जी क़े चक्रवर्ती
यह हर इंसान की फितरत ही है कि वह चाहता है कि उसे बुढ़ापा कभी न आए और वह लम्बे समय तक जीवित रहे। लेकिन यह प्रकृति का नियम है कि बढ़ती उम्र का प्रभाव प्रत्येक इंसान पर पड़ता है। हालांकि, दुनिया में एक ऐसी भी जगह है, जहां के लोग कभी बूढ़े नहीं दिखते हैं। यहां की विशेषकर लड़कियां एवं महिलाएं इतनी खूबसूरत होती हैं कि उन्हें देखकर लगता है, मानों धरती पर इस जगह परियां उतर आई हों।
यह जगह किसी स्वर्ग से कम नहीं है। यहाँ के लोगों में खासतौर पर लड़कियां एवं महिलाएं साठ वर्ष की उम्र में भी ऐसी लगती हैं जैसे कोई बीस वर्ष नौजवान लड़की हो। यहां पर मां और बेटी को देखकर उनमें फर्क कर पाना बहुत मुश्किल भरा काम है कि इनमे से कौन मां है और कौन बेटी।
धरती के इस जगह की पानी की तासीर ऐसी है कि यहां औरतें साठ वर्ष की आयु में भी गर्भधारण करती हैं। इस उम्र में मां बनने में इन्हें कोई कष्ट का अनुभव नहीं होती है।

यह जगह है हुंजा घाटी, जो पाक अधिकृत कश्मीर के गिलगित-बाल्टिस्तान के पहाड़ों के मध्य में बसा हुआ। हुंजा घाटी भारत और पाकिस्तान के बीच नियंत्रण रेखा के पास ही स्थित है। इस स्थान को युवाओं की घाटी भी कहा जाता है। इस घाटी के निवासी मानव शरीर में पैदा होने वाले किसी भी प्रकार की बीमारी से मुक्त रहते हैं। शायद यही कारण है कि यहाँ के लोगों की आयु औसतन 110 वर्ष से लेकर 120 वर्षों तक की होती है। यहाँ के हुंजा प्रजाति के लोगों की संख्या लगभग 88 हजार है। इनकी खूबसूरती का राज इनकी जीवन पद्धति एवं रहन सहन के तौर तरीके है।
जिसकी वजह से मोटापा, उच्च रक्त चाप, दिल की बीमारी एवं कैंसर जैसी घातक बिमारियों से मुक्त है। यहाँ पर बसे लोगों ने इन घातक बिमारियों का नाम तक नहीं सुना होगा। उनके स्वास्थ का राज उनका खान-पान एवं जीवन शैली है। यहां के लोग पहाड़ों की शुद्ध वायु एवं जल से जीवन यापन करने के कारण स्वस्थ जीवन व्यतीत करते हैं। मुख्य रूप से यहाँ के लोग बहुत सशक्त होते हैं।
यह लोग बहुत अधिक पैदल चलते हैं और कुछ महीनों तक वे केवल खुबानी खाकर ही अपना काम चलाते हैं। यहाँ के लोग केवल वही खाना खाते हैं जो वे पैदा करते हैं। खूबानी के अतिरिक्त यहाँ के लोग मेवे, सब्जियां एवं अनाज जैसे जौ, बाजरा और कूटू ही इन लोगों का मुख्य आहार है। इनमें फाइबर और प्रोटीन के साथ शरीर के लिए जरूरी सभी मिनरल्स पाये जाते हैं इसके साथ ही साथ यहाँ के लोग अखरोट का भी खूब इस्तेमाल करते हैं। धूप में सुखाए गये अखरोट में बिटामिन बी-17 कंपाउंड पाया जाता है, जो शरीर के अंदर मौजूद एंटी-कैंसर प्रतिरोधक क्षमता को बढ़ाने का काम करता है। इस जनजाति के बारे में पहली बार डॉ. रॉबर्ट मैककैरिसन ने पब्लिकेशन ‘स्टडीज इन डेफिशिएन्सी डिजीज’ में उल्लेख किया था। इसके पश्चात वर्ष 1961 में JAMA जमा में एक लेख प्रकाशित हुआ था जिसमें उनके जीवनकाल के विषय में जानकारी दी गयी थी। यहां के लोग शून्य से भी नीचे के तापमान में बर्फ के ठंडे पानी से नहाते हैं। कम भोजन एवं अधिक टहलना इनके दिनचर्या में शामिल होने से इनकी लंबी आयु का आधार है। दुनिया भर के डॉक्टरों भी यह मानते है कि इनकी जीवन शैली ही इनकी लंबी आयु का कारण है।
हुंजा जाती के लोगों की लम्बी आयु पर डॉ. जे एम हॉफमैन द्वारा किये गए शोध में उनके दीर्घायु होने के राज पर से पर्दा उठाने के लिए उन्होंने हुंजा घाटी की यात्रा भी की। उनके इस शोध का निष्कर्ष वर्ष1968 में आई एक पुस्तक ‘ हुंजा- सीक्रेट्स ऑफ द वर्ल्ड्स हेल्दिएस्ट एंड ओल्डेस्ट लिविंग पियुपुल्स’ (HUNZA – Secrets of the world’s healthiest and oldest living people) नामक पुस्तक में प्रकाशित किये गए थे।







