प्रस्तावित बिजली दरो में बढ़ोतरी पर आम जनसुनवाई तय, लखनऊ में 18 को होगी जनसुनवाई

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  • 17 को कानपुर, 18 को लखनऊ, 25 को आगरा, 26 को नोएडा और 31 जुलाई को बनारस में होगी जनसुनवाई
  • उपभोक्ता परिषद ने कहा सुनवाई में बिजली कम्पनियों की पोल खोलकर उनका असली चेहरा किया जायेगा बेनाकब

लखनऊ, 06 जुलाई 2019: जहां प्रदेश की बिजली कम्पनियां ग्रामीण घरेलू बीपीएल किसानों सहित अन्य विद्युत उपभोक्ताओं की बिजली दरों में व्यापक बढ़ोत्तरी पर लगातार नियामक आयोग में पैरवी कर रही हैं, वहीं दूसरी उपभोक्ता परिषद बिजली दरों में कमी कराने को लेकर हर पेशबन्दी में जुट गया है।

विद्युत नियामक आयोग ने बिजली दरो में बढ़ोतरी प्रस्ताव पर कार्यवाही को आगे बढ़ाते हुए आम जनता से बिजली दर बढ़ोतरी पर आम राय लेने के लिय आम जनसुनवाई की तिथि की घोषणा कर दी गयी है जिसमे 17 जुलाई को कानपुर, 18 जुलाई को लखनऊ, 25 जुलाई को आगरा, 26 जुलाई को नोएडा और 31 जुलाई को बनारस में जनसुनवाई के माध्यम से नियामक आयोग आम जनता और उपभोक्तओ से बिजली दरो में बढ़ोतरी पर आम राय लेगा।

वही दूसरी ओर उपभोक्ता परिषद् ने भी कमर कस लिया है और प्रदेश के उपभोक्तओ सामाजिक संघठनो व मोहला समितियों से अपील की है की वह इस आम जनसुनवाई मे बढ़चढ़ कर सुनवाई में शामिल होकर बिजली दरो में बढ़ोतरी का व्यापक विरोध करे। ऐसे में उप्र सरकार प्रदेश के विद्युत उपभोक्ताओं को उनका हक दिलाने के लिए आगे आकर घरेलू ग्रामीण बीपीएल व किसानों की बिजली दरों में कमी कराने की घोषणा करे। नियामक आयोग 18 जुलाई को लखनऊ में जनसुनवाई सभागार में प्रातः 11ः30 से बिजली दरो में बढ़ोतरी पर आम राय लेगा।

उप्र राज्य विद्युत उपभोक्ता परिषद के अध्यक्ष व राज्य सलाहकार समिति के सदस्य अवधेश कुमार वर्मा ने कहा  जिस प्रकार से इस बार बिजली दर बढोत्तरी प्रस्ताव में पावर कार्पोरेशन ने बीपीएल शहरी के स्लैब को 50 यूनिट तक सीमित कर उनकी दरों में लगभग 109 प्रतिशत की वृद्धि प्रस्तावित कर दी, जबकि भाजपा द्वारा 2017 में विधान सभा चुनाव में जारी अपने घोषणा में पहली 100 यूनिट तक गरीबों को रू0 3 प्रति यूनिट में बिजली देने की बात की गयी थी।  जो अपने आपमें चौकाने वाला है उत्तर प्रदेश के ऊर्जा क्षेत्र की कैसी विडम्बना है कि बीपीएल घरेलू उपभोक्ताओं के लिये वर्ष 2003-04 में 50 यूनिट का स्लैब था वह वर्ष 2004-05 में 70 यूनिट हुआ और वह आगे वर्ष 2006-07 में 100 यूनिट हुआ और वह वर्तमान में 150 यूनिट है।

लगातार उपभोक्ताओं का उपभोग उनकी आवश्यकतानुसार बढता रहता है एैसे में पूर्व लागू व्यवस्था की तरह पावर कारपोरेशन को इस स्लैब को बढाकर 200 यूनिट करना चाहिये था। परन्तु यहाॅं पावर कारपोरेशन 10 वर्ष पीछे की व्यवस्था महज इस लिये लागू कराने के लिये अमादा है क्योंकि उससे पावर कारपोरेशन को बडा फायदा होगा। अर्थात जब उपभोक्ताओं को लाभ मिलने का समय आता है तो बिजली कम्पनियाॅं 10 साल पीछे की बात करती हैं और जब सार्वजनिक तौर पर बयानबाजी की बात आती है तो बिजली कम्पनियाॅं अपने आप को सबसे आगे मानती है। जो ऊर्जा क्षेत्र का असली चेहरा है और उसके पीछे राज्य सरकार की चुप्पी।

उपभोक्ता परिषद के अध्यक्ष ने कहा आगे की सुनवाई में बिजली कम्पनियों की पोल खोलकर उनका असली चेहरा बेनाकब किया जायेगा।

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