नवरात्रि के इस पावन अवसर पर श्री राम द्वारा रावण वध से पहले की गई शक्ति पूजा की कथा विशेष महत्व रखती है। यह कथा भक्ति, साहस और माँ दुर्गा की महिमा को दर्शाती है। रावण के अत्याचार और अनाचार से समस्त सृष्टि त्रस्त थी। उसने देवताओं, ग्रहों और साधुओं को अपने अधीन कर रखा था। जब रावण ने छल से माता सीता का हरण कर उन्हें लंका में बंदी बनाया, तब भगवान श्री राम ने रावण को पराजित कर सीता को मुक्त करने का संकल्प लिया। लेकिन रावण की शक्ति और मायावी ताकत के कारण यह युद्ध आसान नहीं था।
रावण की मायावी शक्ति और श्री राम की चुनौतियाँ
रावण ने अपनी तपस्या और वरदानों से अपार शक्ति प्राप्त की थी। उसका भय इतना था कि देव मंडल भी उससे काँपता था। श्री राम की वानर सेना को लंका युद्ध में कई कठिनाइयों और बाधाओं का सामना करना पड़ा। रावण की मायावी शक्तियों ने युद्ध को और जटिल बना दिया था। ऐसी स्थिति में भगवान ब्रह्मा ने श्री राम को सुझाव दिया कि माँ दुर्गा के स्वरूप माँ चंडी की पूजा करें, जो रावण जैसे आसुरी शक्तियों का नाश करने में सक्षम हैं।

माँ चंडी की पूजा और नील कमल की कमी
ब्रह्मा जी के सुझाव पर श्री राम ने माँ चंडी का आह्वान शुरू किया। पूजा के लिए 108 नील कमल के पुष्प अर्पित करने थे, जो अत्यंत दुर्लभ थे। श्री राम ने पूजा शुरू की, लेकिन रावण को जब इसकी भनक लगी, तो उसने अपनी मायावी शक्ति से एक नील कमल गायब कर दिया, ताकि पूजा अधूरी रहे। जब श्री राम को यह पता चला, तो वे चिंतित हुए, क्योंकि नील कमल को तुरंत प्राप्त करना असंभव था।
श्री राम का त्याग और माँ दुर्गा का प्रकट होना
नील कमल की कमी से पूजा के असफल होने का खतरा था। तभी श्री राम को अपनी माता कौशल्या की बात याद आई, जो उन्हें बचपन में “कमल नयन” कहकर पुकारती थीं। श्री राम ने फैसला किया कि वे अपना एक नेत्र माँ चंडी को अर्पित करेंगे। जैसे ही वे तीर से अपना नेत्र निकालने को तैयार हुए, माँ जगदम्बा प्रकट हुईं और उनका हाथ पकड़ लिया। माँ ने कहा, “श्री राम, तुम मेरी परीक्षा में सफल हुए।” माँ दुर्गा ने उन्हें विजय का आशीर्वाद दिया और रावण पर जीत का वरदान दिया।
रावण वध और सीता की मुक्ति
माँ दुर्गा के आशीर्वाद से श्री राम को अपार शक्ति और साहस प्राप्त हुआ। इसके बाद उन्होंने लंका पर चढ़ाई की, रावण का वध किया और माता सीता को बंधन से मुक्त कराया। यह शक्ति पूजा न केवल रावण की आसुरी शक्तियों पर विजय का प्रतीक बनी, बल्कि यह भी दर्शाती है कि सच्ची भक्ति और त्याग से असंभव कार्य भी संभव हो सकते हैं।
शक्ति पूजा का महत्व
श्री राम ने माँ दुर्गा की पूजा युद्ध में विजय, बल, और साहस प्राप्त करने के लिए की थी। यह पूजा नवरात्रि के दौरान शक्ति की आराधना के महत्व को भी दर्शाती है। आज भी यह कथा भक्तों को प्रेरित करती है कि माँ दुर्गा की कृपा से कोई भी बाधा असंभव नहीं है। नवरात्रि में इस कथा का स्मरण भक्तों को साहस और विश्वास प्रदान करता है।






