चिदंबरम का अर्थशास्त्र अब गड़बड़ाया !

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imaging: shagunnewsindia.com
डॉ दिलीप अग्निहोत्री
अंततः पूर्व वित्त मंत्री पी चिदंबरम के पुत्र कार्ति कानूनी शिकंजे में आ गए। उन पर विदेशी कंपनी को लाभ पहुंचाने के बदले लाभ उठाने का आरोप है। मामला यहीं तक सीमित नहीं है। इस मसले के याचिकाकर्ता राज्यसभा सदस्य  सुब्रामणियम स्वामी की माने तो पी चिदंबरम भी शिकंजे में आएंगे। क्योकि लाभ भले ही उनके पुत्र ने उठाया,लेकिन  उन्हें इस लायक बनाने का कार्य उनके पिता ने किया था। इसके लिए कथित तौर पर उन्होंने मंत्री पद के अधिकारों का अनुचित रूप से इस्तेमाल किया था।
कुछ भी हो, यह मामला न्यायपालिका के विचाराधीन है, अंतिम फैसला वही होगा लेकिन प्रथम दृष्टया लगता है धुंआ किसी आग से ही उठा है। ये बात अलग है कि कांग्रेस ने इसे राजनीतिक साजिश करार दिया है। अभी कुछ दिन पहले ही वह नीरव मोदी प्रकरण पर मुखर हुई थी । ऐसा लगा जैसे वह अब आर्थिक गड़बड़ी के खिलाफ लड़ेगी। चिदंबरम ने भी इस विषय पर लिखना शुरू कर दिया था। कांग्रेस अध्यक्ष राहुल गांधी के भी खूब ट्वीट आने लगे, वह सीधे नरेंद्र मोदी से हिसाब मांग रहे थे।  यह दिखाने का प्रयास हुआ जैसे आर्थिक गड़बड़ी के प्रति कांग्रेस का जीरो टॉलरेंस रहा है।  इस लिये कुछ प्रकरण उसे बेचैन कर रहे है। लेकिन यह सब चल ही रहा था, तभी कार्तिचिदंबरम गिरफ्तार हो गए।
कांग्रेस की ओर से बचाव में दो बात कही गई। एक यह कि सरकार बदले की भावना से कार्य कर रही है। कांग्रेस ईमानदार व्यवस्था के लिए कथित तौर पर संघर्ष कर रही है, सरकार ने इसी लिए बदले की भावना से कार्य किया।   कार्तिचिदंबरम को गिरफ्तार किया गया। दूसरा कारण यह है कि सरकार नीरव मोदी प्रकरण से ध्यान हटाना चाहती है। इस लिए उसने पूर्व वित्त मंत्री के पुत्र को गिरफ्तार किया। इसी क्रम में उसने भाजपा अध्यक्ष अमित शाह के पुत्र पर भी अपने आरोप दोहराए।
लेकिन कांग्रेस के नेताओं ने बचाव में जो तर्क दिए , उसका कोई आधार नहीं है।  एक बात यह कि इस गिरफ्तारी में सरकार का कोई हाँथ या भूमिका नहीं है।  कार्तिचिदंबरम के खिलाफ सुब्रामणियम स्वामी ने याचिका दायर की थी। न्यायपालिका की निगरानी में जांच कार्य चल रहा है। ऐसे में यह कहना गलत है कि सरकार बदले की भावना से कार्य कर रही है। कार्तिचिदंबरम की गिरफ्तारी के समय को मात्र सन्योग कहा जा सकता है। जब सरकार की इसमें कोई भूमिका ही नहीं है, तब गिरफ्तारी के लिए वह जिम्मेदार  कैसे हो सकती है।
