‘न्यायाधीश ने सख्त होते हुए कहा कि छात्रों को नियंत्रित करने की जिम्मेदारी विवि की होती है न कि कोर्ट। आप छात्रों को नियंत्रित अपने नियम से करिये, छात्रों का इतना बड़ा गुनाह नही कि उन्हें एडमिशन न दिया जाए’
लखनऊ 16 नवंबर। बाबासाहेब भीमराव अंबेडकर विवि, लखनऊ ने विवि की प्रवेश परीक्षा में सर्वोच्च अंक पाने वाले बसन्त कनौजिया सहित अन्य दो छात्रों अश्वनी रंजन व जयवीर को विवि प्रशासन ने एडमिशन देने से मना कर दिया था।
विवि का तर्क था कि उक्त छात्र फेसबुक पर शिक्षकों के खिलाफ टिप्पणियां करते हैं। जबकि पीड़ित छात्रों का कहना है कि जब विवि प्रशासन उनकी बातें नही सुनता और अपने अधिकारों के लिए आवाज उठाते हैं तो उनके ऊपर झूठी FIR दर्ज करवाकर उनकी आवाज दबाने का कार्य करते हैं।
उक्त छात्र विवि में व्याप्त अराजकता और भ्रष्टाचार को लगातार उजागर कर रहे थे इसलिए विवि प्रशासन इन छात्रों को विवि में एडमिशन नही देना चाहते हैं। इस वजह पीड़ित छात्रों ने एडमिशन के लिए माननीय उच्च न्यायालय में गुहार लगाई।

जिसमें माननीय उच्च न्यायालय के आदेश पर विवि प्रशासन ने बसन्त कनौजिया को एडमिशन दे दिया लेकिन दो अन्य छात्रों को लगातार दौड़ाते रहे लेकिन विवि ने दोनों छात्रों को एडमिशन नही दिया। तब छात्रों ने मानसिक रूप से परेशान होकर दोबारा माननीय उच्च न्यायालय के आदेश की अवहेलना पर फिर से उच्च न्यायालय में एडमिशन न देने पर गुहार लगाई।
जिस पर माननीय उच्च न्यायालय ने आदेश की अवहेलना पर कंटेम्प्ट ऑफ कोर्ट जारी कर दिया। जिस पर विवि प्रशासन ने दोबारा छात्रों को एडमिशन ने देने के लिए माननीय उच्च न्यायालय की द्वितीय बेंच में अपील दायर कर दी।
दिनांक 16/11/2017 को मामले की सुनवाई करते हुए माननीय उच्च न्यायालय की सेकंड बेंच ने बाबासाहेब भीमराव अंबेडकर विवि, लखनऊ ने रिट नंबर 22499, बसन्त कनौजिया बनाम यूनियन ऑफ इंडिया पर विवि प्रशासन को लताड़ लगाई। विवि ने प्रदेश सरकार के छात्रों को एडमिशन न देने के लिए सबसे बड़े वकील को हायर किया था।
आज न्यायाल में सुनवाई दौरान माननीय न्यायाधीश ने विवि प्रशासन से सीधा सवाल किया कि क्या ये छात्र कोई आतंकवादी या नक्सली हैं जिस वजह से विवि एडमिशन नही दे रहा है। तब विवि के वकील ने तर्क दिया कि उक्त छात्र फेसबुक पर आपत्तिजनक टिप्पणी करते हैं।
इस पर माननीय न्यायाधीश ने सख्त होते हुए कहा कि छात्रों को नियंत्रित करने की जिम्मेदारी विवि की होती है न कि कोर्ट। आप छात्रों को नियंत्रित अपने नियम से करिये। छात्रों का इतना बड़ा गुनाह नही कि उन्हें एडमिशन न दिया जाए।
माननीय उच्च न्यायालय ने आदेश दिया कि विवि प्रशासन तुरंत एडमिशन दे तथा विवि प्रशासन के जिन अधिकारियों ने कोर्ट के आदेश की अवहेलना की उनको आगामी आने वाली तारीख पर सजा सुनाई जाएगी।
माननीय उच्च न्यायालय ने सख्त लहजे में विवि प्रशासन द्वारा डाली गई छात्रों को एडमिशन न देने वाली याचिका को खारिज कर दिया।







