जय शाह पर आरोप सही है या गलत यह तो अदालत को तय करना है

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दयानंद पांडेय
अमित शाह के बेटे जय शाह पर आरोप सही है या गलत यह तो समय और अदालत को तय करना है । पर इन दिनों बरास्ता द वायर एंड सिद्धार्थ वरदराजन, रोहिणी सिंह सौ करोड़ के मानहानि के मुकदमे के बाबत हर कोई पान कूंच कर थूक रहा है , आग मूत रहा है। लेकिन आज आप को एक आपराधिक मानहानि के मुकदमे का दिलचस्प वाकया बताता हूं।
अस्सी के दशक के उत्तरार्द्ध की बात है । अमृत प्रभात, लखनऊ में एक रिपोर्टर थे शैलेश। कोलकाता से प्रकाशित रविवार में उत्तर प्रदेश के ताकतवर और दबंग वन मंत्री अजित प्रताप सिंह के ख़िलाफ़ एक रिपोर्ट लिखी शैलेश ने । रिपोर्ट के ख़िलाफ़ अजित सिंह ने लखनऊ की एक अदालत में आपराधिक मानहानि का मुकदमा कर दिया, रविवार के संपादक सुरेंद्र प्रताप सिंह भी उस मुकदमें में नामजद हुए। अब वकील वगैरह लगे । खबर की पुष्टि में कुछ तथ्य गलत मिले । शैलेश के सूत्र ने उन्हें प्रमाण के तौर पर जो फोटोकापी सौंपी थी वह फर्जी निकली । सुरेंद्र प्रताप सिंह ने शैलेश से पूछा , अब ? शैलेश से कुछ जवाब देते नहीं बना । अब हर पेशी पर कोलकाता से सुरेंद्र प्रताप सिंह को लखनऊ आना पड़ता था। शैलेश ने आजिज आ कर एक तरकीब निकाली । हर पेशी पर वह अदालत में रहते ही थे । सो हर पेशी की एक रिपोर्ट अमृत प्रभात में लिखने लगे । उस रिपोर्ट में शैलेश लिखते थे कि आज फला मामले की फिर तारीख़ थी । फिर उस रिपोर्ट में पूरी तफ़सील से बताते थे कि कोलकाता से प्रकाशित रविवार ने यह-यह आरोप लगाए हैं ।
रविवार की वह रिपोर्ट जिस ने नहीं पढ़ी थी , वह भी महीने में दो बार अमृत प्रभात में हर तारीख़ के बहाने पढ़ लेता था । दैनिक अख़बार अमृत प्रभात की पहुंच भी बहुत ज़्यादा लोगों तक थी । रविवार की अपेक्षा बहुत ज़्यादा । ख़ास कर अजित प्रताप सिंह के प्रतापगढ़ के चुनाव क्षेत्र तक तो थी ही। मंत्री के ख़िलाफ़ ख़बर के नाते अमृत प्रभात की प्रसार संख्या भी वहां बढ़ गई । अब अजित सिंह तबाह हो गए । सारी दबंगई और सत्ता की ताकत बेअसर हो गई । बुलवाया शैलेश को और पूछा कि आख़िर आप चाहते क्या हैं ? शैलेश ने दो टूक कहा कि , अपना मुकदमा उठा लीजिए , नहीं यह ख़बर तो छपती रहेगी ! हार मान कर अजित सिंह ने रविवार के ख़िलाफ़ आपराधिक मुकदमा चुपचाप वापस ले लिया । बात खत्म हो गई । पर तब वह अमृत प्रभात जैसा अख़बार था , शैलेश जैसा रिपोर्टर था। और अब ?
तब के अख़बार भी तोप मुक़ाबिल नहीं थे । लेकिन आज की तरह भाड़ और मिरासी भी नहीं थे।
(शैलेश बाद के दिनों में नवभारत टाइम्स, लखनऊ गए फिर रविवार के लखनऊ में ही प्रमुख संवाददाता हुए, फिर नवभारत टाइम्स , दिल्ली होते हुए आज तक , ज़ी न्यूज़ होते हुए न्यूज़ नेशन के कर्ताधर्ता बने थे।)

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