- एसोसिएशन ने निजीकरण के फैसले पर मा. मुख्यमंत्री जी से पुनर्विचार की उठायी मांग
- निजीकरण के विरोध में अनुसूचित जाति/जनजाति के दर्जनों विभागों के सेवा संगठनों से मांगा समर्थन,सेवा संगठनों ने दिया पूर्ण आश्वासन
लखनऊ, 03 अप्रैल। निजीकरण के विरोध में उप्र पावर आफीसर्स एसोसिएशन के सदस्यों ने 7वें दिन भी नियमानुसार कार्य किया। इसके साथ ही अन्य विभागों में भी जाकर समर्थन जुटाया, जिसमें मुख्य रूप से कृषि विभाग, शिक्षा विभाग, उद्यान विभाग, सिंचाई विभाग सहित दर्जनों विभागों शामिल हैं। सभी विभागों के अनुसूचित जाति/जनजाति के सेवा संगठनों द्वारा निजीकरण के विरूद्ध चलाये जा रहे आन्दोलन में कन्धे से कन्धा मिलाकर आन्दोलन को पूर्ण सफल बनाने का आश्वासन दिया। एसोसिएशन द्वारा सरकार व कार्पोरेशन प्रबन्धन के निजीकरण के फैसले की हठधर्मिता का कड़ा विरोध किया गया। एसोसिएशन द्वारा पुनः निजीकरण के सम्बन्ध में लिये गये निर्णय पर पुनर्विचार करने के लिये मुख्यमंत्री से मांग की गयी।
निजीकरण के विरोध में चल रहे आन्दोलन को और व्यापक रूप देने के लिये एसोसिएशन द्वारा प्रदेश के सभी जिलों की क्षेत्रीय इकाईयों से सम्पर्क किया गया और उन्हें निर्देशित किया गया कि वह आन्दोलन में बढ़ चढ़कर भाग लें। एसोसिएशन की प्रान्तीय कार्यसमिति ने क्षेत्रीय इकाईयों को निर्देशित किया है कि 9 अप्रैल से प्रस्तावित कार्य बहिष्कार आन्दोलन में बढ़ चढ़कर भाग लें और पूर्ण रूप से सफल बनायें।
उप्र पावर आफिसर्स एसोसिएशन के कार्यवाहक अध्यक्ष अवधेश कुमार वर्मा, अति. महासचिव अनिल कुमार, सचिव आरपी केन, एसपी सिंह, राधेश्याम, संगठन सचिव, अजय कुमार, पीपी सिंह व रंजीत ने कहा कि यदि कार्पोरेशन प्रबन्धन द्वारा निजीकरण के फैसले पर पुनर्विचार नहीं किया गया तो आन्दोलन को और व्यापक किया जायेगा।







