जी क़े चक्रवर्ती
लम्बे समय से अपनी विभिन्न मांगों को लेकर आये दिन प्रदर्शन करने वाले डाक बाबुओं का मुँह आज प्रधानमंत्री ने घी शक्कर से भर दिया। डाक बाबुओं के लिए इससे बड़ी ख़ुशी कि खबर और क्या हो सकती है कि केंद्रीय कैबिनेट ने देश के 2 लाख 60 हजार डाक सेवकों का वेतन और भत्ता बढ़ाने के प्रस्ताव को मंजूरी दे दी है। डाक सेवकों की सैलरी में 56 प्रतिशत से ज्यादा की बढ़ोतरी की गई है। डाक सेवकों को 1 जनवरी 2016 से एरियर प्रदान किया जाएगा।
मालूम हो कि ‘कहीं ख़ुशी का संदेशा कहीं दर्द का पैगाम लाया’ भारत में डाक सेवा यानि कि ( Indian Postal Service) भारत में मुख्यतः अंग्रेजो द्वारा आज से 150 पहले देश में अलग-अलग जगहों पर अलग-अलग तरीके से चलने वाली भारतीय डाक को एक सूत्र में पिरोने की पहल अंग्रेजो द्वारा की गयी। उसने भारतीय डाक को एक नया रूप और रंग देने का काम किया था। लेकिन अंग्रेज़ों की डाक प्रणाली उनके सामरिक और व्यापारिक हितों पर ही केंद्रित हुआ करती थी। हमारे देश में आज़ादी के बाद से हमारी डाक प्रणाली को हिन्दुस्तान के आम नागरिकों की ज़रूरतों को ध्यान में रख कर उसको विकसित करने का नया दौर शुरू हुआ।
भारतीय डाक सेवा के नियोजित विकास प्रक्रिया ने ही भारतीय डाक सेवा को दुनिया की सबसे बड़ी और बेहतरीन डाक सेवा प्रणाली बनाया है। भारत के राष्ट्र निर्माण में भी डाक विभाग ने ऐतिहासिक भूमिका निभाई है और इसकी उपयोगिता आज भी लगातार बनी हुई है। देश में इंटरनेट की सुविधाएं उपलब्ध हो जाने की वजह से डाक-घर सेवाओं में फर्क अवश्य पड़ा है लेकिन देश में इंटरनेट आने से पहले तक देश का आम आदमी डाकघरों एवं डाकियों पर ही निर्भर रहते थे। इसके प्रारम्भिक दौर के डाकिया एक गांव से दूसरे गांव या शहरो में पहुचने के लिए अपने साथ लाठी-बल्लम भाले के साथ रौशनी के लिए लालटेन इत्यादि लेकर अपनी जान जोखिम में डाल कर लोगों के मनी आर्डर जरुरी चिट्ठियां लेकर लोगो के घरों तक पहुँचाया करते थे। इसके साथ ही डाकिया (पोस्टमैन) पर लोग बहुत भरोसा किया करते है। तमामों उतार-चढ़ाव के बावजूद इतना अधिक विश्वासनियता कोई अन्य सरकारी संथान संस्थान ने अर्जित नहीं किया। हमारे देश में डाकिया एक बहुत ही उपयोगी व्यक्ति होता है। वह बड़ा ही परिश्रमशील व्यक्ति है । उसका काम पत्रों, पार्सलों, मनीऑर्डरों को घर-घर लोगों तक पहुँचाना मात्र नहीं होता वल्कि जब कोई व्यक्ति अनपढ़-गवाँर होता तो उसके घर के लोगों द्वारा भेजी गयी चिठियों को उसे पढ़कर भी सुनाता है। वह नौकरी के समय खार्की वर्दी और खाकी टोपी पहने रहता था हालाँकि अब वर्तमान में उसकी ड्रेस बदल गयी हैं अब उसकी ड्रेस सफेद शर्ट और नीली पैंटहो गयी और अब उसे छोटी बाइक भी उपलब्ध है।
वह अपने पास पहले चमड़े का थैला रखता था जो अब बदलकर कपडे का बैग हो गया है। जिसे वह अपने कंधे पर लटकाये रखता है। डाकिये का कार्य बहुत ही कठिन तथा थका देने वाला काम होता है । एक क्षेत्र से दूसरे में एक मुहल्ले से दूसरे मुहल्ले में, एक गली से दूसरी गली में तथा एक घर से दूसरे घर तक पत्रों को उसे पहुँचाना होता है। धीरे – धीरे हर क्षेत्र, हर मुहल्ला, हर घर उसकी याद में समा जाता है। लोग उसकी प्रतीक्षा व्याकुल होकर किया करते थे। कुछ को वो सुखद समाचार लाकर देता है तो कुछ को वह दु:खद समाचार। वह रोजाना काम करता है। गर्मी, बरसात या सर्दी हो उसे तो अपना कर्त्तव्य पूरा करना है । डाकिये का कार्य इतना कठिन और थकाऊ होने पर भी उसका वेतन केंद्र सरकार के कर्मचारियों से उसका वेतन बहुत ही कम होता है उसे जो कामचलाऊ वेतन मिलता है वह उसकी आवश्यकता से भी बहुत कम होता है। हालाँकि आज जब (मोदी सरकार) प्रधानमंत्री ने देश के 2 लाख 60 हजार डाक सेवकों का वेतन-भत्ता बढ़ाने के प्रस्ताव को मंजूरी दी तो उनके चेहरे खिल उठे।
केंद्र सरकार ने ग्रामीण डाक सेवकों के लिए जो आज बड़ी घोषणा की है। वह एक मील का पत्थर साबित होगी केंद्रीय कैबिनेट ने देश के 2 लाख 60 हजार डाक सेवकों का वेतन और भत्ता बढ़ाने के प्रस्ताव को मंजूरी दे दी है। डाक सेवकों की सैलरी में 56 प्रतिशत से ज्यादा की बढ़ोतरी की गई है। डाक सेवकों को 1 जनवरी 2016 से एरियर प्रदान किया जाएगा। ग्रामीण डाक सेवक अपने वेतन-भत्ते में बढ़ोतरी के लिए लंबे समय से मांग कर रहे थे। कई बार उन्होंने सेवाएं भी ठप कर दी थी।







