पाटीदार मामला और GST जैसे मुद्दे गुजरात में बहुत पीछे छूटते हुए भारतीय जनता पार्टी गुजरात में हुए ताजे चुनाव में भारी मतों से विजयी हुई है, वहां पर कुल 182 सीटो में से बीजेपी 99 कांग्रेस 80 अन्य 3 को सीटे ही मिली यदि हम मुख्य रूप से सूरत की बात करें तो वहां पर बीजेपी की भारी जीत दर्ज की है वहीं पर हिमाचल प्रदेश में कुल 68 सीटों में से बीजेपी 43 कांग्रेस 21 अन्य 4 में दो तिहाई बहुमत हासिल की है। गुजरात विधानसभा के लिए चुनाव की तारीखों की घोषणा जब हुई। उस वक्त ऐसा लगा था कि बीजेपी पार्टी ही जीतेगी लेकिन यदि हम एक समाचार पत्र में छपे सात एग्जिट पोल की आंकलन के पूर्वानुमान के अनुसार बीजेपी की बहुमत से जीत होने की बात कही गई थी। एवरेज सीटों की बात करें तो बीजेपी 100 सीटों का आंकड़ा पार कर रही है। उधर, कांग्रेस को 70-80 सीटें मिलने का अनुमान जताया गया था। गुजरात की 182 सीट के लिए दो चरणों में 9 एवं 14 दिसंबर को वोटिंग हुई थी। इस चुनाव में सीधा मुकाबला देश की प्रमुख दो बड़ी पार्टियों में एक बीजेपी एवं कांग्रेस के मध्य था। हालांकि, पाटीदार नेता हार्दिक पटेल, दलित नेता जिग्नेश मेवाणी और ओबीसी नेता अल्पेश ठाकोर ने कांग्रेस जैसे पार्टी के साथ जाने का फैसला किया था, इसी के बाद से अचानक गुजरात में कांग्रेस पार्टी की गतिविधियां तेज हो जाने से एक बार ऐसा लग रहा था कि हो न हो इस बार कांग्रेस बीजेपी को बहुत बड़ी टक्कर देने वाली है।
18 दिसंबर को एक प्रेसवार्ता में बोलते हुए हार्दिक पटेल ने स्पष्ट रूप से बीजेपी की इस जीत को आंकड़ो का खेल बताते हुए EVM मशीन पर ठीकरा फोड़ते हुए यहाँ तक कह दिया कि इविम मशीन टेम्परिंग हो रही है, जब वहां पर उपस्थित पत्रकारों द्वारा टेम्परिंग पर पूछे गए प्रश्न के जबाब में हार्दिक पटेल ने कहा कि समय आने दीजिये हम इस बात को साबित करके रहेंगे, यदि मौजूदा चुनाव में मशीनों की जगह पर वैलेट पेपर बॉक्स का इस्तेमाल किया जाता तो निश्चित तौर पर चुनाव के परिणाम कुछ और ही होते। वहीं पर यदि हम हिमांचल प्रदेश की बात करें वहां पर सत्ता पर काबिज कांग्रेस के हाथों से सत्ता छीन कर बीजेपी सरकार सत्तारुढ़ हुई। अधिकतर पार्टियों के लोगों का ऐसा मानना है कि कही न कहीं पर EVM मशीने में कुछ न कुछ गड़बड़ी अवश्य है नहीं तो जहाँ पर वैलेट बॉक्स में वोट डाले गए वहां पर अधिकतर जगहों पर यातो बीजेपी हारी है या बहुत ही कम वोटो के अंतर से जीत हासिल की है।
जैसा कि हम सभी जानते है कि अभी पिछले ही एक महीने के दौरान नरेंद्र मोदी ने तीन बार गुजरात राज्य का दौरा किया था, वहीं पर कांग्रेस उपाध्यक्ष राहुल गांधी भी कांग्रेस में फिर से जान फूंकने में पूरे जोर शोर से लगे हुए थे, शायद यही कारण है कि गुजरात में 1995 के बाद से पहली बार कांग्रेस की स्तिथि कुछ मजबूत अवश्य हुई हैं। गुरुवार को दूसरे फेज की वोटिंग खत्म होने के बाद शाम को एग्जिट पोल के अनुसार 7 एग्जिट पोल ने बीजेपी की बहुमत से जीत का अनुमान जताया गया था। एक अन्य नियुज चैनल के एग्जिट पोल में बीजेपी के 135 सीटों तक पहुंचने का अनुमान जताया गया था एवं कांग्रेस को 47 सीटें मिलने उम्मीद जताई गई थी।
