ग्रीन एनर्जी आरपीओ आब्लीगेशन पर आयोग में सार्वजनिक सुनवाई सम्पन्न

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  • प्रदेश के उपभोक्ताओं की तरफ से उपभोक्ता परिषद ने रखी अपनी बात, कहा ग्रीन एनर्जी हो या लाल एनर्जी उपभोक्ताओं को चाहिये सस्ती बिजली
  • नेडा और पावर कारपोरशन दोनों के मुखिया प्रमुख सचिव ऊर्जा और दोनों का जवाब अलग अलग मामला जाॅंच का गंभीर विषय, सुनवाई में नेडा अधिकारी पहुचे ही नही: उपभोक्ता परिषद

लखनऊ,10 जुलाई 2019: उप्र विद्युत नियामक आयोग द्वारा ग्रीन एनर्जी रिन्यूबिल पावर आब्लीगेशन (आरपीओ) कानून में भारत सरकार की गाइडलाइन के तहत प्रथम संशोधन, 2019 के मुददे पर आज नियामक आयोग में आम जनता की सार्वजनिक सुनवाई आयोग अध्यक्ष श्री आर पी सिंह, की अध्यक्षता एवं सदस्य श्री के के शर्मा की उपस्थित में सम्पन्न हुयी। जिसमें पावर कारपोरेशन के निदेशक कारपोरेट प्लानिंग श्री बी पी श्रीवास्तव उपभोक्ता परिषद अध्यक्ष अवधेश कुमार वर्मा सहित सोलर पावर व कोजन की तरफ से अनेकों वरिष्ठ अधिवक्ताओं ने अपनी अपनी बात रखी।

पावर कारपोरेशन की ओर से निदेशक कारपोरेट द्वारा अपनी बात रखते हुये भारत सरकार द्वारा जारी गाइडलाइन को पूर्णता न मानने की सिफारिश की गयी और वर्ष 2019-20 से लेकर वर्ष 2023-24 तक अनिवार्य रूप से सोलर, हाइड्रो व विण्ड सहित नान सोलर सोलर की 8 प्रतिशत से लेकर आखिरी वर्ष में 11 प्रतिशत तक आर पी ओ आब्लीगेशन पर अपना मत दिया गया वहीं नेडा की तरफ से जो लिखित जवाब आयोग में दाखिल हुआ उसमें भारत सरकार द्वारा जारी गाइडलाइन को पूर्णता लागू करने की बात कही गयी जिसमें वर्ष 2019-20 से वर्ष 2021-22 तक क्रमशः नान सोलर व सोलर पावर का आब्लीगेशन क्रमशः पहले वर्ष 17.50 प्रतिशत दूसरे वर्ष 19 प्रतिशत व वर्ष 2021-22 में 21 प्रतिशत आरपीओ ट्रेजेक्टरी पर सहमति दी गयी। हाई कोर्ट के वरिष्ठ अधिवक्ता श्री डी डी चोपडा ने यूपी कोजेन की तरफ से बहस करते हुये कहा कि भारत सरकार की गाइडलाइन को माना जाये।

उ0 प्र0 राज्य विद्युंत उपभोक्ता परिषद के अध्यक्ष व राज्य सलाहकार समिति के सदस्य अवधेश कुमार वर्मा ने प्रदेश के उपभोक्ताओं की तरफ से अपनी बात रखते हुये कहा कि आरपीओ आब्लीगेशन पर विद्युत नियामक आयोग द्वारा वर्ष 2019-20 से लेकर वर्ष 2023-24 तक नान सोलर हाइड्रो व सोलर पर जो आरपीओ आब्लीगेशन का टारगेट 8 प्रतिशत से लेकर 15 प्रतिशत तक प्रस्तावित किया गया है वह उचित है।

बैठक में उस समय सनसनी फैल गयी जब उपभोक्ता परिषद अध्यक्ष ने यह मुददा उठा दिया कि नेडा और पावर कारपोरेशन दोनो के मुखिया प्रमुख सचिव ऊर्जा हैं लेकिन दोनोें का जवाब अलग अलग जो बहुत गंभीर मामला है। नेडा की तरफ से भारत सरकार के आदेश को पूर्णता लागू करने की बात कही जा रही है वहीं पावर कारपोरेशन उसमें बदलाव कर आॅंशिक रूप से लागू करने की बात कर रहा है। ऐसे में एक ही मुखिया द्वारा दो मत अपने आप में जाॅंच का मामला है।

चौकाने वाला मामला तो यह है कि जवाब भेज कर नेडा जिसका मुख्य काम रिनेबुल एनर्जी का है और आयोग उसपर आज नया कानून पर चर्चा कर रहा है उनका कोई भी अधिकारी उपस्थित ही नही है ऐसे में आयोग को प्रमुख सचिव ऊर्जा को विद्युत अधिनियम के तहत  नोटिस देकर बुलाना चाहिये और उनसे यह पूछा जाना चाहिये कि उनका फाइनल मत क्या है उसे शपथपत्र पर दाखिल होना चाहिये। इस प्रकार की कार्यवाही से विभाग में कनफिल्ट आफ इन्टेªस्ट साबित हो रहा है।

उपभोक्ता परिषद ने तंज कसते हुये कहा ग्रीन एनर्जी का मामला हो या लाल एनर्जी हर हाल में उपभोक्ताओं को सस्ती बिजली मिलनी चाहिये। एक तरफ देश के ऊर्जा मंत्री आर के सिंह का बयान आया है कि दिन में सस्ती बिजली होगी और रात में मंहगी यहाॅं उप्र में उपभोक्ता रात दिन दोनों मंहगी बिजली अदा कर रहा है उसके साथ कम न्याय होगा। उपभोक्ता परिषद का मत है आरपीओ आब्लीगेशन को भी मेरिट आर्डर का पार्ट बनाया जाये मंहगी बिजली वाले स्वतः घर बैठेंगे और उपभोक्ताओं को उसका फायदा होगा।

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