपक्षी पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष के द्वारा हो रहा है।
जबकि वह खुद पांच हजार करोड़ रुपये के घोटाले में पेरोल पर है। सामान्य सवाल है कि चौकीदार चोर है तो खूद उनको और उनके जीजा को क्या संबोद्धन दिया जाए। ये पार्टियां कहीं विजयी होती है, तो अपनी पीठ थपथपाती है। कहा जाता है कि भाजपा का ग्राफ गिर गया है। कहीं भाजपा जीती तो कहा जाता है कि ईवीएम में गड़बड़ी की गई। यह अंधेरगर्दी का विरोध है। कांग्रेस अध्यक्ष से लेकर उनका अदना सा प्रवक्ता भी एक जैसी अभद्र भाषा का प्रयोग करता है। जबकि केंद्र की भाजपा सरकार ने सैकड़ो की संख्या में रिकार्ड कार्य किये है। कांग्रेस की सरकार को इतने कार्यो के लिए कई दशक लग जाते।
वस्तुतः विपक्ष के अभद्र भाषा में हमले इस लिए भी हो रहे है , क्योकि राष्ट्रीय स्तर पर उन्ही की भाषा में भाजपा की ओर से जबाब नहीं मिल रहा है। लेकिन उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री मर्यादित भाषा में विपक्ष को चुभने वाला जबाब देते है। वह विपक्षी नेताओं को आइना दिखा कर उनकी बोलती बन्द कर देते है। योगी ने बिना नाम लिए चुनाव में जनेऊ व गोत्र बताने वालों पर भी तंज किया। बात सही भी थी।
योगी की तैयारी दो मोर्चो पर रहती है। एक यह कि उन्होंने दो वर्ष के विकास व किसान कल्याण कार्यक्रमों में पूर्व सरकारों को पीछे छोड़ दिया है। दूसरा यह कि वह राजनीति के स्तर पर भी जबाब देते है।
रबी की फसल हेतु इस वर्ष 24.73 लाख उर्वरक और 36.47 लाख कुंतल बीज किसानों को दिए गए। पचास किलो ग्राम यूरिया बोरी के दाम घटाए गए। चार करोड़ से ज्यादा मृदा स्वास्थ्य कार्ड वितरित किये जा चुके है। प्रदेश के सभी किसानों को इस योजना का लाभ दिया जाएगा।  इकहत्तर लाख किसानों को किसान क्रेडिट कार्ड वितरित किये गए। किसानों की कर्ज माफी से उनके जनधन खाते भी सक्रिय हो गए, किसान पुनः कर्ज लेने के हकदार हो गए। गत वर्ष इकतीस लाख से अधिक किसानों का फसल बीमा हुआ।
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पच्चीस लाख हेक्टेयर से ज्यादा कृषि भूमि बीमा दायरे में आ गई। बीमा प्रीमियम की कुल धनराशि सात सौ इकहत्तर करोड़ थी, जबकि किसानों से करीब दो सौ पांच करोड़ रुपये ही प्रीमियम लिए गए। गन्ना किसानों को तिरपन हजार करोड़ रुपये का भुगतान किया गया। तिरानबे लाख मीट्रिक टन गेंहू और छियासी लाख टन धान खरीद कर किसानों के खाते में धनराशि जमा कराई गई। पहली बार दलहनी व तिलहनी फसलों की खरीद की गई। गन्ना बुआई का रकबा बाइस से बढ़कर अठ्ठाइस प्रतिशत हो गया। करीब छांछठ हजार करोड़ रुपये के निवेश समझौतों पर कार्य भी प्रारंभ हो गया।
 बजट सत्र के प्रारंभ में जब राज्यपाल का अभिभाषण होता है तो विपक्ष के विधायक केवल हंगामा करते है। एक विपक्षी पार्टी के सदस्यों ने राज्यपाल पर कागज के गोले फेंकने, सिटी बजाने को अपनी स्थायी फितरत बना ली है। इस बार भी यही हुआ। लेकिन इस प्रकरण में एक दिलचस्प नजारा भी देखने को मिला था। अभिभाषण पर हंगामा करने  वाले एक विधायक बेहोश हो गए थे।
राज्यपाल राम नाईक उन्हें देखने अस्पताल गए। चिकित्सकों को उचित इलाज की हिदायत दी। स्वस्थ होने के बाद वह विधायक राज्यपाल से मिलने गए। जाहिर है कि वह अपने व अपने साथियों के कृत्य पर शर्मिंदा होंगे, आत्मग्लानि होगी। राज्यपाल ने बड़प्पन दिखाया। लेकिन उन पर कागज के गोले फेंकने वालों  ने शिष्टाचार नहीं सीखा। अभिभाषण पर हंगामा नया नहीं है। लेकिन पच्चासी वर्षीय राज्यपाल पर कागज के गोले फेंकने पर इन विधायकों के हाँथ नहीं कांपते , यह हैरत की बात है। इस स्तर की राजनीति से तौबा करनी चाहिए। शायद यही कारण है कि योगी आदित्यनाथ ने नेता प्रतिपक्ष को कम बोलने की सलाह दी।
योगी ने कहा कि आप चिकित्सकों की सलाह मान कर कम बोलें। इस तरह योगी ने सटीक जबाब भी दिया ,और विरोधियों के स्वास्थ की चिंता भी की। योगी ने यह भी ठीक कहा कि विपक्षी जिस भाषा का प्रयोग करेंगे, उसी में उनको जबाब मिलेगा। यदि केंद्र में राहुल गांधी के साथ यही किया जाता तो उनकी भाषा मर्यादित हो जाती। बसपा नेता ने अपशब्द का प्रयोग किया था। योगी के जबाब से पहले वह सदन से निकल गए। कुछ समय बाद वापस लौटे।
योगी ने जब पूरे प्रकरण पर तंज कसा तो विपक्ष के नेता मर्यादा की दुहाई देने लगे। कुंभ का भव्य आयोजन भी योगी सरकार की उपलब्धि है। विपक्ष इस पर भी आलोचना कर रहा है। प्रयागराज नाम पर भी आपत्ति दर्ज की गई। जबकि यह गलती में सुधार मात्र था। योगी का आरोप था कि पन्द्रह वर्षों में प्रदेश निचले पायदान पर जा रहा था। दो वर्षों में कई क्षेत्रों में यह नम्बर वन बन गया है। इसमें कोई संदेह नहीं कि योगी विपक्ष को आईना दिखाने में माहिर है। उनके जबाब विपक्ष को विचलित करने वाले होते है।

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