टैरिफ बढ़ोत्तरी के खिलाफ नियामक आयोग में याचिका दाखिल, बढ़ोत्तरी ख़ारिज करने की मांग

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  • सबका साथ सबका विकास का नारा पूरी तरह फेल घरेलू व किसान के साथ हो रहा खेल
  • घरेलू ग्रामीण बीपीएल व किसानों की बिजली दरों में पावर कारपोरेशन द्वारा दाखिल बढोत्तरी प्रस्ताव पर उपभोक्ता परिषद ने दाखिल किया एक लोकमहत्व जनहित प्रत्यावेदन और बढोत्तरी प्रस्ताव को अवलिम्ब खारिज करने की उठायी मांग

लखनऊ,17 जून 2019: पावर कारपोरेशन व प्रदेश की बिजली कम्पनियों द्वारा गुपचुप तरीके से आयोग में गरीब शहरी बीपीएल किसानों की बिजली दरों में दाखिल बढोत्तरी प्रस्ताव के विरोध में आज उप्र राज्य विद्युत उपभोक्ता परिषद के अध्यक्ष व राज्य सलाहकार समिति के सदस्य अवधेश कुमार वर्मा ने उप्र विद्युत नियामक आयोग के चेयरमैन श्री आरपी सिंह व सदस्यगण श्री एसके अग्रवाल व श्री केके शर्मा से मुलाकात कर एक लोकमहत्व जनहित प्रत्यावेदन सौंपते हुये बिजली कम्पनियों द्वारा दाखिल बढोत्तरी प्रस्ताव को खारिज करने की मांग उठायी।

उपभोक्ता परिषद द्वारा यह मुददा उठाया गया कि प्रदेश की बिजली कम्पनियों द्वारा वर्तमान में अभी जो राजस्व प्राप्त किया जा रहा है वह रूपया 58403 करोड है और टैरिफ बढोत्तरी के बाद जो राजस्व प्राप्त दिखाया जा रहा है वह 65923 करोड है यानि कि टैरिफ हाइक से कुल 7520 करोड रूपया अतिरिक्त राजस्व प्राप्त होगा जिसमें से केवल घरेलू विद्युत उपभोक्ता से अतिरिक्त राजस्व 4117 करोड व किसानों से अतिरिक्त राजस्व 787 करोड मांगा गया है यानि कि कुल बढोत्तरी का केवल 61 प्रतिशत भार बिजली कम्पनियाॅं घरेलू व किसानों पर डाल रही हैं। यह कैसा सबका साथ सबका विकास का नारा है।

उपभोक्ता परिषद ने आगे बीपीएल उपभोक्ताओं के स्लैब को कम करने की वजह से उनकी 100 यूनिट पर उनकी दरों में 53 प्रतिशत बढोत्तरी को टैरिफ शाक बताते हुये गरीब जनता को लालटेन युग में ले जाने की साजिश बताया और साथ ही यह भी आरोप लगाया कि जब वर्ष 2017-18 में आयोग द्वारा ग्रामीण अनमीटर्ड विद्युत उपभोक्ताओं के टैरिफ में यह अनुमोदित किया गया था चूॅंकि अक्टूबर 2017 से ग्रामीण को 24 घण्टे बिजली मिलेगी इसलिये 1 अप्रैल 2018 से ग्रामीण की दरें 400 रूपया प्रति किलोवाट प्रति माह हेागी और आज वर्ष 2019 में अब तक ग्रामीण को 24 घण्टे बिजली नही दी गयी। फिर ऐसे में उनकी दरों में 25 प्रतिशत की वृद्धि किस आधार पर प्रस्तावित की गयी?

उपभोक्ता परिषद अध्यक्ष ने शहरी घरेलू व किसानों की दरों में बढोत्तरी को अन्यायपूर्ण बताते हुये यह अरोप लगाया कि वर्तमान में ग्रामीण घरेलू विद्युत उपभेाक्ता की अधिकतम दरें रूपया 6 प्रति यूनिट व शहरी घरेलू की दरें अधिकतम रूपया 7.50 प्रति यूनिट यह साबित करता है कि पावर कारपोरेशन अपनी अक्षमता व भ्रष्टाचार की भरपायी घरेलू उपभोक्ताओं से करना चाहता है जो अपने आप में जाॅंच का विषय है। एक तरफ बिजली कम्पनियाॅं बिजली चोरी पर अंकुश लगाने की बात करती है राजस्व वढोत्री की बात करती हैं उत्पादन लागत में 54 पैसे प्रति यूनिट की कमी की बात करती हैं, सुधार के नाम पर ईनाम बाॅंटनी की बात करती हैं फिर दूसरी तरफ इतनी व्यापक बढोत्तरी यह सिद्ध करती है कि पावर कारपोरेशन कागजों में अपने को सफल साबित कर रहा है इसलिये प्रबन्धन के खिलाफ अविलमब कठोर कदम उठाया जाना चहियें।

नियामक आयोग चेयरमैन श्री आर पी सिंह व सदस्यगणों ने उपभोक्ता परिषद अध्यक्ष को यह आश्वासन दिया कि उपभोक्ता हित में आयोग उचित कदम उठायेगा किसी के साथ कोई अन्याय नही होने पायेगा।
उपभोक्ता परिषद अध्यक्ष ने कहा आज ऊर्जा मंत्री के साथ भी बैठक प्रस्तावित थी लेकिन ऊर्जा मंत्री जो शहर से बाहर हैं आज उनको आना था, नही आ पाये कल आने के बाद उपभोक्ता परिषद उनसे मुलाकता कर अपनी बात रखेगा।

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