भारत में पहली बार, प्रत्यारोपण से पहले 24 घंटे तक सुरक्षित रहेगा लिवर 

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नई दिल्ली,12 मई। डॉक्टरों के पास लिवर दान के बाद उसके प्रत्यारोपण करने का समय बहुत कम रहता है। जब भी किसी अस्पताल में प्रत्यारोपण होता है तो दिल्ली पुलिस ग्रीन कॉरिडोर बनाती है। लेकिन अब प्रत्यारोपण से पहले लिवर को 24 घंटे तक न सिर्फ सुरक्षित रखा जा सकेगा, बल्कि मशीन के जरिए लिवर की उपयोगिता का पता भी चल सकेगा। देश में पहली बार इस नई तकनीक की शुरुआत होने जा रही है।

मेदांता अस्पताल के वरिष्ठ डॉक्टर ए.एस.सोइन ने कहा कि प्रत्यारोपण से पहले लिवर को रक्त चढ़ाकर यह देखा जा सकता है कि वह मरीज के लिए फिट है या नहीं। लिवर की क्षमता को बढ़ाने की इस तकनीक का नाम नोर्मोथर्मिक मशीन परफ्यूजन है। डॉ.सोइन ने कहा कि इस मशीन की खासियत है कि एक बार लिवर दान में लेने के बाद उसकी कमियों को दूर करने के लिए यह मशीन सहायक भूमिका निभाती है। आमतौर पर छोटी छोटी जगहों से दिल्ली जैसे मेट्रो शहरों तक दान में मिले अंग को लेकर आना कई बार संभव नहीं हो सकता। जिसके चलते काफी दिक्कतें आती हैं। लेकिन इस तकनीक ने परेशानी को दूर कर दिया है। साथ ही अंगदान को बढ़ावा देने में यह मदद भी करेगी।

अतिरिक्त संरक्षण समय मिलने से प्रत्यारोपण टीम को किसी भी जटिलताओं से निपटने के लिए अधिक समय मिलता है, इससे उन रोगियों में भी लिवर प्रत्यारोपित किया जा सकता है जिनमें लिवर प्रत्यारोपण करना संभव नहीं होता है। उन्होंने कहा कि तकनीक यूरोप, अमेरिका और कनाडा में 300 से अधिक प्रत्यारोपण करवा चुकीहै। भारत में इसका पहली बार इस्तेमाल पिछले महीने बेंगलुरु के एस्टर सीएमआई अस्पताल में 56 वर्षीय मरीज में किया था। रोगी की बहुत जल्द रिकवरी हुई और उसे कुछ ही हफ्तों में अस्पताल से छुट्टी दी गई।