जून तक का समय पाकिस्तान के पास
नई दिल्ली, 27 फरवरी। आंतक और आंतकवादियों को पनाह देना, आने वाले दिनों में पाकिस्तान के लिए आर्थिक रुप में बहुत बड़ा नुकसान पैदा कर सकता है। फाइनेशल एक्शन टास्क फोर्स की ओर से पाकिस्तान की इकॉनमी को ‘ग्रे लिस्ट’ में शामिल किए जाने से पाक पर विपरीत प्रभाव पड़ेगा। पाकिस्तान की ओर से टेरर फाइनैंसिंग को रोकने में असफल रहने पर टास्क फोर्स ने यह कदम उठाया है। टास्क फोर्स के इस कदम के बाद अब पाक के सामने अन्य एजेंसियों की ओर से भी डाउनग्रेड किए जाने का खतरा मंडरा रहा है। यहीं नहीं यदि पाक के आंतक को लेकर अपने रवैये में सुधार नहीं हुआ तो टास्क फोर्स की ओर से उस ब्लैकलिस्ट भी किया जा सकता है।
पाकिस्तान के आर्थिक विशेषज्ञों का कहना है कि अंतरर्राष्ट्रीय मुद्रा कोष,वर्ल्ड बैंक,एशियन डिवेलपमेंट बैंक सहित मूडीज,स्टैंडर्ड ऐंड पूअर और फिच जैसी एजेंसियां पाकिस्तान को डाउनग्रेड कर सकती हैं। ऐसा होने पर पाकिस्तान के स्टॉक मार्केट सहित पूरी इकॉनमी में गिरावट का दौर देखने को मिल सकता है। इससे सीधे तौर पर चीन को फायदा होगा और उसके सामने पाकिस्तान में निवेश के मौके पैदा हो सकते है। पाकिस्तान सरकार के आंतरिक सूत्र ने नाम उजागर न करने की शर्त पर बताया, ‘ग्रे लिस्ट में शामिल होने का अर्थ है कि पाकिस्तान के लिए इंटरनैशनल मार्केट से फंड हासिल करना मुश्किल हो जाएगा। हालांकि पाकिस्तान के प्रधानमंत्री खाकन अब्बासी के आर्थिक सलाहकार मिफ्ताह इस्माइल ने दावा किया कि इससे पाकिस्तान की इकॉनमी पर कोई विपरीत प्रभाव नहीं पड़ेगा।
शुक्रवार को एजेंसी की ओर से पाकिस्तान को ग्रे लिस्ट में शामिल किए जाने से पहले ही देश के प्रमुख अखबार ने लिखा था कि यदि ऐसा होता है तो यह पाकिस्तान की छवि के लिए करारा झटका होगा। मनी लॉन्ड्रिंग और टेरर फाइनैंसिंग के मसले पर रोक न लगाने वाले देशों की रेटिंग तैयार करने वाला फाइनैंशल एक्शन टास्क फोर्स ग्रे और ब्लैक लिस्ट तैयार करता है। हालांकि यह संस्था किसी भी देश पर कोई प्रतिबंध नहीं लगा सकती।
हालांकि किसी भी देश के इस लिस्ट में शामिल होने पर उसकी वित्तीय साख प्रभावित होती है और अंतरर्राष्ट्रीय बाजार से कर्ज हासिल करना उसके लिए मुश्किल हो जाता है। टास्क फोर्स की ओर से ग्रे लिस्ट में शामिल किए जाने से विदेशी निवेशकों और कंपनियों की पाकिस्तान में दिलचस्पी कम हो सकती है। फाइनैंशल एक्शन टास्क फोर्स की लिस्ट से पाकिस्तान का नाम 2015 में हटा लिया गया था। 3 साल बाद ऐसा हुआ था और तीन साल के बाद ही वह फिर इस सूची में आ गया है। यही नहीं यदि सुधार नहीं हुआ तो जून में वह ब्लैक लिस्ट में भी शामिल हो सकता है। ऐसा होने पर वैश्विक वित्तीय संस्थान पाकिस्तान से लेनदेन में परहेज कर सकते हैं। इसके अलावा कारोबारी माहौल के लिहाज से भी यह नकारात्मक होगा।







