मध्यप्रदेश के चुनावों में राजनीतिक पीआर एजेंसियों की रणनीतियाँ

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अतुल मलिकराम

आने वाले महीनो में देश कई महत्वपूर्ण चुनाव का साक्षी बनेगा जो 2018 में होंगे और 2019 में 17वीं लोकसभा चुनाव भी होंगे। 2018 में देश के प्रमुख राज्यों में विधानसभा चुनाव होने वालें है जिसमे मध्य प्रदेश, छत्तीसगढ़, राजस्थान, कर्नाटक, त्रिपुरा, नागालैंड, मेघालय और मिजोरम जैसे राज्य शामिल हैं। इनमे से मध्यप्रदेश विधान सभा चुनाव पर हर किसी व्यक्ति की दृष्टि रहेगी, क्यूंकि राजनीतिक और भौगोलिक बिंदु के आधार पर यह राज्य महत्वपूर्ण हैं।

हाल ही के दिनों में देश में विभिन्न राजनीतिक परिवर्तन हुए हैं, और जिस तरह राजनीतिक अभियान चलाये गए है उससे आम जनता की सोच उनके राजनीतिक नेताओं के प्रति बदली हैं । पब्लिक रिलेशन हर प्रमुख चुनाव में महत्वपूर्ण भूमिका निभा रहा है और सभी राजनीतिक दल अब पीआर एजेंसियों के सुझाव एवं रणनीतियों का अनुसरण कर रहे हैं। इस डिजिटल युग में, डिजिटल मीडिया और सोशल मीडिया जनता के साथ सीधे संवाद करने लिए उपकरण के रूप में उपयोग किया जा रहा हैं जो राजनीतिक नेताओं को जनता से जुड़ने और अपनी बात व्यक्त करने में मदद कर रहा हैं। अतुल मलिकराम एक राजनैतिक विश्लेषक है उन्होंने कहा ‘2014 के लोकसभा चुनाव में यह क्रांति देखी गई थी,  जो न केवल देश में बल्कि दुनिया में भी लोगों के बीच आकर्षण का केंद्र रही, लोगों ने पहली बार पब्लिक रिलेशन की ताकत को जाना’।

श्री नरेंद्र मोदी जब देश के प्रधान मंत्री बने उसके बाद अन्य राजनीतिक दलों ने भी पब्लिक रिलेशन के महत्व को समझा। सभी दल भारतीय राजनीति में अपने अस्तित्व को बचाने लिए इस दौड़ में शामिल हो गए और अन्य नेता जैसे अरविंद केजरीवाल, राहुल गांधी आदि ने सोशल मीडिया और डिजिटल मीडिया में अपनी मौजूदगी महसूस करने के लिए पब्लिक रिलेशन एजेंसीज का उपयोग शुरू किया। न सिर्फ राष्ट्रीय स्तर की राजनीति में बल्कि राज्य स्तर की राजनीति में भी राजनेता लोगों के बीच अपने विचार व्यक्त करने, अपनी सोच को जाहिर करने और राजनैतिक छवि को विकसित करने के लिए पब्लिक रिलेशन का उपयोग कर रहे हैं, जो राज्य की राजनीति में उनकी छवि को बदलने में सक्षम हो।

2018 में मध्य प्रदेश में विधान सभा चुनाव होने हैं और देश के मध्य में स्थित होने के कारण राज्य का अपना भौगोलिक महत्व है। अगर हम कुछ साल पहले देखे तो 2013 में भाजपा तीसरी बार सत्ता में आई, जिसका असर 2014 के लोकसभा चुनाव में हुआ था और बीजेपी को जीताने में मदद मिली। अतुल मलिकराम का कहना है कि‘इस लिहाज़ से 2018 का विधान सभा चुनाव न ही सिर्फ मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान के लिए महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगा बल्कि अगले लोकसभा चुनाव में बीजेपी तथा अन्य राजनैतिक पार्टियों के लिए महत्वपूर्ण होने वाला हैं’।

पब्लिक रिलेशन- एक महत्वपूर्ण पहलू

हर एक बड़े चुनाव में पब्लिक रिलेशन की मदद ली जा रही है और मध्यप्रदेश  की बात करें तो यहाँ पब्लिक रिलेशन का दायरा बहुत बड़ा हैं | मध्यप्रदेश में 230 विधानसभा सीटें है और 4.5 करोड़ से ज्यादा मतदाता 2018 के चुनाव में अपना महत्वपूर्ण वोट डालेंगे | इनमे से राज्य में 1.5 करोड़ युवा वोटर्स हैं, जो विभिन्न राजनीतिक नेताओं के राजनीतिक करियर की दिशा तय करेंगे|इसलिए गुणवत्ता पूर्ण रणनीतियोँ के निष्पादन और उसे प्रबंधन की आवश्यकता होगी, जो कि राजनीतिक पीआर पेशेवर द्वारा ही किया जाएगा|जो राजनीतिक नेताओं के लिए प्रभावी नीतियां बनाने में सफल हो और जनता के बीच राजनेताओं की सकारात्मक छवि को बनाने और दिखाने में सक्षम हो।

अतुल मलिकराम पूरे उत्तर भारत में एकमात्र राजनीतिक पीआर विशेषज्ञ हैं, जिन्होंने मध्यप्रदेश में राजनीतिक पीआर के महत्व पर चर्चा करते हुए कहा की ‘मध्य प्रदेश हमेशा भारतीय राजनीति में महत्वपूर्ण रहा है और राजनीति में पीआर की आवश्यकता आज की जरुरत है , क्योंकि अब राजनेताओं को ऐसे एजेंसियों का उपयोग करना होगा जो ऑफ़लाइन और ऑनलाइन दोनों मोड में उनके संपूर्ण राजनीतिक अभियान का प्रबंधन कर सकें’।

वर्तमान राजनैतिक स्थिति भविष्य के परिणाम को बहुत दिलचस्प बनाने वाली हैं क्योंकि सभी पक्ष और उनके नेता अगले राजनीतिक युद्ध के लिए तैयार हैं। राज्य के हर क्षेत्र की अपनी पहचान और महत्व है और हर जगह हमें अधिक से अधिक राजनैतिक हलचल देखने को मिलेंगी। क्योंकि न केवल राज्य के राजनैतिक नेता इसमें शामिल होंगे, बल्कि देश कि राजनीति के प्रसिद्ध हस्तियां अपनी उपस्थिति दर्ज कराएँगे। हम यह कह सकते हैं कि यह भारतीय जनता पार्टी और कांग्रेस के बीच एक सीधी लड़ाई हैं, लेकिन बहुजन समाज पार्टी, समाजवादी पार्टी और आम आदमी पार्टी जैसे अन्य पार्टियां चुनाव के नतीजों में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएंगी। पब्लिक रिलेशन सिर्फ किसी मीडिया के माध्यम से समाचारों के वितरण के बारे में नहीं है, बल्कि सोशल मीडिया और डिजिटल मीडिया का उपयोग कर नारों की मदद से, राजनीतिक प्रचार के साथ प्रतिष्ठा का निर्माण करना हैं । पीआर मध्य प्रदेश में होने वाले चुनाव में एक प्रमुख भूमिका निभाएंगे और कोई राजनीतिक पब्लिक रिलेशन की शक्ति को नज़रंदाज़ नहीं कर सकता है।

(लेखक अतुल मलिकराम 1999 से बिल्डिंग रेपुटेशन, पीआर और 
डिजिटल कम्युनिकेशन कंपनी के निदेशकऔर राजनीतिक विश्लेषक हैं)

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