- 5 शहरों व 7 जनपदों में निजीकरण के खिलाफ वर्क टू रूल के तहत आन्दोलन जारी निजीकरण के फैसले पर पुनर्विचार करने की एसोसिएशन ने मांग दोहरायी।
- निजीकरण के विरोध में आन्दोलन के कारण करोड़ों, अरबों के राजस्व वसूली का कार्य ठप एवं अनुरक्षण का कार्य भी प्रभावित।
लखनऊ, 30 मार्च। निजीकरण के विरोध में उप्र पावर आफीसर्स एसोसिएशन की प्रान्तीय कार्य समिति की बैठक में आज निजीकरण के विरोध में चल रहे आन्दोलन की समीक्षा की गयी और एसोसिएशन के सभी सदस्यों द्वारा वर्क टू रूल के तहत नियमानुसार कार्य किया जा रहा है। एसोसिएशन के सदस्यों को पुनः निर्देशित किया गया कि आन्दोलन में सक्रिय भाग लेकर अपनी पूरी ताकत दिखाकर सरकार को यह दिखा दें कि निजीकरण का फैसला लागू कराना सरकार के लिये पूरी तरह असंभव साबित होगा।
वर्क टू रूल के उपरान्त 9, 10 व 11 अप्रैल को पूरे प्रदेश में पूर्ण कार्य बहिष्कार किया जायेगा। इस दौरान यदि किसी कार्मिक के खिलाफ कार्पोरेशन प्रबन्धन द्वारा कोई अप्रिय कार्यवाही की गयी तो उसी समय से अनिश्चित कालीन कार्य बहिष्कार कर दिया जायेगा, जिसकी पूर्ण जिम्मेदारी कार्पोरेशन प्रबन्धन की होगी। इस आन्दोलन को सफल बनाने के लिये क्षेत्रीय इकाईयों के पदाधिकारियों से लगातार सम्पर्क किया जा रहा है। एसोसिएशन ने मुख्यमंत्री जी पूरे मामले पर हस्तक्षेप की मांग दोहरायी।
उप्र पावर आफिसर्स एसोसिएशन के कार्यवाहक अध्यक्ष अवधेश कुमार वर्मा, अति. महासचिव अनिल कुमार, सचिव आरपी केन, संगठन सचिव, अजय कुमार, पीपी सिंह, अजय कनौजिया, आनन्द कनौजिया, जय प्रकाश, दिग्विजय सिंह, प्रेम चन्द्र ने कहा पूरे प्रदेश में दलित व पिछड़े वर्ग के अभियन्ता आन्दोलित हैं, जिस प्रकार से पावर कार्पोरेशन प्रबन्धन मनमाने तरीके से बिजली विभाग में निर्णय करा रहा है, उससे आने वाले समय में ऊर्जा क्षेत्र को तबाही के रास्ते पर जाने से कोई नहीं रोक पायेगा। एक तरफ पावर कार्पोरेशन उदय स्कीम की सफलता के नाम पर पूरे प्रदेश के अभियन्ताओं से रात दिन काम कराने पर आमादा है और वहीं दूसरी ओर निजीकरण का फैसला लेकर यह साबित कर दिया है कि पावर कार्पोरेशन को निजी घरानों की ज्यादा चिन्ता है, जिसे एसोसिएशन कामयाब नहीं होने देगा।







