नवेद शिकोह
लखनऊ में पत्रकारों की संख्या प्रवासी मज़दूरों से कम नहीं है। ये कहीं ख़बर लिखें या ना लिखें पर सचमुच ये बड़े कोरोना योद्धा हैं। इनका योगदान ये है कि ये लॉकडाउन में घर में बैठे लोगों का जीवन बचा रहे हैं, तनाव दूर कर रहे हैं। सोशल मीडिया पर इनकी गतिविधियों को देखकर इतना मनोरंजन होता है कि कपिल शर्मा का कॉमेडी शो और जॉनी लीवर की फिल्में भी इतना नहीं हंसा पातीं जितना ये मनोरंजन करवा देते हैं।
एक बानगी बताता हूं-
कोई संगठन रोज़ पत्रकारों को कोरोना योद्धा का प्रशस्ति पत्र दे रहे हैं। सम्मान पत्र पाने वाले इसे फेसबुक पर लगा रहे हैं।
उसी क़िस्म के दूसरे जिन पत्रकारों को ये ऑनलाइन पत्र अभी तक नहीं मिला है वो गुस्सा हैं, व्यंग्य कर रहे हैं।
एक लिख रहा है- बड़े-बड़े पत्रकारों को कोरोना योद्धा का प्रशस्ति पत्र दिया जा रहा है। क्योंकि कोरोना महामारी पर ये ख़ूब ख़बरे लिख रहे हैं। दुनिया इनकी ख़बरें पढ़ती है। मैंने तो सुना है लखनऊ के इन फट्टरों की खबरें पढ़कर ही विश्व स्वास्थ्य संगठन दुनिया के हालात का ज़ायज़ा लेता है। – नवेद शिकोह







