जज शिवपाल सिंह ने खुद जिलाधिकारी से न्याय मांगा, लेकिन समस्याएं दूर नहीं हुई
रांची, 10 जनवरी। क्या आप जानते हैं कि चारा घोटाले में देवघर कोषागार से अवैध निकासी में राजद सुप्रीमो लालू प्रसाद यादव को जेल की सजा सुनाने वाले जज शिवपाल सिंह को अपने पैतृक गांव में न्याय पाने के लिए कितना परेशान होना पड़ा था और फिर भी उन्हें न्याय नहीं मिला था। इसके बाद स्थिति कुछ ऐसी पलटी कि कुछ समय पूर्व ही न्याय मांगने पर उन्हें कानून का ज्ञान हासिल करने की नसीहत देने वाले जिले के अधिकारियों को लालू को बरी करने के लिए उनसे सिफारिश करनी पड़ी थी, जिसे जज ने अनसुना कर दिया। सिफारिश करने वालों में जालौन के डीएम भी शामिल थे।
सीबीआइ की विशेष अदालत के जज शिवपाल सिंह उत्तर प्रदेश के जालौन जिले के शेखपुर खुर्द गांव के निवासी हैं। गांव में कुछ लोगों ने उनकी जमीन पर कब्जा जमा लिया था। विरोध करने पर उनके भाई सुरेंद्र पाल सिंह के खिलाफ मुकदमा दर्ज करा दिया गया। विरोधी जमीन पर कब्जा कर खेती कर रहे हैं। साथ ही जबरन जमीन से चक रोड निकाल दिया। जज शिवपाल सिंह ने खुद जिलाधिकारी से न्याय मांगा, लेकिन समस्याएं दूर नहीं हुई।
छह नवंबर, 2015 को वहां के तत्कालीन एसडीएम ने जमीन को मुक्त कराने का निर्देश दिया था। इसके बाद बीडीओ और ग्राम प्रधान की उपस्थिति में 1700 रुपए का पत्थर लगवाया गया। इसे भी विरोधियों ने उखाड़कर फेंक दिया। एसडीएम, तहसीलदार, सीओ और कोतवाल ने कोई कार्रवाई नहीं की तो जज ने डीएम से मदद मांगी, लेकिन उन्हें न्याय नहीं मिला। 12 दिसंबर, 2017 को डीएम और एसपी से शिकायत की तो डीएम ने कहा कि आप झारखंड में जज हैं न, आप कानून पढ़कर आएं। उन्होंने यह भी कहा कि वे एसडीएम के आदेश को नहीं मानेंगे।
सूत्रों के अनुसार, बिहार के पूर्व मुख्यमंत्री व राजद के राष्ट्रीय अध्यक्ष लालू प्रसाद को बचाने के लिए जालौन के डीएम व एसडीएम ने सिफारिश की थी। सीबीआइ के विशेष न्यायाधीश शिवपाल सिंह को 23 दिसंबर, 2017 को फोन कर बताया कि आप ही लालू का केस देख रहे हैं, जरा देख लीजिएगा। दिलचस्प तथ्य यह है कि जिस डीएम ने शिवपाल सिंह को झारखंड में कानून पढ़कर आने की नसीहत दी थी, उन्होंने ही फोन कर लालू को बचाने की सिफारिश जज से की। जज को फोन करने वाले डीएम का नाम डॉ. मन्नान अख्तर है। एसडीएम भैरपाल सिंह ने भी सिफारिश के लिए संपर्क साधा।
हालांकि जज ने किसी की सिफारिश या दबाव पर ध्यान नहीं दिया। उधर डीएम, जालौन डॉ. मन्नान अख्तर का कहना है कि दोनों मामलों में मैंने कुछ नहीं कहा है, किसी भी वरिष्ठ और न्यायायिक अधिकारी से मैं इस तरह की बात कह ही नहीं सकता। वहीं एसडीएम, जालौन भैरपाल सिंह का कहना है कि दीपावली से पहले जब वह आए थे तभी मुलाकात और बात हुई थी। उनसे केवल खेत के संबंध में ही बात की गई। इसके अलावा कोई और बात नहीं हुई है।