अमित शाह के पुत्र  की  चर्चा से भी कांग्रेस का बचाव नहीं हो सकता। अमित शाह पहले भी कह चुके है कि उनके पुत्र ने सरकार से न एक रुपया सहायता ली है,  न सत्ता का अनुचित लाभ उठाया है, न अनुचित साधनों से व्यवसाय किया है।   शाह ने तो कानूनी कार्रवाई की   चुनोती भी दी थी। लेकिन कांग्रेस के नेता आरोप लगाने तक सीमित रहे। जबकि  सुब्रामणियम स्वामी जैसे नेता कार्तिचिदंबरम के खिलाफ न्यायपालिका पहुंच गए थे। कांग्रेस में अनेक दिग्गज वकील हैं।  लेकिन किसी ने यह जहमत नहीं उठाई। क्योकि वह जानते है कि बेबुनियाद आरोप लगाना आसान है,किन्तु उसे न्यायपालिका में उठाना कठिन है।
ऐसे आरोपो पर राजनीति अवश्य हो सकती है, और कांग्रेस यह कर भी रही है। इसी प्रकार उसने नेशनल हेराल्ड मसले पर भी सरकार को घेरा था। बिल्कुल वही तर्क दिए गए ,जो आज चिदंबरम मामले में दिए जा रहे है।
यही कहा गया था कि सरकार बदले की भावना से कार्य कर रही है। जबकि वह मामला भी सुब्रामणियम स्वामी ने न्यायपालिका में उठाया था। न्यायपालिका की निगरानी में ही कार्यवाई चल रही थी। उसमें सोनिया गांधी और राहुल गांधी आरोपी थे।  कांग्रेस में उनके बाद पी चिदंबरम  को माना जाता है,  अब गड़बड़ी की आंच  उनके करीब भी पहुंच रही है।
जांच एजेंसी का कहना है कि कार्तिचिदंबरम लंबे समय से सहयोग नहीं कर रहे थे। आरोप है कि उन्होंने आईएनएक्स मीडिया के लिए गैरकानूनी तरीके से निवेश की मंजूरी हासिल की थी। यह मंजूरी पी चिदंबरम के वित्तमंत्री रहते हुए मिली थी। आईएनएक्स मीडिया को मारिकी तीन कम्पनियों से पांच करोड़ रुपये विदेशी निवेश की मंजूरी थी। लेकिन कम्पनी ने तीन सौ पांच करोड़ रुपये का निवेश कराया।। कार्तिचिदंबरम ने आईएनएक्स को गैर कानूनी ढंग से एफआईपीबी की मंजूरी दिलाई। इसे वित्तीय जांच से छूट मिली थी। आरोप है कि इसके बदले कार्ति चिदंबरम चेस मैनेजमेंट और पदमा विश्वनाथ की कम्पनी एडवांटेज कन्सलटेसी के जरिये आईएनएक्स से रकम ली थी। इसके अलावा  वह राजस्थान के एम्बुलेंस घोटाले के भी आरोपी है।
पी चिदंबरम का वित्तमंत्री कार्यकाल आर्थिक गड़बड़ी के लिए ज्यादा चर्चित रहा था। एक प्रकार से समानांतर व्यवस्था  चल रही थी।  सरकार की नीतियों में अनेक लूपोल थे। इसे लेकर खूब चर्चा हुई लेकिन अर्थशास्त्र के विद्वान पी चिदंबरम ने इसे रोकने का प्रयास नही किया। नरेंद्र मोदी की सरकार ने ऐसे अनेक लूपोल बन्द किये है। फिर भी पुरानी व्यवस्था का लाभ  उठाकर पीएनबी जैसी गड़बड़ी की गई। सरकार इसे रोकने के सख्त प्रयास के रही है। बड़े बकायेदारों पर पन्द्रह दिन में कार्यवाई की जाएगी। जो सहयोग नहीं करेगा उसकी संपत्ति तत्काल प्रभाव से जब्त होगी। कार्तिचिदंबरम मामले में रकम  से ज्यादा मह्यवपूर्ण  यह है कि यूपीए सरकार में बागडोर किन हांथो में थी। ऐसे लोग कभी आर्थिक गड़बड़ी को मुद्दा नहीं बना सकते।
कांग्रेस की इस दुविधा का अंत नहीं है।