नई दिल्ली 26 दिसम्बर। दक्षिण अफ्रीका और जिम्बाब्वे के बीच मंगलवार से शुरू होने वाले एकमात्र दिन-रात्रि टेस्ट मैच में नए नियमों का प्रयोग किया जाएगा। अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट परिषद (आईसीसी) ने क्रिकेट दक्षिण अफ्रीका को चार दिवसीय टेस्ट मैच के आयोजन की अनुमति दे दी है। टेस्ट खेलने के लिए जो मानक नियम हैं, ये उनसे काफी भिन्न होंगे।
यह 1972-73 के बाद पहला टेस्ट मैच होगा जिसके लिए चार दिन का कार्यक्रम तय किया गया है। उससे पहले तक टेस्ट मैच तीन से छह दिनों तक के खेले जाते थे। कुछ टेस्ट मैचों में तो समय की कोई पाबंदी ही नहीं होती थी और उन्हें ‘टाइमलेस टेस्ट’ कहा जाता था। आखिरी टाइमलेस टेस्ट दक्षिण अफ्रीका और इंग्लैंड के बीच डरबन में 1938-39 में खेला गया था। मजेदार बात यह है कि यह मैच दस दिन (इनमें से एक दिन बारिश के कारण खेल नहीं हो पाया था) तक चला, फिर भी ड्रॉ रहा क्योंकि इंग्लैंड की टीम को स्वदेश लौटने के लिए जहाज पकड़ना था।
1972-73 के बाद से सभी टेस्ट पांच दिन के होने लगे। हालांकि ऑस्ट्रेलिया और विश्व एकादश के बीच 2005-06 में खेला गया टेस्ट छह दिन का था, पर यह चार दिन में ही समाप्त हो गया था। दक्षिण अफ्रीका-जिम्बाब्वे के बीच यह मुकाबला आठवां दिन-रात्रि टेस्ट होगा। यह दक्षिण अफ्रीका में खेला जाने वाला इस तरह का पहला मैच होगा। पिछले सात दिन-रात्रि टेस्ट में से चार ऑस्ट्रेलिया में खेले गए।
नियमों में ये हुए हैं बदलाव
मैच चार दिन का होगा जिसमें हर दिन साढ़े छह घंटे का खेल होगा। पांच दिन के मैचों में खेल छह घंटे का होता है। इसमें 90 के बजाय हर दिन 98 ओवर किए जाएंगे। पांच दिनी मैचों की तरह इसमें भी ओवर पूरे करने के लिए आधा घंटा जोड़ा जा सकता है। खेल के पहले दोनों सत्र दो घंटे के बजाय दो घंटे 15 मिनट के होंगे। पहले सत्र के बाद लंच ब्रेक के बजाय 20 मिनट का चायकाल और दूसरे सत्र के बाद 40 मिनट का डिनर ब्रेक होगा। किसी दिन समय बर्बाद होने पर अगले दिन जल्दी मैच करवाने या इस वजह से अधिक ओवर करने का प्रावधान नहीं है।
पांच दिनी मैच में फॉलोऑन 200 रन की बढ़त पर दिया जाता है पर इसमें 150 रन की बढ़त पर दिया जा सकेगा। हर दिन खेल स्थानीय समय के अनुसार दोपहर बाद एक बजकर 30 मिनट पर शुरू होगा







