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    Home»मीडिया

    उप्र संवाददाता समिति का चुनाव नहीं आपकी जिंदगी और मौत का सवाल है!

    By March 27, 2018 मीडिया 1 Comment5 Mins Read
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    नवेद शिकोह

    लखनऊ, 27 मार्च। ऐसे को चुनिए जो आपका अखबार, रोजगार और रोजी-रोटी बचा सके। उत्तर प्रदेश के कुल अखबारों में 90% मंझोले और छोटे अखबार हैं। मैं इस वक्त इन गैर ब्रांड मंझोले और छोटे लोकल अखबारों से जुड़े पत्रकारों से मुखातिब हूं। आपको पता होगा, कुछ दिनों बाद आपकी जिन्दगी उजड़ जाने का खतरा बना हुआ है। 90% अखबार बंद होने वाले है। यानी 90%पत्रकारों/अखबार कर्मियों और छोटे प्रकाशकों की रोजी-रोटी बंद होने वाली है। इस उम्र में आप दूसरे किसी पेशे में नहीं जा सकते।

    1. आपके घर के चूल्हे बुझने वाले हैं।
    2. आपके बच्चों के मुंह का निवाला छिनने वाला है।
    3. आप अपने बच्चों के स्कूल की फीस नहीं दे सकेंगे।
    4. आप अपनी मां की दवा कैसे लाओगे?
    5. आप अपने घर की बिजली का बिल कैसे जमा करोगे?
    6. जब 90%अखबार बंद हो जायेंगे तो अपको कहीं दूसरी जगह भी नौकरी कैसे मिलेगी?
    7. आपके बुनियादी खर्च कैसे पूरे होंगे !
    8. डीएवीपी की सख्त नीतियों से आपका अखबार बंद हो जायेगा।
    9. जीएसटी का हिसाब आपके अखबार कैसे देंगे?
    10. दो वक्त की रोटी देने वाले आपके छोटे अखबार मामूली सरकारी विज्ञापन दरों के लिए पच्चीस हजार प्रसार के दावे पर कायम रहेंगे तो इंकमटैक्स के दो नोटिस के बाद आप जेल चले जाओगे।
    11. वास्तविक यानी दो-तीन हजार प्रसार कर दोगे तो अखबार से रूखी-सूखी रोटी का इंतजाम तो दूर अखबार छाप भी नहीं पाओगे। तुम्हारी प्रेस मान्यता खत्म हो जायेगी और खबर निकालने के तमाम रास्ते भी बंद हो जायेंगे।
    12. तुम जैसे हजारों मुसीबत के मारों का ये दर्द और ये मजबूरी सरकार तक कायदे से पंहुच जाये तो शायद सरकार कोई रास्ता निकाले।
    13. लेकिन इस दिशा में संगठित होकर योजनाबद्ध तरीके से कोशिश हुई ही कहां। तुम संगठित ही कहा हो पाये।
      पत्रकारों के मजबूत संगठन तुम्हारी बेबसी से वाकिफ तक नहीं हैं। निस्तारण, समाधान और कोशिशे तो बहुत दूर की बात हैं।
    14. उत्तर प्रदेश भारत की सियासत की धुरी है। इस सरजमीं से ही प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और वित्त मंत्री अरुण जेटली निर्वाचित हैं। केन्द्र में मोदी सरकार बनवाने में यूपी वासियों का सबसे बड़ा योगदान रहा। पड़ाकर की पत्रकारिता के संस्कारों वाली यहां की पत्रकारिता और पत्रकारों की बड़ी अहमियत है।
    15. राज्य मुख्यालय की मान्यता प्राप्त संवाददाता का बड़ा रुतबा होता है। सैकड़ों संवाददाताओं द्वारा चुनी गयी मान्यता प्राप्त संवाददाता समिति एक बड़ी ताकत है। ये समिति आपकी बात /समस्याओं और जायज मांगों को सरकार तक प्रभावी ढ़ग से रख सकती है। केंद्र सरकार से लेकर प्रदेश सरकार तक संवाददाता समिति आपके हक की लड़ाई लड़े तो शायद कोई रास्ता निकल आये।
