APO के बाद खाली पड़ी कुर्सी, रोते मरीज़ और सिस्टम से लड़ते डॉ. अशोक शर्मा की आँखें – उदयपुर के बड़गांव में आज सिर्फ़ अलविदा नहीं, एक उम्मीद भी टूटी
उदयपुर, 29 नवंबर। बड़गांव सैटेलाइट अस्पताल के बाहर आज सुबह से भीड़ थी, लेकिन कोई बीमार नहीं आया था। लोग आए थे अपने डॉक्टर को अलविदा कहने। डॉ. अशोक शर्मा को राजस्थान सरकार ने कल रात APO कर दिया। यानी अब वे यहाँ नहीं रहेंगे।
अस्पताल का गेट बंद था, पर लोग गेट के बाहर खड़े थे। एक बुजुर्ग महिला बार-बार पूछ रही थीं, “डॉक्टर साहब कब आएँगे?” कोई बच्ची अपनी माँ का हाथ पकड़े रो रही थी। एक अधेड़ व्यक्ति ने बताया, “रविवार को भी डॉक्टर साहब आते थे। कभी छुट्टी नहीं ली। दवा ख़त्म हो जाती थी तो जेब से पैसे डालकर लाते थे।”

डॉ. अशोक शर्मा ने पिछले साल किसान आंदोलन में 90 दिन लगातार ड्यूटी दी थी। ऑपरेशन सिंदूर के लिए सबसे पहले स्वयं-सेवी आवेदन उन्होंने ही लिखा था। बड़गांव में जब रात को भी इमरजेंसी आती, लोग सबसे पहले उनके घर का दरवाज़ा खटखटाते थे।
कल रात जब APO का आदेश आया तो अस्पताल परिसर में मरीज़ और उनके परिजन इकट्ठा हो गए। कई लोग रोने लगे। किसी ने फूलमाला पहनाई, किसी ने पैर छुए। एक महिला ने कहा, “हमारा डॉक्टर चला गया तो हमारा इलाज कौन करेगा?”
आज डॉ. शर्मा ने एक छोटा-सा वीडियो जारी किया। उसमें उनकी आँखें नम थीं। उन्होंने कहा, “मैं ट्रांसफर से नहीं डरता। मैं रो रहा हूँ इन बच्चों के लिए, इन बूढ़ों के लिए जो मुझे ढूँढेंगे। लेकिन मैं कमजोर नहीं हूँ। मैं सिस्टम से लड़ता रहा हूँ, लड़ता रहूँगा। यहाँ दवाइयाँ नहीं होतीं, स्टाफ नहीं होता, फिर भी हम मरीज़ नहीं लौटाते। अब शायद कोई और तरीक़ा ढूँढना पड़ेगा।”
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विभाग ने अभी उनकी नई पोस्टिंग नहीं बताई है। बड़गांव अस्पताल में आज सिर्फ़ एक नर्स और एक कंपाउंडर हैं। बाहर खड़े लोग अब भी इंतज़ार कर रहे हैं – शायद कोई आदेश बदल जाए, शायद डॉक्टर साहब वापस आ जाएँ।
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पर अब सिर्फ़ खाली कुर्सी है, जिस पर अभी कल तक डॉ. अशोक शर्मा बैठा करते थे।







