ऊर्जा मंत्री ने घटिया मीटर निर्माता कम्पनियों के खिलाफ दिए जाँच के निर्देश, कम्पनियों में मचा हड़कम्प

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कार्पोरेशन प्रबन्धन ने सभी बिजली कम्पनियों से मीटरों की गुणवत्ता सम्बन्धी सीपीआरआई से जाँच रिपोर्ट की तलब

उपभोक्ता परिषद ने उठाया सवाल: प्रदेश के दूसरे राज्यों में गारंटी पीरिएड में 5 प्रतिशत से अधिक मीटर खराब होने पर होती है ब्लैकलिस्टिंग की कार्यवाही, फिर यूपी में क्यों नहीं?

लखनऊ, 21 फरवरी 2019: विगत् दो दिन पहले उपभोक्ता परिषद द्वारा बिजली कम्पनियों में जल्दबाजी में खरीदे गये स्मार्ट मीटर, प्रीपेड मीटर व इलेक्ट्रानिक मीटरों के औचित्य और उनकी गुणवत्ता पर जहाँ सवाल उठाते हुए माननीय ऊर्जा मंत्री को ज्ञापन सौंपा था, और मुलाकात कर साक्ष्य सौंपे थे, जिस पर मंत्री उनके द्वारा उच्चस्तरीय जाँच कराकर घटिया मीटर निर्माता कम्पनियों के खिलाफ कठोर कार्यवाही का आश्वासन दिया गया था, वही अब बिजली कम्पनियों में हड़कम्प मच गया।

बिजली कम्पनियों ने अपने ही द्वारा जारी 2017 के आदेश के क्रम में अब पुनः सभी प्रबन्ध निदेशकों से कार्पोरेशन प्रबन्धन ने एक पत्र लिखकर गुणवत्ता की परख के लिए बिजली कम्पनियों द्वारा प्रत्येक लाॅट से रेण्डम सेम्पल की रिपोर्ट मांगी गयी है।

गौरतलब है कि वर्ष 2017 में उपभोक्ता परिषद ने माननीय ऊर्जा मंत्री से गुणवत्ता की शिकायत की थी, उस वक्त सभी मीटर कम्पनियों की रैण्डम प्रत्येक लाॅट से सैम्पल मीटर उठाकर सीपीआरआई अथवा डिस्काॅम टेस्ट लैब से जाँच कराने के आदेश प्रबन्ध निदेशक द्वारा दिये गये थे लेकिन फिर मामला जहाँ का तहाँ दबा रहा, अब ऊर्जा मंत्री के हस्तक्षेप के बाद उसी आधार पर पुनः 7 दिन में पूरी जाँच रिपोर्ट कार्पोरेशन प्रबन्धन ने मांगी है। केस्को कम्पनी में एक मीटर निर्माता कम्पनी के मीटर गारंटी पीरिएड में लगभग 24 प्रतिशत तक खराब हुए। पारदर्शी तरीके से जाँच करायी जाये तो दूसरी बिजली कम्पनियों में भी यही हाल होगा।

उप्र राज्य विद्युत उपभोक्ता परिषद के अध्यक्ष व विश्व ऊर्जा कौंसिल के स्थायी सदस्य अवधेश कुमार वर्मा ने कहा कि प्रदेश की बिजली कम्पनियाँ गुणवत्ता के मामले में दूसरे राज्यों से क्यों नहीं सीख लेती। बगल के राज्य उत्तराखण्ड में टेण्डर निकलते वक्त ही यह प्राविधानित कर दिया जाता है कि गारंटी पीरियड में मीटर एक साल में 2 प्रतिशत, दूसरे साल 3 प्रतिशत, तीसरे साल में 4 प्रतिशत और 4 साल में अधिकतम 5 प्रतिशत से ज्यादा मीटर फेल हुए तो वह ब्लैकलिस्ट किये जायेंगे। इसी प्रकार की व्यवस्था हरियाणा बिजली वितरण निगम में भी है, जहाँ अधिकतम 6 प्रतिशत के बाद ब्लैकलिस्टिंग की श्रेणी में आ जाता है, फिर उत्तर प्रदेश में बड़े पैमाने पर मीटर निर्माता कम्पनियों के मीटर फेल हो रहे हैं, उन्हें क्यों नहीं ब्लैकलिस्टिंग किया जाता।

उपभोक्ता परिषद अध्यक्ष ने कहा कि अभी तो सौभाग्य योजना के अन्तर्गत पूर्व में क्रय आदेशित लगभग 1 करोड़ एसटीएस प्री-पेड मीटरों का क्या होगा। अभी उनकी सप्लाई बाकी है और इसी बीच प्रबन्ध निदेशक (पश्चिमांचल) ने पावर कार्पोरेशन प्रबन्धन को एक पत्र भेजकर यह अनुरोध किया है कि चूँकि पश्चिमांचल विद्युत वितरण कम्पनी सौभाग्यशाली घोषित हो गयी है। ऐसे में अब उन्होंने अनुरोध किया है कि उन्हें केवल 1 लाख मीटर चाहिए। ऐसे में करोड़ों प्री-पेड मीटरों का भविष्य क्या है, जब उपभोक्ता परिषद जल्दबाजी में मीटरों के खरीद पर सवाल उठा रहा था तो कोई सुनने वाला नहीं था।

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