    16. 25 हजार के नीचे प्रसार तक के सिंगल एडीशन वाले अखबारों(न्यूज प्रिंट) को पूरी तरह से जीएसटी मुक्त कर दिया जाये।
    17. ये ना हो सके तो दो हजार के अंदर के प्रसार की न्यूनतम दरों को दस रूपये तक कर दिया जाये।
      यूपी सरकार राज्य मुख्यालय की मान्यता के लिए 25 हजार से ज्यादा प्रसार की बाध्यता खत्म कर दे।
      अगर इनमें से कुछ भी नहीं करा पाते हैं तो हमारा अस्तित्व मिटना तय है।
    18. अखबारों की जिन्दगी और अखबार कर्मियों के रोजगार के गले तक कड़े फैसलों की तलवार पंहुच चुकी है। इत्तेफाक कि इस वक्त ही राज्य मुख्यालय संवाददाता समिति के चुनाव में तुम अपना नेता चुनने जा रहे हो।
    19. अच्छा इत्तेफाक ये है कि मौजूदा वक्त की भाजपा सरकारें गरीबों, दबे-कुचलों, किसानो, मजदूरों, शोषितों, बुद्धिजीवियों और मध्यम वर्गीय आम इंसानों के साथ पूरा न्याय करती हैं। मोदी और योगी सरकारें हर संभव प्रयासों में लगी हैं कि अधिक से अधिक रोजगार के अवसर प्रदान किये जायें। हम अपनी जायज मांग को प्रभावी ढंग से सरकार तक पहुंचेगे तो हमारे रोजगार को बचाने के लिए सरकार कोई रास्ता जरुर निकालेगी।
    20. इसलिए आपको अपने ऐसे पत्रकार नेताओं का चयन करना है जो आपकी उजड़ती जिन्दगी को बचाने में सक्षम हो। आपके रोजगार, आपकी पत्रकारिता, आपकी रोजी-रोटी के जरिये को बचाने के लिए जो कड़ा संघर्ष करे। जो आपकी परेशानियों को समझे।
    21. आपको आपके रोजगार का वास्ता, आपको आपकी रोटी का वास्ता, आपको आपके बच्चे के स्कूल की फीस का वास्ता, आपको आपकी मां की दवाई का वास्ता… इस चुनाव में ऐसे पत्रकारों को अपना प्रत्याशी बना कर जिताना जो आपकी इतनी बड़ी समस्याओं को सुलझाने के लिए दिनों-रात जी जान से मेहनत करे। आपके साथ कंधे से कंधे मिलाकर आपके हक की लड़ाई लड़े। जो छोटे अखबारों को जीएसटी से मुक्त कराने की कोशिश में दिल्ली की खाक छाने।
    22. जीएसटी मामले में सफलता ना मिलने पर दो-तीन हजार प्रसार की विज्ञापन दरों को बढ़वाने के प्रयास करे।
      जो यूपी में राज्य मुख्यालय प्रेस मान्यता के लिए 25 से ज्यादा प्रसार होने की बाध्यता खत्म कराने की हर संभव कोशिश करे।
    23. यदि किसी अखबार का प्रसार 25 से नीचे कर लिया जाये तो डीएवीपी, नियमित और सूचीबद्ध अखबारों से राज्य मुख्यालय की मान्यता बरकरार रहे।
      अपने विवेक का इस्तेमाल करिये। जाति-धर्म, छोटा पत्रकार – बड़ा पत्रकार।…
      कुछ मत देखिएगा। किसी के झूठे वादों और झूठी बातों में बिलकुल मत आइयेगा।
      अपनी बुद्धि का इस्तेमाल करियेगा। सोच समझकर-परखकर योग्य प्रत्याशी उतारये। या योग्य प्रत्याशी को अपना नेता चुनिए।
      ये वक्त बहुत ही नाजुक है।
      ये चुनाव नहीं, आपकी जिन्दगी और मौत का सवाल है।

    #Media

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    1 Comment

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