Share Facebook Twitter LinkedIn WhatsApp Post Views: 537 लतीयाएं वे जा रहे हैं, जो सज्जन घन घनघोर। ऊँचे उनके भाव हैं, जो है डाकू चोर।। जो है डाकू चोर, वही घर के रखवाले, अंधियारे की मौज, तड़पते फिरै उजाले, जिनकी टेढ़ी चाल, वही अब पूजा जाएं। जो है सज्जन घन घोर, वही जाएं लतीयाएं।। -सीएम त्रिपाठी
‘पुस्तकें मन को एकाग्र कर परंपराओं से जोड़ती हैं’-ब्रजेश पाठक; ईशा-मीशा रतन की कथक प्रस्तुति ने मोहा मन