लुधियाना, 31 मार्च। पंजाब के लुधियाना की रहने वाली 44 साल की रजनी बाला ने अपने बेटे के साथ 10वीं क्लास के बोर्ड एग्जाम दिए हैं। रजनी ने साल 1989 में 9वीं क्लास पास की थी, पर तब पारिवारिक मजबूरियों के चलते उन्हें शिक्षा को छोड़ना पड़ा है। लेकिन रजनी ने अपने मजबूत इरादों को जिंदा रखा और 21 साल बाद 10वीं क्लास के एग्जाम दिए। रजनी की शादी हो चुकी है और वह तीन बच्चों की मां हैं। रजनी सिविल हॉस्पिटल में अटेंडेंट का काम करती हैं। रजनी को 10वीं क्लास पास होने के महत्व का पता चलते ही उन्होंने ये एग्जाम देने का फैसला किया।
रजनी का कहना है कि मेरे पति कई साल से मुझे अपनी शिक्षा पूरी करने के लिए कहा रहे थे। मेरे तीन बच्चे हैं और मुझे उन्हें पढ़ाना है। हालांकि में सिविल हॉस्पिटल में अटेंडेंट की नौकरी कर रही हूं, पर मुझे 10वीं क्लास पास होनी की अहमियत मालूम चली। फिर मैंने अपने बेटे के साथ ही 10वीं की तैयारी शुरू कर दी। मैं और मेरा बेटा स्कूल साथ जाते थे और साथ ही पढ़ाई करते थे। रजनी के लिए 10वीं के एग्जाम देना आसान नहीं रहा।
उन्हें पढ़ाई के साथ अपनी नौकरी और घर को भी संभालना पड़ा। रजनी सुबह जल्दी उठ जाती थीं और अपने परिवार के लिए खाना बनाती थीं। रजनी को इस फैसले में परिवार और स्कूल का खूब साथ मिला। रजनी ने कहा कि ‘मेरी सास पढ़ी-लिखी नहीं है, पर उन्होंने मेरी पढ़ने के लिए हौसला अफजाई की। मेरे पति मुझे पढ़ाने के लिए जल्दी उठ जाते थे। मेरी बेटियों ने भी मुझे पढ़ाई की। अब मैं ग्रेजुएशन करना चाहती हूं। रजनी के बेटा भी अपनी मां के साथ ही ग्रेजुएशन करना चाहता है। रजनी के पति ने कहा है कि आज के दिन एजुकेशन पूरी करना बेहद जरूरी है। रजनी के पति ने खुद १७ साल बाद अपनी ग्रेजुएशन पूरी की है।







