जैसे जैसे देश मे अगले लोक सभा के चुनावी वर्ष नजदीक आने लगे है वैसे वैसे इस बात को लेकर अभी से अटकलें तेज होने लगी है कि देश के अगले प्रधानमंत्री पद का दावेदार कौन होगा? आज की परिस्थियियों में देश मे एक भी चेहरा इस पद के दावेदार तृणमूल कांग्रेस की ममता बनर्जी को छोड़ कर कोई और चेहरा दिखाई नही दे रहा है ! तो ऐसे में लोगों ने फिलहाल सीपीआई नेता कन्हैया कुमार में ही वह चेहरा तलाशने की कोशिश की हैं।
लेफ्ट के नेता रहे कन्हैया कुमार ने कांग्रेस में शामिल होते ही यह कहा कि अगर कांग्रेस नहीं बची तो देश नहीं बचेगा, इसलिए वो पार्टी में शामिल हो रहे हैं। हालांकि, ये वही कन्हैया कुमार हैं जिनके ऊपर देशद्रोह का केस चला और यही वजह है कि बीजेपी उनके कांग्रेस में आने के बाद से उन पर हमलावर है।
बीजेपी के तमाम बड़े नेताओं का कहना हैं कि कांग्रेस ‘टुकड़े-टुकड़े गैंग’ के साथ आ गई है। आखिरकार वह कौन से कारण है कि कन्हैया कुमार छात्र राजनीति से राष्ट्र राजनीति में आ गए वैसे भारतीय राजनीति के इतिहास में झांके तो हमें यह देखने को मिलता है कि देश की राजनीति में आये अधिकांश राजनेता विश्वविद्यालय के प्रांगण से ही राजनीति की ककहरा सिख कर सार्वजनिक रूप में राजनीति में आये हैं।
ऐसे में यदि कन्हैया कुमार जो वर्ष 2015 में जेएनयू छात्रसंघ के अध्यक्ष के रूप में रहे और फिर सीपीआई छोड़कर कांग्रेस में शामिल हुए तो कोई बहुत बड़े आश्चर्य की बात नही है।
बिहार के बेगूसराय जिले के एक छोटे से गांव जो तेघरा विधानसभा में आता है, यहां जन्मे कन्हैया कुमार के पिता जयशंकर प्रसाद और माता मीना देवी एक आंगनवाड़ी कार्यकर्ती हैं। यहां के पूरे क्षेत्र में सीपीआई की अच्छी पैठ है।
वर्ष 2002 में कन्हैया कुमार ने पटना के कॉलेज ऑफ कॉमर्स में दाखिला लेने के बाद यहीं से उनके छात्र राजनीति की शुरुआत की है। पटना से स्नातक की उपाधि लेने के बाद जेएनयू में अफ्रीकन स्टडीज में पीएचडी किया। इस जेएनयू यूनिवर्सिटी के पूर्व छात्र नेता और लेफ्ट पार्टी के पोस्टर ब्वॉय के रूप में कन्हैया कुमार पहचाने जाते रहें हैं।
अभी 28 सितम्बर 2021 के दिन कन्हैया ने सीपीआई छोड़ कर कांग्रेस का दामन थामा है। यदि सही कहा जाय तो आज देश के केंद्र में बीजेपी के सामने कांग्रेस पार्टी के अतिरिक्त कोई भी पार्टी विकल्प के रूप में इस समय नजर नहीं आ रही है। ऐसे में कन्हैया कुमार का कहना है कि विपक्ष की एकजुटता से कांग्रेस में मजबूती आयेगी और जो लोग कह रहे हैं कि विपक्ष कमजोर हो गया है। यह सिर्फ विपक्ष की चिंता की बात नहीं है। यह मैं नहीं कह रहा हूं- कोई शास्त्र, कोई किताब उठाकर देख लीजिए, जब-जब विपक्ष कमजोर हुआ है तो सत्ता ने हमेशा तानाशाही रुख अख्तियार किया है।
आज कन्हैया कुमार की ओर से यह बताने की कोशिश की गई कि देश की कांग्रेस ही एक मात्र ऐसी पार्टी है जो बीजेपी का मुकाबला करने में सक्षम है, इसलिये कांग्रेस को अन्य दलों को मिलकर मजबूत करना होगा। यदि आज देश की सबसे बड़ी पार्टी को नहीं बचाया गया, यानिकि बड़े जहाज को नहीं बचाया गया तो छोटी-छोटी कश्तियां भी नहीं बचेंगी।
कन्हैया कुमार की यह बातें शायद ही किसी क्षेत्रीय दलों को पसंद आये। क्योंकि कई बार इन्हीं दलों की ओर से इस तरह के प्रश्न भी उठाये गये हैं कि कांग्रेस के भीतर नेतृत्व को लेकर असमंजस की स्थिति में पार्टी दिशा हीनता की शिकार है।
इस तरह की बातों के बीच आज सबसे बड़ा प्रश्न यह उठता है कि विपक्ष की अगुवाई वाली बातें तो बाद में होंगी लेकिन आज के समय में कांग्रेस पार्टी की अगुवाई कौन करेगा?
देश की आजादी काल से पूर्व स्वतंत्रता संग्राम की धुरी रहे कांग्रेस पार्टी, आजादी के बाद पूरे देश की एक सबसे बड़ी पार्टी के रूप में उभर कर केंद्र की सत्ता में पूरे 25 वर्षों तक आसीन रही इस पार्टी को कोई सीधी टक्कर देने वाला दूसरी पार्टी नहीं थी, लेकिन आज इस पार्टी की स्थिति यह है कि देश के केवल 9 राज्यों के सत्ता तक सिमट कर रह गयी है।
- जी के चक्रवर्ती







