जहां फोरेंसिक जीव विज्ञान ने केस की दिशा बदल दी

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लखनऊ में जीव विज्ञान की बेबीनार

जीव विज्ञान विभाग ने शताब्दी समारोह के हिस्से के रूप में फोरेंसिक एंटोमोलॉजी और कानूनी कार्यवाही के लिए इसकी प्रासंगिकता पर 2 दिवसीय वेबिनार का आयोजन किया। वेबिनार में दुनिया भर के फोरेंसिक और कानूनी विशेषज्ञ थे। पहले वक्ता प्रो देविंदर सिंह, जूलॉजी और पर्यावरण विज्ञान विभाग, पंजाबी विश्वविद्यालय, पटियाला ने विस्तार में बताया कि कीड़े जगह, समय और कभी-कभी मृत्यु के कारण की पहचान करने में कैसे मदद कर सकते हैं, और इस तरह से कानूनी मददगार साबित होते है। हालाँकि, इस क्षेत्र में भारत में पर्याप्त काम की कमी पर उन्होंने अपना दुख भी व्यक्ति किया।

प्रो सिंह ने शिकागो विश्वविद्यालय के प्रो बर्नार्ड ग्रीनबर्ग, जो फोरेंसिक एंटोमोलॉजी के पिता कहलाए जाते है, उनके साथ प्रशिस्क्षण प्राप्त किया है। दूसरे वक्ता मार्क बेनेके एक स्वतंत्र फोरेंसिक जीवविज्ञानी हैं, जिन्होंने एडोल्फ और ईवा हिटलर के खोपड़ी की पहचान सहित कई मामलों पर प्रकाश डाला है। प्रो बेनेके ने दर्शकों के साथ कई दिलचस्प मामलों को साझा किया जहां फोरेंसिक जीव विज्ञान ने किसी केस की दिशा बदल दी थी।

दूसरे दिन प्रो पद्मा सक्सेना, प्राध्यापक, प्राणि विज्ञान विभाग, लखनऊ विश्वविद्यालय ने फोरेंसिक एंटोमोलॉजी की मूल बातें की और इस क्षेत्र में अध्ययन और कार्य करने के तरीकों की विस्तृत जानकारी दी। चौथे वक्ता एडवोकेट अली जिबरान ने फोरेंसिक एन्टोमोलॉजी के कानूनी पहलुओं और भारत में इस क्षेत्र के उत्कर्ष के बारे में विस्तार से बात की, जिससे कई मामलों को सुलझाने में मदद मिली।

सेमिनार एक ऐसे क्षेत्र में किया गया, जो भारत में कम चर्चा का विषय है और इस प्रकार अमेरिका, यूरोप और अफ्रीका से आने वाले श्रोताओं के साथ दुनिया भर में बहुत ध्यान आकर्षित किया। व्याख्यान प्राणि विज्ञान विभाग, लखनऊ विश्वविद्यालय के यूट्यूब चैनल पर उपलब्ध हैं।

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