यूपी में बिजली दर बढोत्तरी पर फंसा पेंच!

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आयोग के पाले में गेंद: उपभोक्ता परिषद ने आयोग के दूसरे विकल्प पर इस शर्त के साथ दी सहमति कि आयोग अपनी देखरेख में समय से बिल जमा करने पर 5 प्रतिशत की छूट देने वाले विकल्प पर कर सकता है विचार लेकिन बिजली कम्पनियों की देख रेख में भरोसा नही

लखनऊ,27 जून 2019: उदय स्कीम के तहत रेग्यूलेटरी असेट के मद में बिजली कम्पनियों पर उपभोक्ताओं का निकला अतिरिक्त रूपया 11851 करोड का लाभ प्रदेश के विद्युत उपभोक्ताओं को दिलाने के लिये नियामक आयोग द्वारा उपभोक्ताओं से 15 दिन में अपने सुझाये गये दोनों विकल्पों पर राज्य विद्युत उपभोक्ता परिषद के अध्यक्ष व राज्य सलाहकार समिति के सदस्य अवधेश कुमार वर्मा ने अपनी आपत्तियाॅं/सुझाव साक्ष्यों के साथ नियामक आयोग के सचिव  संजय कुमार सिंह से मिल कर उन्हें सौप दी।
उपभोक्ता परिषद ने आयोग द्वारा मांगे गये दोनांे विकल्पों पर अपनी स्पष्ट राय देते हुये पहले विकल्प पर यह मत दिया कि उपभोक्ता परिषद इस पूरे मामले पर 2016 से लडाई लड रहा था। इसलिये अब जब उपभोक्ताओं का रूपया 11851 करोड बिजली कम्पनियों पर वर्ष 2016-17 तक निकल रहा है और वहीं वर्ष 2019-20 में बिजली दर बढोत्तरी बिजली कम्पनियों द्वारा इस आधार पर प्रस्तावित है कि सब्सिडी के बाद 9000 करोड का गैप है। ऐसे में विद्युत नियामक आयोग बिजली दर बढोत्तरी प्रस्ताव को अविलम्ब खारिज कर बिजली दरों में कमी करे क्योंकि गैप की भरपायी के बाद भी विद्युत उपभोक्ताओं का रूपया 3851 करोड अतिरिक्त निकल रहा है। उपभोक्ता परिषद ने पूरी अतिरिक्त राशि पर ब्याज मांगते हुये बिजली दरो में कमी करने का सुझाव आयोग को सौंपा और उपभोक्ता हित में इसे पहला विकल्प माना।
उप्र राज्य विद्युत उपभोक्ता परिषद के अध्यक्ष अवधेश कुमार वर्मा ने बिजली कम्पनियों में वसूले जा रहे रेग्यूलेटरी सरचार्ज 4.28 प्रतिशत पर अविलम्ब रोक लगाने की मांग भी इस विधिक प्राविधानानुसार उठायी है क्योंकि नियामक आयोग के विशेषज्ञों द्वारा वर्ष 2016-17 जहाॅं तक आडिटेड आंकडे हैं रूपया 11851 करोड उपभोक्ताओं का निकाला है। अब सबसे बडा सवाल यह है कि वर्ष 2017-18, 2018-19 से लेकर अब तक जो 4.28 प्रतिशत रेग्यूलेटरी सरचार्ज की वसूली हुयी है उसे भी ब्याज सहित वापस कराया जाये और टैरिफ बढोत्तरी को पूरी तरह खारिज करने का पेंच इस आघार पर फॅंसा दिया है क्योंकि आयोग द्वारा जारी प्रपत्र वर्ष 2019-20 टैरिफ प्रस्ताव के क्रम में इस प्रस्ताव पर निर्णय लिया जाना है। इसलिये उपभोक्ता परिषद का प्रदेश के उपभोक्ताओं के हित में यह मत है कि अब चूॅकि उपभोक्ताआंे का ही हजारों करोड बिजली कम्पनियों पर निकल आया है। इसलिये जब तक उसकी भरपाई न हो जाये बढोत्तरी प्रस्ताव की बात पूरी तरह बेमानी है। बिजली कम्पनियों को नैतिकता के आधा पर स्वत- अपना बढोत्तरी प्रस्ताव वापस लेकर दरों में कमी करने के लिये आगे आना चाहिये।
उपभोक्ता परिषद अध्यक्ष ने कहा कि इस अतिरिक्त रकम की भरपायी के लिये आयोग द्वारा उपभोक्ताआंे के लिये सुझाव गये दूसरे विकल्प जिसमें आयोग ने कहा था कि इसकी भरपायी इस आधार पर भी की जा सकती है कि समय से बिल जमा करने पर उद्योगों को 2.5 प्रतिशत व घरेलू सहित अन्य को 5 प्रतिशत बिल में छूट दी जाये पर उपभोक्ता परिषद इसी शर्त के साथ सहमत हो सकता है कि नियामक आयोग अपनी देख-रेख में इस व्यवस्था को लागू कराये क्यांक बिजलीी कम्पनियाॅं बिलिंग साफ्टवेयर के माध्यम से आज तक हर वह लाभ जो उपभोक्ताओं को मिलता है उसे देने में आनाकानी करती हैं। अभी उदाहरण के तौर पर आन लाइन समय से बिल जमा करने पर कोई छूट नही दी जाती है जबकि आयोग का आदेश है छूट देने का। सिक्योरिटी राशि पर अभी तक ब्याज नही दिया गया। ऐसे में बिजली कम्पनियों पर भरोसा करना मुश्किल है कि वह सय से बिल जमा करने पर छूट पारदर्शी तरीके से देंगी। इसलिये इस विकल्प पर पूरी तरह संशय है।
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