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    Home»ज़रा हटके

    विज्ञान के आगे आज भी सवाल खड़े करती ‘रूपकुंड झील’?

    By January 7, 2018 ज़रा हटके No Comments4 Mins Read
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    imaging:shagunnewsindia.com
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    ख़ूबसूरती के साथ बहुत डरावनी है ‘कंकाल झील’

    भारत में ऐसे कई रहस्य हैं जिसके आगे विज्ञान ने भी हाथ खड़े कर रखे हैं, क्योंकि इन अनोखे रहस्यों का पता लगाने में साइंस और टेक्नोलॉजी आज भी पीछे है। इन्ही रहस्यों में से एक रूपकुंड झील भी है जहां आज भी झील के तल से आये दिन मानव कंकाल निकलते हैं। ऐसी रहस्यमयी जगह से मानव कंकाल का निकलना मानव विज्ञान के लिए आज भी चुनौती साबित हो रही है अनेक तांत्रिकों बाबाओं के अलावा वैज्ञानिकों और शोधकर्ताओं ने इस शोध किये लेकिन सच क्या है कोई पता नहीं लगा पाया हलाकि सभी के मत अलग अलग हैं। रूपकुंड नाम की यह झील तैरते हुई कंकालों के लिए जानी जाती है। इस झील के बारे में यह भी कहा जाता है की वहां जाने वाले कभी वापस नहीं आते।

    कंकाल निकलने के बाद चर्चा में आयी झील:

    उत्तराखंड राज्य में स्थित एक हिम झील है जो अपने किनारे पर पाए गये पांच सौ से अधिक कंकालों के कारण प्रसिद्ध है। यह स्थान निर्जन है और हिमालय पर लगभग 5029 मीटर (16499 फीट) की ऊंचाई पर स्थित है। पर्यटन की दृष्टि से रूपकुंड, हिमालय की गोद में स्थित एक मनोहारी और खूबसूरत पर्यटन स्थल है, यह हिमालय की दो चोटियों त्रिशूल (7120 मीटर) और नंदघुंगटी (6310 मीटर). के तल के पास स्थित है।रूपकुंड, बेदनी बग्याल की अल्पाइन तृणभूमि पर प्रत्येक पतझड़ में एक धार्मिक त्योहार आयोजित किया जाता है जिसमें आसपास के गांवों के लोग शामिल होते हैं।

    इसे कंकाल रूपकुंड या कंकाल झील भी कहते है

    कंकाल झील वर्ष के ज्यादातर समय बर्फ से ढकी हुई रहती है। यहाँ जाने पर एक सुखद अनुभव होता है लेकिन जब से यहाँ नरकंकाल मिलने का सिलसिला शुरू हुआ उसके बाद से लोग डर गये। बताया जाता है की इन कंकालों को 1942 में नंदा देवी शिकार आरक्षण रेंजर एच. के. माधवल, ने खोज निकाला, यद्यपि इन हड्डियों के बारे में आख्या के अनुसार वे 19वीं सदी के उतरार्ध के हैं। इससे पहले विशेषज्ञों द्वारा यह माना जाता था कि उन लोगों की मौत महामारी भूस्खलन या बर्फानी तूफान से हुई थी।

    1960 के दशक में एकत्र नमूनों से लिए गये कार्बन डेटिंग ने अस्पष्ट रूप से यह संकेत दिया कि वे लोग 12वीं सदी से 15वीं सदी तक के बीच के थे। रूपकुंड झील जहां आज भी निकलते हैं कंकाल रूपकुंड या कंकाल झील भारत के उत्तराखंड राज्य में स्थित एक हिम झील है जो अपने किनारे पर पाए गये पांच सौ से अधिक कंकालों के कारण प्रसिद्ध है। यह स्थान निर्जन है और हिमालय पर लगभग 5029 मीटर (16499 फीट) की ऊंचाई पर स्थित है। पर्यटन की दृष्टि से रूपकुंड, हिमालय की गोद में स्थित एक मनोहारी और खूबसूरत पर्यटन स्थल है, यह हिमालय की दो चोटियों त्रिशूल (7120 मीटर) और नंदघुंगटी (6310 मीटर). के तल के पास स्थित है।

    यहां पाये गए कंकालों पर कई तरह के अध्ययन किये गए हैं खोपड़ियों के फ्रैक्चर के अध्ययन के बाद, हैदराबाद, पुणे और लंदन में वैज्ञानिकों ने यह निर्धारित किया कि लोग बीमारी से नहीं बल्कि अचानक से आये ओला आंधी से मरे थे। कहा जाता है कि ये ओले, क्रिकेट की गेंदों जितने बड़े थे, और खुले हिमालय में कोई आश्रय न मिलने के कारण सभी मर गये होंगें। आज भी वहां मरे हुए लोगो की आवाज़ गूंजती है। यह जगह डरावनी होने के कारण यहां बेहद कम लोग आते हैं।

    सवाल आज भी वहीं: इतनी भारी संख्या में क्यों मिले कंकाल?

    यहां अब तक जिस रहस्य से पर्दा नहीं उठा सका है वो ये है कि आखिर ये लोग इस सुनसान जगह पर क्या कर रहे थे क्योंकि उस समय यहां आस पास में कोई बस्ती भी नहीं थी? हालांकि कुछ शोधकर्ताओं का मानना है कि ये सभी लोग तिब्बत जा रहे थे व्यापार करने क्योंकि उस समय तिब्बत व्यापार का मुख्य केंद्र हुआ करता था।

    एक कथा यह भी है प्रचलित:

    इस झील को लेकर अनेक कहानियां हैं। मगर वहां नजदीक गांव के रहने वाले लोगो का कहना है की कुछ हज़ार साल पहले यहां एक राजा जसधावल अपनी पत्नी के मां बनने के ख़ुशी में वह बड़े धूम धाम से मां नंदा देवी की तीर्थ यात्रा पर निकले थे। राजा के राज्य के स्थानीय पंडितों ने राजा को इतने भव्य समारोह के साथ देवी दर्शन जाने को मना किया मगर राजा ने उनकी एक न सुनी और जो हुआ वह किसी ने सोचा न था। सब कहते है की जोर-शोर के समारोह से देवी नाराज़ हो गईं और सबको मौत के घाट उतार दिया। झील में ऐसी मौत होने के कारण लोग कहते है की आज भी उनकी आत्माए यहां भटक रही है।

    #india #Roopkundjheel Uttrakhand

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