पुनर्जन्म के कितने किस्से हमें अनायास ही सुनने को मिल जाते हैं। सुशांत सिंह राजपूत और कृति सैनन स्टारर ‘राब्ता’ के साथ कुछ ऐसा ही हुआ लगता है।
निर्माता दिनेश विजन की बतौर निर्देशक पहली फिल्म है, जो रिलीज से पहले कई कारणों से चर्चा में रही। ‘राब्ता’ फिल्म अमृतसर के स्वर्ण मंदिर से शुरू होती है और वहीं खत्म भी होती है। बीच की सारी कहानी हंगरी की राजधानी बुडापेस्ट में चलती है। शिव (सुशांत सिंह राजपुत) पेशे से बैंकर है। वह बेहद दिलफेेंक किस्म का लड़का है। लड़कियों को देखते ही उनसे फ्लर्ट करना शुरू कर देता है। अचानक उसकी मुलाकात सायरा (कृति सैनन) से होती है और उसे सायरा से प्यार हो जाता है। सायरा भी उससे प्यार करने लगती है। दोनों का प्यार बड़ी तेजी से परवान चढ़ता है और वे भविष्य की योजनाएं बनाने लगाते हैं। इसी बीच परिदृश्य में नौजवान अरबपति कारोबारी जाकिर मर्चेंट यानी जैक (जिम सार्ब) का प्रवेश होता है। एक पार्टी में जैक की मुलाकात सायरा और शिव से होती है। शिव एक हफ्ते के लिए कॉन्फ्रेंस में चला जाता है और जैक अपने चंगुल में सायरा को फंसा लेता है। फिर कहानी पिछले जन्म में पहुंचती है, जिसमें थोड़ी देर के लिए राजकुमार राव 300 साल से ज्यादा के एक मोराकी (फिल्म में दिखाई गई एक प्रकार की पुरानी जनजाति) की भूमिका में दिखते हैं।
फिल्म के तीनों मुख्य किरदारों का राब्ता पिछले जन्म से है और दोनों जन्मों में उनकी कहानी एक जैसी ही चलती है। बस पृष्ठभूमि और कालखंड को छोड़ कर। हां, दोनों जन्मों की कहानी का अंत जरूर अलग है। पहले हाफ में फिल्म थोड़ी ठीक है। सुशांत और कृति की केमिस्ट्री अच्छी लगी है।
फिल्म में कृति सैनन सुंदर लगी हैं, लेकिन उनका अभिनय औसत दर्जे का है, जबकि किरदार में संभावनाएं थीं। जैक सार्ब ठीक हैं, पर उनका हिंदी बोलने का लहजा किसी विदेशी की तरह लगता है। यह जैक के रोल में तो चल जाता है, लेकिन पूर्व जन्म वाले किरदार में थोड़ा खटकता है। वरुण शर्मा अपने परिचित अंदाज में है, लेकिन उनके पास करने के लिए कुछ खास था नहीं।





