हाई प्रोफाइल अडानी ग्रीन एनर्जी, सहर्स धारा, सुधाकर, अवध, टेक्निकल एसोसिऐट के सोलर प्रोजेक्ट के निरस्तीकरण नोटिस पर सुनवाई कल
उप्र में इन्वेस्टर सबमिट के पहले निजी घराने दबाव बनाकर उप्र में फिर एक बार महंगे सोलर पावर प्रोजेक्ट लगाने की जुगाड में हैं सक्रिय
मंहगी सोलर पावर की दरों के खिलाफ उपभोक्ता परिषद अध्यक्ष ने शुरू की लामबंदी आयेाग अध्यक्ष से मिलकर सुनवाई के पहले जताया अपना विरोध
लखनऊ,11 जनवरी। उत्तर प्रदेश में इन्वेस्टर सब्मिट के पहले ऊर्जा क्षेत्र में कार्यरत सोलर पावर के निजी घराने अपनी लामबंदी के तहत जहाॅं दबाव बनाने में सक्रिय हैं और जिन्हें पूर्व में पावर कारपोरेशन ने नोटिस थमा दिया था अब वह फिर लामबंदी के तहत पावर कारपोरेशन पर पूरा दबाव बना लिये है और आयोग से एक बार फिर अपने पक्ष में निर्णय कराने पर आमादा है।
उत्तर प्रदेश पावर कार्पोरेशन द्वारा नवम्बर, 2017 में जिन 6 सोलर पावर प्रोजेक्ट मे. अडानी ग्रीन 50 मेगावाट, टेक्निकल एसोसिएट 10 मेगावाट, मे. सहर्स धारा एनर्जी 5 मेगावाट, मे. पेनायकल 5 मेगावाट मे. अवध रबर 5 मेगावाट मे. सुधाकर इनफ्राटेक 5 मेगावाट को निरस्तीकरण का नोटिश दिया गया था इन सभी 6 निजी घरानों द्वारा उत्तर प्रदेश विद्युत नियामक आयोग में निरस्तीकरण के खिलाफ दाखिल याचिका पर कल आयोग सुनवाई करने जा रहा है वही दूसरी ओर उप्र राज्य विद्युत उपभोक्ता परिषद जो सोलर पावर की एडाप्सन आफ टैरिफ की याचिका में आपत्तिकर्ता रहा है वह इन मंहगे सोलर पावर प्रोजेक्टों के खिलाफ अपनी लामबंदी तेज कर दी है।
गौरतलब है कि विगत दिनों पावर कारपोरेशन व सरकार के दबाव में पहले ही आयोग द्वारा सोलर पावर की दर रूपया 7.02 प्रति यूनिट जो बहुत अधिक है पर अपनी सहमति दी जा चुकी है अब यह सभी 6 निजी घराने भी इसी दर पर अपने प्रोजेक्ट को प्रदेश में लगाकर बडा लाभ कमाना चाहते हैं। ऐसे में अब आयेाग को प्रदेश की जनता के हितों में मंहगे प्रोजक्टों केा अविलम्ब खारिज कर देना चाहिये।
उप्र राज्य विद्युत उपभोक्ता परिषद के अध्यक्ष अवधेश कुमार वर्मा ने आज उप्र विद्युत नियामक आयोग के चेयरमैन श्री एस के अग्रवाल से मुलाकात कर प्रदेश में मंहगे सोलर पावर हाउसों के पीपीए (पावर परचेज एग्रीमेन्ट) को निरस्त करने की पुरजोर मांग की है। उपभोक्ता परिषद ने आयोग के सामने यह तथ्य रखा कि पूरे देश में सोलर पावर की दरें वर्तमान में रूपया 2.44 प्रति यूनिट से रूपया 4 प्रति यूनिट के बीच में आ गयी है ऐसे में पावर कारपोरेशन द्वारा जिन 6 सोलर प्रोजेक्ट लगाने वाले निजी घरानों के निरस्तीकरण नोटिस पर आयेाग कल सुनवाई करने जा रहा है।
तब तक उनके निरस्तीकरण याचिका पर कोई निर्णय न लिया जाये। जब तक उन सभी के द्वारा वर्तमान दर रूपया 2.44 प्रति यूनिट से रूपया 4 प्रति यूनिट के बीच अपनी सहमति न दी जाये। और सबसे बडा सवाल यह है कि जब नवम्बर 2017 में पावर कारपोरेशन द्वारा सभी 6 सोलर पावर प्रोजेक्ट की याचिका को खारिज करने की मांग इस आधार पर उठायी है कि पावर कारपोरेशन सभी को निरस्तीकरण का नोटिस दे चुका है तो ऐसे में आयोग को इस महत्वपूर्ण पहलू पर भी ध्यान देना चाहिये। जब बिजली खरीदने वाला ही बिजली इन सभी से खरीदने को तैयार नही है तो ऐसे में आयोग क्यों याचिकाओं पर विचार कर रहा है?
नियामक आयोग अध्यक्ष श्री एस के अग्रवाल ने उपभोक्ता परिषद अध्यक्ष को यह आश्वासन दिया कि कल होने वाली सुनवाई मे उपभोक्ता परिषद द्वारा उठाये गये सभी मुददों पर आयोग गंभीर है। आयेाग निरस्तीकरण नोटिस पर विचार करने के पहले इस पहलू पर अवश्य विचार करेगा कि वर्तमान में किसी भी सोलर प्रोजेक्ट की दर मार्केट रेट से ज्यादा किसी भी सूरत में न हो।







