मान्यवर कांशीराम की जयन्ती पर आरक्षण समर्थकों ने किया उन्हें याद, किये श्रद्धासुमन अर्पित
लखनऊ, 14 मार्च 2019: आरक्षण बचाओ संघर्ष समिति के संयोजक मण्डल की तरफ से आज बहुजन नायक मान्यवर कांशीराम साहब के जन्मदिन पर उन्हें याद करते हुए आरक्षण समर्थकों ने उनके चित्र पर पुष्प अर्पित किये। आरक्षण समर्थकों ने कहा कि मान्यवर कांशीराम साहब की ही देन है कि उनके द्वारा पूरे देश के दलित व पिछड़े वर्ग के कार्मिकों को एकजुट करने के लिये बामसेफ की स्थापना की गयी थी। उसके बाद पूरे देश में दलित कार्मिकों में चेतना आई और आज विभागवार हर सरकारी विभाग में आरक्षण समर्थक कार्मिकों का एक मजबूत संगठन है। जिस प्रकार से मान्यवर साहब ने बहुजन समाज में जागरूकता और संवैधानिक अधिकारों की लड़ाई को आगे बढ़ाने में जो अपना योगदान दिया उसे पूरा देश कभी नहीं भूल पायेगा। यह कहना गलत नहीं होगा कि मान्यवर साहब बहुजन समाज को एकजुट करने वाले सबसे बड़े संगठनकर्ता बने।
इस मौके पर आरक्षण बचाओ संघर्ष समिति के संयोजकों अवधेश कुमार वर्मा, केबी राम, डा रामशब्द जैसवारा, आरपी केन, अनिल कुमार, अजय कुमार, श्यामलाल, अन्जनी कुमार, लेखराम, अशोक सोनकर, प्रेमचन्द्र, दिनेश कुमार, राम औतार, घनश्याम सोनकर, अरविन्द फर्सोवाल ने कहा हम सभी को अपने अधिकारों को प्राप्त करने के लिये हमेशा एकजुट रहना होगा। इस अवसर पर आरक्षण बचाओ संघर्ष समिति संयोजक मण्डल ने देश व प्रदेश के सभी राजनीतिक दलों से अपने संवैधानिक अधिकारों पर 5 सवाल करते हुए यह ऐलान किया है, जो दल उनके सवालों पर खरा उतरेगा पूरे प्रदेश का 8 लाख आरक्षण समर्थक कार्मिक और उसका परिवार व रिश्तेदार उसे पार्टी को अपना 100 प्रतिशत वोट करेगा।
सवाल गंभीर हैं?
- पहला सवाल सभी पार्टियां से किया कि पिछले 5 वर्षों से ज्यादा समय से लोकसभा में पदोन्नति में आरक्षण का बिल लम्बित है, उसको पास कराने में उनकी पार्टी का क्या योगदान रहा?
- दूसरा सवाल सुप्रीम कोर्ट की संविधान पीठ द्वारा पारित आदेश के बावजूद भी आज तक उप्र में पदोन्नति में आरक्षण की व्यवस्था क्यों नही बहाल की गयी?
- तीसरा सवाल सुप्रीम कोर्ट द्वारा पारित आदेश के बाद आज तक उप्र की सरकार द्वारा 2 लाख दलित कार्मिकों का रिवर्शन क्यों नहीं वापस किया गया उस पर सभी अपना मत बतायें।
- चौथा सवाल पिछड़े वर्गों के लिये उप्र में पूर्व में लागू पदोन्नति में आरक्षण की व्यवस्था बहाल कराने में उनकी क्या राय है?
- पांचवा और अन्तिम सवाल आरक्षण को संविधान की 9वीं सूची में डालने पर पार्टियों की क्या राय?






