बढ़ सकते है बिजली के दाम लेकिन उपभोक्ता परिषद ने कहा: आम जनता पर नहीं आने देंगे कोई भार

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ट्रांसमिशन कम्पनी ने इस बार लगभग 24 पैसा प्रतियूनिट का मांगा ट्रांसमिशन टैरिफ

लखनऊ,13 जून 2019: उप्र पावर ट्रांसमिशन निगम लि. द्वारा विद्युत नियामक आयोग में दाखिल वार्षिक राजस्व आवश्यकता (ए0आर0आर0) वर्ष 2019-20 व ट्रूप-अप 2016-17 एवं वार्षिक परफार्मेन्स रिब्यू वर्ष 2017-18, 2018-19 पर आयोग द्वारा स्वीकृति देने के बाद अब ट्रांसमिशन टैरिफ की सार्वजनिक सुनवाई 25 जून, 2019 को पूर्वान्ह 11ः30 बजे नियामक आयोग सभागार में आयोजित की गयी है।

उपभोक्ता परिषद जल्द ही पूरे मामले पर प्रदेश के विद्युत उपभोक्ताओं की तरफ से विधिक साक्ष्य पूर्ण आपत्तियां आयोग में दाखिल करेगा। पहली बार नियामक आयोग ने ट्रांसमिशन टैरिफ की अलग सुनवाई करके एक मिशाल कायम किया है।

वहीं दूसरी तरफ बिजली दर के सम्बन्ध में बिजली कम्पनियों द्वारा दाखिल ए0आर0आर पर नियामक आयोग की सख्त के चलते अभी तक बिजली कम्पनियां सही आंकड़े आयोग में पेश नहीं कर पायी है इसी के चलते बिजली दर की ए0आर0आर0 की कमियों पर 11 जून, 2019 को आयोग की बिजली कम्पनियों के साथ बैठक में नियामक आयोग, अध्यक्ष श्री आर0पी0 सिंह ने दो टूक शब्दों में कह दिया है अब मनगढ़ंत आकड़ों पर शपथ पत्र दाखिल हुआ तो कार्यवाही तय है। इसलिये कम्पनियां सत्य आकड़े ही आयोग के समाने पेश करें। उसके बाद ही बिजली दर पर ए0आर0आर0 स्वीकार होगा।

उप्र राज्य विद्युत उपभोक्ता परिषद के अध्यक्ष अवधेश कुमार वर्मा ने कहा इस बाद ट्रांसमिशन कम्पनी द्वारा वर्ष 2019-20 के लिये कुल राजस्व आवश्यकता 2890 करोड़ प्रस्तावित किया गया है जिसके आधार पर ट्रांसमिशन कम्पनी द्वारा 0.24 पैसा प्रति यूनिट ट्रांसमिशन टैरिफ मांगा गया जो वर्ष 2018-19 में आयोग द्वारा 0.19 पैसा प्रति यूनिट अनुमोदित किया गया था। यानि की ट्रांसमिशन कम्पनी द्वारा इस बार लगभग 0.5 पैसा प्रति यूनिट बढ़ोत्तरी मांगी गयी है वहीं ट्रांसमिशन हानियां पहले की तरह ही 3.56 प्रतिशत ही प्रस्तावित है और ट्रांसमिशन कम्पनी द्वारा रिटर्न आफ इक्यूटी 2 प्रतिशत प्रस्तावित है।

उपभोक्ता परिषद अध्यक्ष अवधेश कुमार वर्मा ने कहा इस बार लड़ाई आर-पार की होगी किसी भी स्तर पर आम जनता पर कोई भी भार नहीं आने दिया जायेगा। आयोग द्वारा बुलाई गयी सार्वजनिक सुनवाई में इस बार उपभोक्ता परिषद पूरी पेश बन्दी के साथ उपभोक्ताओं का पक्ष रखेगा और साथ ही इस बार मजबूती से बिजली कम्पनियों की 16 प्रतिशत रिटर्न ऑफ रिक्यूटी का विरोध किया जायेगा जब ट्रांसमिशन कम्पनी केवल 2 प्रतिशत आरोई प्रस्तावित कर ही तो पावर कार्पोरेशन और बिजली कम्पनियां 16 प्रतिशत रिटर्न ऑफ रिक्यूटी लेने की बात क्यों करती है।

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