क्या रायफल क्लब मैदान को नीलाम करने की साजिश बिना सत्ता पक्ष के नेताओं की जानकारी में हुई?
अजय कुमार श्रीवास्तव
बबेरू/बांदा। रायफल क्लब बांदा अचानक चर्चा में यूं ही नहीं आमजन के समक्ष आ गया! इस ऐतिहासिक मैदान को चुपचाप तरीके से बेचने की जो साजिश चल रही थी उस साजिश के पीछे कौन कौन हैं? यह किसी को समझाने या बताने की जरूरत नहीं है।
जनता है सब जानती है।
बिना सत्तापक्ष के नेताओं के सहयोग के इतनी बड़ी और अहम प्रक्रिया कैसे संभव हो सकती है? यह प्रश्न हैं बबेरू से सपा विधायक विश्वंभर सिंह यादव के ; और यही प्रश्न आम जनता के मन में भी उठ रहे हैं।
जैसे ही इस खेल मैदान की नीलामी की सूचना की सुगबुगाहट शुरू हुई, और अखबारों में नीलामी का विज्ञापन लगा तो विरोध का स्वरूप विराट होने लगा। बढ़ते विरोध के बाद बांदा सदर से बीजेपी विधायक भी जन रुझान को भांपते हुए जनता के पक्ष की बात करते नजर आए और आनन फानन में वो सूबे के मुखिया से मिलकर इस नीलामी प्रक्रिया को रुकवाने की मांग की। जल्द ही मौखिक रूप से बात मान भी ली गई। अब नीलामी पर रोक के लिए बीजेपी अपनी ही पीठ थपथपा रही।

बांदा के इस ऐतिहासिक व इकलौते खेल मैदान
(रायफल क्लब खेल मैदान) को बांदा विकास प्राधिकरण (BDA) द्वारा नीलाम किए जाने की प्रक्रिया का विरोध सर्वप्रथम बबेरू विधायक विश्वंभर सिंह यादव ने किया। उन्होंने इस मुद्दे को सड़क से लेकर सदन तक उठाया है। वे इस आंदोलन के प्रमुख चेहरों में से एक रहे हैं।
उन्होंने आरोप लगाया कि बांदा विकास प्राधिकरण ने नगर पालिका से इस मैदान को गलत तरीके से ‘फ्री-होल्ड’ कराया है।
बबेरू विधायक की ही अगुवाई में सपा कार्यकर्ताओं ने जिलाधिकारी (DM) और मंडलायुक्त कार्यालय पर विरोध प्रदर्शन किया और राज्यपाल के नाम ज्ञापन सौंपा।
उन्होंने मीडिया और सदन को बताया कि यह जमीन 1902 में पुलिस परेड के लिए दी गई थी और 2006 में तत्कालीन मुख्यमंत्री मुलायम सिंह यादव ने इसे खेल मैदान के रूप में ही बनाए रखने की घोषणा की थी।
वीडियो देखने के लिए इस लिंक पर क्लिक करें – https://youtu.be/Dd4KdugJnW4
उन्होंने भाजपा सरकार के “खेलो इंडिया” नारे पर सवाल उठाते हुए इस खेल के मैदान की नीलामी को “खिलाड़ियों के साथ धोखा” करार दिया है। नीलामी अगर न रुकी तो उन्होंने आंदोलन की चेतावनी दी है।
सपा विधायक के बाद इस मुद्दे को कांग्रेस के दिग्गज नेता अजय राय ने भी उठाया था। मामले की गंभीरता को देखते हुए सदर विधायक प्रकाश द्विवेदी ने भी हस्तक्षेप किया। न्यायोचित मांग के लिए विपक्ष के साथ साथ जनता का भी मैदान में उतर आना खेल मैदान की नीलामी प्रक्रिया पर रोक लगवाने के अहम कारक रहे।
क्लब मैदान केवल जमीन का टुकड़ा नहीं, खिलाड़ियों का भविष्य है
बबेरू विधायक विश्वंभर सिंह यादव से बात करने पर उन्होंने कहा कि बांदा का ऐतिहासिक रायफल क्लब मैदान केवल जमीन का टुकड़ा नहीं, हमारे खिलाड़ियों का भविष्य और बांदा का गौरव है। इस मैदान में में हाकी के जादूगर मेजर ध्यानचंद की भी साधना समाहित है।
इस खेल मैदान की नीलामी का जो शंखनाद किया गया है इसमें पूरी तरह से प्रशासन मात्र का हाथ नहीं है, भाजपा के बड़े बड़े नेताओं के ही सहयोग से नीलामी की यह प्रक्रिया अस्तित्व में आई। लेकिन जब सपा ने मैदान से लेकर विधानसभा में इस मुद्दे को गंभीरता से उठाया तब बांदा की जनता भी लामबंद हो गई। यह नीलामी कहीं भाजपा के गले की फांस न बन जाए इसलिए इसे अस्थाई रूप से (वो भी मौखिक) 20 जनवरी तक रोकने का आदेश शासन से आ गया, (जबकि 21 जनवरी को नीलामी की तारीख तय की गई थी।) ऐसा सत्ता पक्ष के लोग दावा कर रहे हैं लेकिन यह आदेश अभी लिखित रूप में शासन से प्राप्त नहीं हुआ।
अभी भ्रम की स्थिति बनी हुई है। ऐसा लगता है कि बांदा सदर ही नहीं बांदा जिला की जनता का विरोध देखते हुए फिलहाल जनता के हाथ में झुनझुना थमा दिया गया है। “खेलो इंडिया” का नारा देने वाले खेल का मैदान ही चट करते जा रहे, इंडिया कहां खेलेगा? बांदा में तीन खेल के मैदान थे दो में तो खेल बंद ही करा दिया, तीसरे और अकेले बचे खेल के मैदान को भी पूंजीपतियों को सौंपने की तैयारी बना ली। अगर ऐसा हुआ तो समाजवादी पार्टी सड़क से लेकर सूबे की महापंचायत तक आंदोलन करेगी और इससे भी बात नहीं बनी तो अदालत की ओर रुख करेगी।






