अमेरिका-ईरान में तनाव कम कराने में जुटा फ्रांस

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  • डेमोक्रेटिक पार्टी ने प्रस्ताव पेश कर पार्टी की चार महिला सांसदों को ‘नस्लवादी’ बताने वाले ट्रम्प के ट्वीट की आलोचना की, वहीं, ट्रंप ने किया अपने ट्वीट का बचाव, कहा ये चारों सांसद हमारे देश से करते हैं नफरत इसके लिए जल्द पेश करेगा प्रस्ताव, इसमें अमेरिका से ईरान पर लगे प्रतिबंध हटाने की है अपील 

नई दिल्ली,20 जुलाई 2019: अमेरिका और ईरान के बीच तनाव को कम करने के लिए फ्रांस एक प्रस्ताव तैयार कर रहा है, जिसमें अमेरिका से ईरान पर लगे प्रतिबंध हटाने की अपील की गई है। लेबनान के समाचार चैनल अल-मयादीन ने फ्रांस के कूटनीतिक सूत्रों के हवाले से सोमवार को अपनी एक रिपोर्ट में यह जानकारी दी। इस प्रस्ताव के तहत अमेरिका आठ देशों को ईरान से तेल खरीदने की छूट देगा। इसके बदले में ईरान को वर्ष 2015 के अंतरराष्ट्रीय परमाणु समझौते के प्रावधानों का पालन करने के लिए कहा गया है।

इसके अलावा ईरान, इराक, सीरिया और यमन में सक्रिय अपने लड़ाकों के गुटों को अमेरिकी सहयोगियों पर हमला करने से भी रोकेगा। इससे पहले फ्रांस के राष्ट्रपति इमैनुएल मैक्रॉन ने सोमवार को कहा कि इस सप्ताह वह रूस के राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन, अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प और ईरान के राष्ट्रपति हसन रूहानी के साथ अंतरराष्ट्रीय परमाणु समझौते के तहत संयुक्त कार्रवाई योजना (जेसीपीओए) के सभी पक्षों पर चर्चा करेंगे।

मैक्रॉन ने कहा कि क्षेत्र में मौजूदा तनाव को बढ़ने से रोकने के लिए ईरान परमाणु समझौते को बचाए रखना आवश्यक है। गत सप्ताह ईरान ने अंतरराष्ट्रीय परमाणु समझौते के तहत यूरेनियम संवर्धन की तय सीमा को पार कर लिया है।


ईरान से युद्ध नहीं चाहते ट्रम्प : जरीफ

एक मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक ईरान के विदेश मंत्री मोहम्मद जावेद जरीफ ने कहा कि अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प ईरान के साथ युद्ध नहीं चाहते हैं, बल्कि उनके सहयोगी ऐसा चाहते हैं। जरीफ ने एनबीसी प्रसारक को दिए एक साक्षात्कार में कहा, ‘‘मुझे विश्वास नहीं होता कि राष्ट्रपति ट्रम्प युद्ध चाहते हैं, लेकिन मैं मानता हूं कि उनके आस-पास के लोग युद्ध चाहते हैं।’


अंतरराष्ट्रीय परमाणु ऊर्जा एजेंसी (आईएईए) ने इसकी पुष्टि भी की है। ईरान ने 3.67 प्रतिशत की तय सीमा को पार कर अपना यूरेनियम संवर्धन 4.5 प्रतिशत तक कर लिया है।उल्लेखनीय है कि ओमान की खाड़ी में गत माह होरमुज जलडमरूमध्य के नजदीक दो तेल टैंकरों अल्टेयर और कोकुका करेजियस में विस्फोट की घटना और ईरान द्वारा अमेरिका के खुफिया ड्रोन विमान को मार गिराने के बाद से दोनों देशों के बीच तनाव चरम पर पहुंच गया है।

अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प ने गत वर्ष मई में ईरान परमाणु समझौते से अपने देश के अलग होने की घोषणा की थी। इसके बाद से ही दोनों देशों के रिश्ते बहुत ही तल्ख हो गये हैं। इस परमाणु समझौते के प्रावधानों को लागू करने को लेकर भी संशय की स्थिति बनी हुई है।गौरतलब है कि वर्ष 2015 में ईरान ने अमेरिका, चीन, रूस, जर्मनी, फ्रांस और ब्रिटेन के साथ एक समझौते पर हस्ताक्षर किए थे। समझौते के तहत ईरान ने उस पर लगे आर्थिक प्रतिबंधों को हटाने के बदले अपने परमाणु कार्यक्रम को सीमित करने पर सहमति जताई थी।

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