गुजरात की 182 सीट के लिए दो फेज 9 और 14 दिसंबर को वोटिंग हुई। इस चुनाव में सीधा मुकाबला कांग्रेस और बीजेपी के मध्य था हालांकि पाटीदार नेता हार्दिक पटेल, दलित नेता जिग्नेश मेवाणी और ओबीसी नेता अल्पेश ठाकोर ने कांग्रेस का समर्थन किया था। कांग्रेस अध्यक्ष राहुल गांधी ने दावा किया था कि गुजरात के नतीजे चौंकाने वाले होंगे। भारतीय जनता पार्टी गुजरात राज्य में लगातार 19 वर्षों से सत्ता पर काबिज रहती चली आरही है वर्ष 2014 तक मोदी गुजरात के ममुख्यमंत्री के पद पर आसीन रहे , उनके बाद आनंदीबेन पाटेल वहां की मुख्यमंत्री बनीं। मौजूद समय में अभी विजय रुपाणि वहां के मुख्यमंत्री हैं। गुजरात में वर्ष 2014 में हुए लोकसभा चुनाव में बीजेपी को गुजरात में 60% वोट मिले थे, यानी कि ठीक वैसा ही प्रदर्शन मौजूद समय के चुनाओं में बीजेपी ने पुनः दोहराया।
वर्त्तमान समय में किये गए नोटबंदी का मामला हो चाहे जीएसटी का इन दोनों ही मामलों पर विपक्ष के हाथ केवल निराशा और हताशा ही लगी। मौजूदा हालातों पर जब हम गौर करते है तो हमें यही कहना पड़ता है कि भातीय जनता पार्टी गुजरात के अलग-अलग हिस्सों के भौगोलिकता के हिसाब से एक विशेष रणनीति के तहत काम में लगी हुई थी और इस राज्य के अनेक क्षत्रो में अपनी पकड़ को और मजबूत करने के लिए यूपी के सीएम योगी आदित्यनाथ को भी गुजरात के गौरव यात्रा में शामिल किया। उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्य नाथ की इस यात्रा में मौजूद रहने के कारणों को जानने, से पहले ये समझना आवश्यक है कि आदित्यनाथ यहाँ पर एक जन सभा को संबाधित करते हुए उन्होंने राहुल पर जम कर निशाना साधते हुए यह कहा था कि राहुल गांधी ने यहाँ तक तो अपने संसदीय क्षेत्र अमेठी को विकसीत करने के लिए कुछ भी नहीं किया। उत्तर प्रदेश के सीएम ने अपने भाषण को हीआगे बढ़ाते हुए कहा था कि पिछले 41 वर्षों से कांग्रेस ने सरदार पटेल को भारत रत्न नहीं दिया। जब कि अटल बिहारी वाजपेयी देश के प्रधानमंत्री बने तो उन्होंने इस मुद्दे को उठाया। कांग्रेस ने हमेशा देश से लिया है दिया कुछ भी नहीं। लेकिन वहीं पर यदि मोदी सरकार कि बात करें तो भ्रष्टाचार, कालाबाजारी से लेकर ब्लैक मनी के खिलाफ कई सख्त कदम उठाए है। अब बारी है गुजरात में विकास की गंगा बहाने की उसमे भाजपा कहाँ तक सफल होगी यह तो आने वाला भविष्य ही तय करेगा।
जीके चक्रवर्ती (लेखक वरिष्ठ पत्रकार है)








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