अगर आप बहुत ज्यादा एक्शन वीडियो गेम खेलते हैं तो सावधान हो जाएं, इससे आपके मस्तिष्क के ग्रे मैटर (केंद्रीय तंत्रिका तंत्र का मुख्य अवयव) में कमी आ सकती है। इस कमी से तनाव, स्किजोफ्रेनिया (एक प्रकार का पागलपन) और अल्जाइमर जैसी बीमारियों का खतरा बढ जाता है। एक नए अध्ययन में इससे संबंधित चेतावनी दी गई है।
कनाडा के यूनिवर्सिटी के अनुसंधानकर्ताओं ने पाया है कि एक्शन गेम खेलने के आदी लोगों के हिप्पोकैम्पस में ग्रे मैटर कम होता है। हिप्पोकैम्पस, मस्तिष्क का ऐसा बडा हिस्सा होता है जो अतीत के अनुभवों को याद रखने के लिए जिम्मेदार होता है।
पहले के कई अध्ययनों ने यह दिखाया था कि हिप्पोकैम्पस में कमी से व्यक्ति में मस्तिष्क संबंधी बीमारी के पैदा होने का खतरा रहता है। इससे पोस्ट ट्रॉमेटिक स्ट्रेस डिसआॅर्डर (पीटीसीडी), अल्जाइमर, स्किजोफ्रेनिया और तनाव जैसी बीमारियां हो सकती है।
वीडियो गेम्स से मस्तिष्क की संज्ञानात्मक प्रणाली को लाभ मिलता है। यह विशेष तौर पर विजुअल अटेंशन और लघु अवधि की याददाश्त से संबंधित है। लेकिन ऐसे सबूत भी है कि इससे हिप्पोकैम्पस संबंधित खतरे पैदा होते हैं।
अनुसंधानकर्ताओं ने करीब 100 (51 पुरष और 46 महिलाएं) लोगों को लेकर उन्हें कई तरह के एक्शन गेम 90 घंटे तक खेलने को दिए। अनुसंधानकर्ताओं की टीम ने गेम खेलने के आदी लोगों का मस्तिष्क स्कैन करके उसकी तुलना नहीं खेलने वालों लोगों से की। उन्होंने पाया कि गेम के आदी लोगों के मस्तिष्क में ग्रे मेटर की कमी थी।
इसके बाद उन्होंने इसके खतरे को लेकर दो अध्ययन किए, जिसमें पाया कि गेम खेलने से मस्तिष्क में बदलाव होता है।
यह अध्ययन मॉलीक्यूलर साइकियेट्री जर्नल में छपा है।
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