बिजली दर बढ़ोत्तरी प्रस्ताव पर उपभोक्ता परिषद ने शुरू की लामबन्दी

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  • उपभोक्ता परिषद ने उदय स्कीम के तहत जनता को मिलने वाले 11851 करोड़ के लाभ को उपभोक्ताओं को दिलाने की उठायी मांग
  • उपभोक्ता परिषद ने कहा भाजपा घोषणा पत्र का भी हुआ अनादर

लखनऊ,24 जून 2019: जहां प्रदेश की बिजली कम्पनियां ग्रामीण घरेलू बीपीएल किसानों सहित अन्य विद्युत उपभोक्ताओं की बिजली दरों में व्यापक बढ़ोत्तरी प्रस्ताव पर लगातार नियामक आयोग में पैरवी कर रही हैं, वहीं दूसरी उपभोक्ता परिषद बिजली दरों में कमी कराने को लेकर हर पेशबन्दी में जुट गया है। आज राज्य विद्युत उपभोक्ता परिषद व राज्य सलाहकार समिति के सदस्य अवधेश कुमार वर्मा ने प्रदेश के ऊर्जा मंत्री श्री श्रीकान्त शर्मा से सचिवालय स्थित उनके कार्यालय में मुलाकात कर पूरे मामले पर गम्भीरता से चर्चा की और एक ज्ञापन भी सौंपा।

उपभोक्ता परिषद अध्यक्ष ने ऊर्जा मंत्री के सामने यह तथ्य रखा कि जहां बिजली कम्पनियां लगभग 18 हजार करोड़ के गैप को आधार बनाकर बिजली दरों में व्यापक बढ़ोत्तरी कराना चाहती हैं तो उस पर सबसे बड़ा मामला यह है कि इस गैप में उप्र सरकार द्वारा जो सब्सिडी दी जा रही है वह लगभग 9 हजार करोड़ है और वर्तमान में उदय स्कीम के तहत रेगुलेटरी एसेट के मद में वर्ष 2016-17 तक प्रदेश के विद्युत उपभोक्ताओं का बिजली कम्पनियों पर लगभग 11 हजार 851 करोड़ अतिरिक्त निकल रहा है। इसका मतलब प्रदेश के विद्युत उपभोक्ताओं की दरों में इसलिये व्यापक कमी होनी चाहिए क्योंकि सब हिसाब बराबर करने के बाद भी प्रदेश के उपभोक्ताओं का 3 हजार 851 करोड़ बच रहा है। ऐसे में उप्र सरकार प्रदेश के विद्युत उपभोक्ताओं को उनका हक दिलाने के लिए आगे आकर घरेलू ग्रामीण बीपीएल व किसानों की बिजली दरों में कमी कराने की घोषणा करे।

उपभोक्ता परिषद ने ऊर्जा मंत्री से पावर कार्पोरेशन के उस मनमाने निर्णय पर भी आपत्ति जताते हुए शिकायत दर्ज करायी, जिसमें पावर कार्पोरेशन ने बीपीएल शहरी के स्लैब को 50 यूनिट तक सीमित कर उनकी दरों में लगभग 109 प्रतिशत की वृद्धि प्रस्तावित कर दी, जबकि भाजपा द्वारा 2017 में विधान सभा चुनाव में जारी अपने घोषणा में पहली 100 यूनिट तक गरीबों को रू0 3 प्रति यूनिट में बिजली देने की बात की गयी थी। घोषणा पत्र 5 वर्ष के लिये लागू होता है। ऐसे में पावर कार्पोरेशन प्रबन्धन ने सरकार की छवि धूमिल कर गरीबों पर बड़ा बोझ डाला है, जो किसी भी रूप में न्यायोचित नहीं है।

ऊर्जा मंत्री ने उपभोक्ता परिषद अध्यक्ष को यह आश्वासन दिया कि बिजली दर बढ़ोत्तरी प्रस्ताव के मुद्दे पर प्रदेश सरकार गरीब बीपीएल घरेलू आम जनता व किसानों के साथ है। उनके साथ किसी भी स्तर पर भेदभाव नहीं होने पायेगा। नियामक आयोग द्वारा कानूनन जो भी लाभ प्रदेश की जनता को दिया जायेगा, उससे उपभोक्ताओं को कोई वंचित नहीं कर पायेगा। सरकार हमेशा गरीब व आम जनता के साथ खड़ी है।

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