मामला प्रस्तावित बिजली बढ़ोतरी का: पावर कारपोरेशन अपने ही जवाब में उलझा?

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उपभोक्ता परिषद ने कहा अब बिजली दर बढोत्तरी पर आयोग स्वतः ले फैसला और करे बढोत्तरी खारिज

लखनऊ, 08 जुलाई 2019: उप्र विद्युत नियामक आयोग द्वारा उदय स्कीम का लाभ देते हुये रेग्यूलेटरी एसेट पर जो प्रपत्र जारी किया था और प्रदेश के उपभोक्ताओं व बिजली कम्पनियों से उस पर अपनी राय देने को कहा था जिस पर उपभोक्ता परिषद द्वारा पहले ही अपनी आपत्तियाॅं व सुझाव दाखिल करते हुये नियामक आयोग से रेग्यूलेटरी असेट के मद में प्रदेश के विद्युत उपभेाक्ताओं का जो बिजली कम्पनियों के ऊपर निकल रहे लगभग 11852 करेाड का लाभ प्रदेश की जनता को दिलाने की आयोग से मांग करते हुये टैरिफ बढोत्तरी प्रस्ताव को खारिज करने की मांग उठा चुका है।

वहीं अब पावर कारपोरेशन के जवाब के बाद तब मामला उलझता नजर आ रहा है। जब बिजली कम्पनियों के जवाब में यह तथ्य सामने आया कि पावर कारपोरेशन द्वारा अपने जवाब में कहा गया कि आयोग द्वारा उदय स्कीम का लाभ देने के लिये रेग्यूलेटरी एसेट के मामले में जिन 4 राज्यों राजस्थान, बिहार, तमिलनाडू एवं तेलंगाना का अध्ययन कर उसमें से तमिलनाडू के आधार पर प्रदेश में जो रेग्यूलेटरी एसेट 11852 करोड बिजली कम्पनियों पर निकाला गया है उससे वह सहमत नही है।

उपभोक्ता परिषद ने कहा कि पावर कारपोरेशन का कहना है कि बिहार व तेलंगाना के मामले अलग हैं। राजस्थान की तरह उप्र में उदय स्कीम पर प्रपत्र तैयार होना चाहिये था। लेकिन चौकाने वाला मामला यह है कि विद्युत नियामक आयोग द्वारा तमिलनाडू राज्य की तर्ज पर उप्र में बिजली कम्पनियों पर जो अतिरिक्त राशि निकाली गयी उस पर पावर कारपोरेशन ने कोई भी टिप्पणी नही की और जिस राज्य राजस्थान की भाॅंति कार्यवाही की माॅंग पावर कारपोरेशन कर रहा है उसे यह पता ही नही है कि वहाॅं पर उदय का लाभ राजस्थान नियामक आयोग द्वारा  आंशिक रूप से वहाॅं के उपभोक्ताओं को दिया गया है और तमिलनाडु नियामक आयोग जहाॅ पर उदय का लाभ वहाॅं के विद्युत उपभोक्ताओं को 100 प्रतिशत दिया गया है। उसी को उप्र नियामक आयोग ने आधार बनाया है और जो आजतक कहीं भी चैलेन्ज नही हुआ है और पूरे देश में सराहा गया है।

उप्र राज्य विद्युत उपभोक्ता परिषद के अध्यक्ष व राज्य सलाहकार समिति के सदस्य अवधेश कुमार वर्मा ने कहा कि पावर कारपोरेशन खुद अपने ही जाल में उलझ गया है। जो भी जवाब पावर कारपोरेशन द्वारा दाखिल किया गया वह सब वही पुरानी बातें हैं जिसे नियामक आयोग द्वारा खारिज करते हुये प्रदेश के विद्युत उपभोक्ताओं का पावर कारपोरेशन व बिजली कम्पनियों पर रू0 11852 करोड निकाला गया है। अब जब उसका लाभ प्रदेश की जनता को मिलने का समय आया फिर बिजली कम्पनियाॅं हवा में बातें कर रही है।

उपभोक्ता परिषद ने कहा कि सबसे बडा सवाल यह उठता है कि नियामक आयोग ने जिन 4 राज्यों राजस्थान, बिहार, तमिलनाडू एवं तेलंगाना का अध्ययन किया और उसमें पाया कि सबसे ज्यादा हितकर और 100 प्रतिशत लाभ के मामले में तमिलनाडु नियामक आयोग सबसे आगे रहा और जिसकी प्रक्रिया को पूरे देश में सराहा गया तो एसे में उसको आधार बनाकर उप्र विद्युुत नियामक आयोग ने जो कार्यवाही आगे की वह सराहनीय है।

उस पर कोई गल्ती हो तो बिजली कम्पनियां बोले लेकिन ऐसा न करके पावर कारपोरेशन उस राज्य की वकालत कर उसे लागू करने की मांग कर रहा हे। जिस राजस्थान में उदय का लाभ प्रदेश की जनता को आंशिक मात्र मिला है। ऐसे में अब जब पावर कारपोरेशन का जवाब आ गया है विद्युत नियामक आयोग को बिजली दर बढोत्तरी को स्वतः समाप्त कर जनता को लाभ देना चाहिये।

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