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जी के चक्रवर्ती
अभी मौजूदा समय के पिछले 10 जनवरी 2018 बुधवार के दिन हुई कैबिनेट की एक बैठक में वर्त्तमान सरकार ने देश में प्रत्यक्ष विदेशी निवेश (एफडीआई) के नियमों में ढ़ील दी है। सरकार ने सिंगल ब्रांड रिटेल में 100 प्रतिशत प्रभावी विदेशी निवेश एफडीआई को मंजूरी दे दी है। इसके साथ ही निर्माण एवं विमानन क्षेत्र में भी एफडीआई नियमों को आसान कर दिया गया है। केंद्र सरकार की ओर से एफडीआई के नियमों में ढ़ील को आर्थिक सुधारों की दिशा में उठाये जाने वाले एक महत्त्व एवं प्रभावी कदम माना जा रहा है। किसी एक देश की कंपनी द्वारा दूसरे देश में किया गया निवेश को प्रत्यक्ष विदेशी निवेश (फॉरेन डाइरेक्ट इन्वेस्टमेन्ट / एफडीआई) कहलाता है।
ऐसे निवेश से निवेशकों को दूसरे देश की उस कंपनी के प्रबंधन में कुछ हिस्सा हासिल हो जाता है जिसमें उसका पैसा लगता है। आमतौर पर यह माना जाता है कि किसी निवेश को एफडीआई का दर्जा दिलाने के लिए कम-से-कम कंपनी में विदेशी निवेशक को 10 फीसदी शेयर खरीदना आवश्यक है। इसके साथ उसे निवेश वाली कंपनी में मताधिकार भी हासिल करना पड़ता है।
यदि हम FDI की बात करे तो हमें यह याद होगा कि इसी FDI के मामले में एक समय जब केंद्र की सत्ता का बागडोर कांग्रेस के हाथों में थी एवं उस वक्त मौजूदा सरकार के प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी स्वमं गुजरात के मुख्यमंत्री थे उन्होंने कांग्रेस द्वारा FDI पर लिए गए निर्णयों के विरुद्ध बोलते हुए यह कहा था कि कांग्रेस की विदेशी सरकार देश के खुदरा क्षेत्र को विदेशियों के हवाले करने जा रही है। वहीं पर उद्योग चैंबर भारतीय वाणिज्य एवं उद्योग मंडल (एसोचेम) के अनुसार रिटेल क्षेत्र में विदेशी कंपनियों के आने से किसानों एवं ग्राहकों दोनों को होने वाले फायदों को बताने के उद्देश्य से संपूर्ण देश में सौ बैठकों का सिलसिला शुरू करने जा रही है।
एसोचैम की तैयारी कितनी बड़े रूप में है, इसे इस बात से ही अंदाजा लगाया जा सकता है कि इस अभियान को आगे बढ़ाने के लिए उसने अपने दस पूर्व अध्यक्षों को सम्मिलित कर एक समिति का निर्माण किया है। जिस समिति में देश के एक से बढ़कर एक दिग्गज उद्योगपतियों को शामिल किया गया हैं। इस अभियान को वाणिज्य व उद्योग मंत्री आनंद शर्मा का वर्दहस्त प्राप्त है।
इस कदम से जहां एक ओर ईज ऑफ डूइंग बिजनेस इंडेक्स में सुधार आने की उम्मीदें कायम हुई है तो वहीं दूसरी ओर इस फैसले से एफडीआई के बड़े प्रवाह, निवेशें को प्रोत्साहन मिलने के साथ ही साथ रोजगार एवं आय जैसे विपक्षों के आक्षेपों को निराधार साबित करने के अलावा रोजगार को बढ़ावा देने वाला सिद्ध होगा।
कैबिनेट द्वारा किये गए इस फैसले के अनुसार सिंगल ब्रांड रिटेल में अब स्वचालित रास्तों से सौ फीसदी तक एफडीआई निवेश किया जा सकेगा। हालांकि सरकार के इस फैसले पर त्वरित टिप्पणी में व्यापारिक संगठन कन्फेडेरेशन ऑफ ऑल इंडिया ट्रेडर्स (कैट) ने इस पर इस निर्णय पर अप्रसन्नता व्यक्त किया।
कैबिनेट में हुए अन्य फैसलों में सरकारी हवाईअड्डे एयर इंडिया में विदेशी हवाई कंपनी की ओर से 49 फीसद निवेश को मंजूरी दी गई है। यह निवेश एयर इंडिया द्वारा किये गए अनुमोदन के रास्ते से किया जा सकेगा, जिसकी अधिकतम सीमा 49 फिसदी तक ही होगी।
वहीं पर कन्फेडेरेशन ऑफ ऑल इंडिया ट्रेडर्स (कैट) द्वारा की गई प्रतिक्रिया में सरकार द्वारा स्वचालित मार्ग से सिंगल ब्रांड रिटेल में 100 फीसद एफडीआई की मंजूरी के फैसले की शख्त विरोध किये जाने के अलावा इस फैसले पर देश के व्यापारियों ने भी अपनी असहमति जाहिर की है। कन्फेडेरेशन ऑफ ऑल इंडिया ट्रेडर्स (कैट) जैसे संगठन का मत है कि यह भारत के खुदरा क्षेत्र के व्यापार में बहुराष्ट्रीय कंपनियों के सुगम प्रवेश की सुविधा प्रदान करेगा। कैट की ओर से दिये गए एक वकत्व्य में यह भी कहा गया है कि यह फैसला भाजपा के चुनावी वादे का सरासर उल्लंघन है। उन्होंने कहा कि यह देश के छोटे कारोबारियों के एक गंभीर मसला है।
संगठन के महासचिव इस पर दुख व्यक्त करते हुए बताया कि वर्त्तमान समय में खुदरा व्यापार के कल्याण, उन्नयन और आधुनिकीकरण के लिए नीतियों को तैयार करने के बजाय भारत सरकार की बहुराष्ट्रीय कंपनियों के लिए भारत के खुदरा क्षेत्र में व्यापार के लिए आमंत्रण एवं प्रभावी होने के लिए रास्ता तैयार करने में जैसी ही बात है।
(लेखक वरिष्ठ पत्रकार है)