- उपभोक्ता सड़क पर उतरे, कहा अब उत्पीड़न बर्दाश्त नहीं
- उपभोक्ता परिषद अध्यक्ष संवाददाताओं को दिखाया परिसर, जिससे खुली लेसा की पोल
लखनऊ, 17 फरवरी 2019: उप्र विद्युत नियामक आयोग द्वारा बनाये गये कानून से 5 दिन पहले लेसा में राजाजी पुरम के एक उपभोक्ता श्री बृजेश मिश्रा जो अपने परिसर के आंशिक भाग में निर्माण कार्य करा रहे थे, के उत्पीड़न का मामला 2 दिन पहले उपभोक्ता परिषद अध्यक्ष ने प्रदेश के ऊर्जा मंत्री श्री श्रीकान्त शर्मा के सामने उठाया। जिस पर ऊर्जा मंत्री ने 24 घण्टे में रिर्पोट तलब कर ली थी, जिसके बाद मध्यांचल विद्युत वितरण कम्पनी ने मुख्य अभियन्ता वाणिज्य के नेतृत्व में एक टीम बनाकर पुनः पूरे मामले पर जांच कर रिपोर्ट देने को कहा। मध्यांचल की टीम ने कल उपभोक्ता के परिसर पर जाकर जांच किया और पूरी रिपोर्ट को लीपापोती करते हुए यह प्रदर्शित किया कि उपभोक्ता के सम्पूर्ण परिसर पर 90 प्रतिशत निर्माण नींव से हो रहा है, उपभोक्ता की पुरानी वायरिंग नहीं है और साथ यह भी लिखा कि 2 किलोवाट का उपभोक्ता का भार मात्र 0.78 वाट पाया गया, यानि की 1 किलोवाट से भी कम।
लीपापोती की खबर लगते ही राजाजीपुरम उपभोक्ता के कालोनीवासी पूरी तरह आक्रोशित हो गये और प्रदर्शन शुरू कर दिया और उपभोक्ता परिषद अध्यक्ष को भी सूचित किया जिस पर उपभोक्ता परिषद अध्यक्ष अवधेश कुमार वर्मा भी मौके पर पहुंचे और सभी आन्दोलित उपभोक्ताओं को यह आश्वस्त किया कि मध्यांचल की टीम ने जो लीपापोती की है उससे कुछ नहीं होने वाला, उल्टा मध्यांचल की टीम ही पूरे मामले में दोषी साबित हो रही है जो गम्भीर मामला है। उपभोक्ता परिषद द्वारा जल्द ही टीम और गलत रिपोर्ट देने वाले अभियन्ताओं के खिलाफ कार्यवाही के लिए माननीय ऊर्जा मंत्री से बात करेगा और साथ ही प्रबन्ध निदेशक को भी अवगत कराया जायेगा, जिस पर उपभोक्ता शान्त हुए।
उपभोक्ता परिषद ने कहा कि मध्यांचल की टीम ने जो लीपापोती की है और गलत कार्यवाही को बढ़ाया है उनके खिलाफ विद्युत नियामक आयोग में टैरिफ उल्लंघन के लिए विद्युत अधिनियम-2003 की धारा-142 के तहत अवमानना वाद दायर किया जायेगा। उत्पीड़न की भनक लगते ही राजधानी लखनऊ की अनेकों आवासीय समितियों के उपभोक्ताओं में भारी रोष हैं जिससे कभी भी बड़ा आन्दोलन सामने आ सकता है।
राज्य विद्युत उपभोक्ता परिषद के अध्यक्ष के साथ मौके पर मौजूद विभिन्न समाचार पत्रों के संवाददाताओं को उपभोक्ता ने अपने पूरे परिसर को दिखाया जिसमें पूरी तरह स्पष्ट दिख रहा था कि उपभोक्ता के परिसर पर 40 प्रतिशत पुराना निर्माण आज भी खड़ा है और साथ ही उपभोक्ता की पुरानी वायरिंग भी ऊपर और नीचे के एक कमरे में मौजूद है जिससे पंखा, ट्यूबलाईट सहित सभी उपकरण चल रहे हैं लगभग 500 वर्गफिट के एक छोटे मकान में कितना निर्माण हो जायेगा। ऐसे में मध्यांचल मुख्य अभियन्ता की टीम द्वारा किस आधार पर गलत चेकिंग रिपोर्ट भरी गयी और उसमें यह दिखाया गया कि पुरानी वायरिंग समाप्त है और 90 प्रतिशत भूभाग में निर्माण हो रहा है। सबसे बड़ा सवाल यह उठता है कि टैरिफ की धारा-14 में निर्माण कार्य के लिए कहीं भी प्रतिशत की बात नहीं कही गयी फिर मामले को क्यों घुमाया गया। कानून में भार की बात की गयी है जिस पर उपभोक्ता पूरी तरह सही है। 2 किलोवाट का उपभोक्ता अपने स्वीकृत भार के अन्दर निर्माण कार्य करा रहा है। निर्माण कार्य नींव से नहीं होगी तो क्या हवा में होगी, इस तरह की फिजूल की नियम विरूद्ध बात चेकिंग रिपोर्ट में लिखना पूरी तरह मध्यांचल की टीम पर सवाल खड़ा कर रहा है जो यह सिद्ध करता है कि लेसा सरकार की छवि धूमिल करने पर आमादा है।
पूरे मामले की जानकारी तुरन्त उपभोक्ता परिषद अध्यक्ष ने प्रबन्ध निदेशक, मध्यांचल को अवगत करा दिया जिस पर उनके द्वारा यह कहा गया कि मामला गम्भीर है। हम अपने स्तर से कार्यवाही करायेंगे।







